Birhaa

17 Feb

हमसे कुछ भी कहा नहीं जाता
उनसे चुप कभी रहा नहीं जाता !

राख हो तो गयीं मेरी तमन्नाएं
इनसे अब और ढहा नहीं जाता !

पूछा लाख सबने सबबे दर्दे दिल
नाम उनका तो कहा नहीं जाता !

बाकी और जितना भी है सफर
दूर तक इतना बहा नहीं जाता !

जख्म बहुत खाये हैं तेरी खातिर
दर्द और अब तो सहा नहीं जाता !

तेरे मन की समझे नहीं ‘मिलन’
सुना हमसे ये बिरहा नहीं जाता !!

‘मिलन’ “मोनी”

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Kaalchakr

10 Feb

कभी बनते बनते बन जाती है
कभी ठनते ठनते ठन जाती है !

न चाहते हुए भी आपको नज़र
कंभी बचते बचते लग जाती है !

फ़ोकट का खाने वालों की घंटी
कभी बजते बजते बज जाती है !

राज नेताओं के इल्म की बत्ती
कभी जलते जलते बुझ जाती है !

रौशनी चरागों में रात होने पर
कभी बुझते बुझत जल जाती है !

खुशियों की यह धूप सहन में
कभी ढलते ढलते ढल जाती है !

आदत बुरी जल्दी ज़िन्दगी में
कभी लगते लगते लग जाती है !

कालचक्र की यह गाडी ‘मिलन’
कभी चलते चलते रुक जाती है !!

मिलन “मोनी”

Jyotish

27 Jan

अजनबी चेहरों से अपने दिल के राज़ बताना क्यों
जिन महफिल में आप नहीं उनमें मेरा जाना क्यों !

बात कहीं से चलते चलते जाने कहाँ तक पहुंचेगी
अपनी अपनी तन्हायी से दुनिया का है नाता क्यों !

सदियों सदियों बन्धे रहे रिश्तों की जंजीरों में हम
फिरभी अबतक है इतना रिश्ता ये अनजाना क्यों !

मेरी तरह तुम भी न सोये कितना रातों रात रोये
भूली बिसरी यादों को इतना दिल से लगाना क्यों !

प्यार मोहब्ब्त एक बाज़ी है हारा कोई जीता कोई
खेल यही है आशिकी तो ग़मों से ये घबराना क्यों !

कहा बहुत तो सूना बहुत कहासुनी में बीता वक़्त
छोडो इनपे मिटटी डालो इनको अब दोहराना क्यों !

ऊपर वाले ने लिख ही दी है किस्मत तेरी ‘मिलन’
ज्योतिषी को हाथ दिखा खुद पर दाव लगाना क्यों !!

मिलन “मोनी”

Raat Ke Baad

26 Jan

उगेगा सूरज दोबारा रात के बाद
दिन होगा उजियारा रात के बाद !

रौशनी करने चराग जल जल के
कब बन जाये धुँआ रात के बाद !

वक़्त गुजारने के बाद खुद वक़्त
सुनायगा ये किस्सा रात के बाद !

पूछ रहा है चाँद आसमां से आज
कहाँ बनेगा ठिकाना रात के बाद !

धुन में आकर पी लो अन्धा धुन
नशे का पता चलेगा रात के बाद !

हो अच्छा या बुरा ना रहेगा सदा
मौसम भी बदलेगा रात के बाद !

बनते बनते अब टूट रहे हैं रिश्ते
कौन रहेगा किसका रात के बाद !

कौन साथ रहेगा आखिर ‘मिलन’
इतना कौन चलेगा रात के बाद !!

मिलन “मोनी”

Kuchh Aur Hota Hai

25 Jan

कहा कुछ और होता है
सुना कुछ और होता है !

यहाँ कुछ और होता है
वहां कुछ और होता है !

पिया कुछ और होता है
नशा कुछ और होता है !

जला कुछ और होता है
धुआ कुछ और होता है !

चला कुछ और होता है
लगा कुछ और होता है !

बना कुछ और होता है
बुना कुछ और होता है !

नफ़ा कुछ और होता है
जमा कुछ और होता है !

चढ़ा कुछ और होता है
गला कुछ और होता है !

‘मिलन’ बतौर होता है
जुदा कुछ और होता है !!

मिलन “मोनी”

Hawaayen

25 Jan

ये हवाएं ही हैं जो शम्मा जला जातीं हैं
ये हवाएं ही हैं जो चराग बुझा जातीं हैं

दु:खों के बादल कभी सुख की बरसात
ये हवाएं ही हैं जो हालात बता जातीं हैं

इधर की बात उधर कब उधर की इधर
ये हवाएं ही हैं जो अफवाहें उड़ा जातीं हैं

कुछ नमी आँखों की कुछ हंसी होंठों की
ये हवाएं ही हैं जो यह सब बहा जातीं हैं

टिकती नहीं कोई रुकावट इनके सामने
ये हवाएं ही हैं जो आसमां हिला जातीं हैं

पहुँचते हैं सफीने भी किनारे तक ‘मिलन’
ये हवाएं ही हैं जो पानी लहर बना जातीं हैं

मिलन “मोनी”

Shaatir

21 Jan

वक़्त के साथ लोग बदलते रहे
पर हम अपने रास्ते चलते रहे !

आंधी चलीं कितने तूफांन चले
गिरते रहे फिरभी सम्भलते रहे !

अंधेरे रास्तों से हम डरे जो नहीं
कदम कदम संभल के चलते रहे !

वह सामने आये तो हूर की तरह
ख्याल उन्हें देखकर मचलते रहे !

आसमान पे चढ़े शम्स की तरह
शाम ढले शितिज पर उतरते रहे !

जरा सी भी अक्ल लगायी नहीं
लोग हमको शातिर समझते रहे !

इशारों को समझते नहीं ‘मिलन’
बात बातो में ही बात बदलते रहे !!

मिलन “मोनी”