” शिकायत हैं “
मेरी नजरे आपसे करती शिकायत हैं,
क्यों देखने में आप इतनी खूबसूरत हैं १
आशिकी में अब क़ज़ा की क्या जरूरत है,
मुस्कुराहट आपकी जब खुद कयामत हैं २
मेरे दिल का हाल तो दुनिया को मालुम है,
आपकी आंखों में भी आखिर शरारत हैं ३
मेरी नजरे आपसे :———-
रस्में उल्फ़त में कोई सौदा नही होता मगर,
दिल के बदले दिल ही देने की इज़ाज़त है ४
कट रहीं हैं रात जिस जुनूनों शौक में,
कुछ नहीं बस आपकी नज़रें इनायत हैं ५
मेरी नजरे आपसे ——-
ना ना करके भी ये दिल हमही को दे दिया,
आप हो संगदिल मगर कुछ तो नजाकत है ६
इश्क में जीना मिलन इश्क मे ही मरना,
आशिकों की शायद ये ही रवायत है ७
मेरी नजरे आपसे करती शिकायत हैं
क्यों देखने में आप इतनी खूबसूरत है ,।।
मिलन “मोनीl
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