Shikayat Hain

2 Apr

” शिकायत हैं “

मेरी नजरे आपसे करती शिकायत हैं,

क्यों देखने में आप इतनी खूबसूरत हैं १

आशिकी में अब क़ज़ा की क्या जरूरत है,

मुस्कुराहट आपकी जब खुद कयामत हैं २

मेरे दिल का हाल तो दुनिया को मालुम है,

आपकी आंखों में भी आखिर शरारत हैं ३

मेरी नजरे आपसे :———-

रस्में उल्फ़त में कोई सौदा नही होता मगर,

दिल के बदले दिल ही देने की इज़ाज़त है ४

कट रहीं हैं रात जिस जुनूनों शौक में,

कुछ नहीं बस आपकी नज़रें इनायत हैं ५

मेरी नजरे आपसे ——-

ना ना करके भी ये दिल हमही को दे दिया,

आप हो संगदिल मगर कुछ तो नजाकत है ६

इश्क में जीना मिलन इश्क मे ही मरना,

आशिकों की शायद ये ही रवायत है ७

मेरी नजरे आपसे करती शिकायत हैं

क्यों देखने में आप इतनी खूबसूरत है ,।।

मिलन “मोनीl

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Dayar Me

5 Jan

“ दयार में “

इसका तरीकेकार जरा समझाओ तुम,

आग जो लगाई वही आग बुझाओ तुम।१

पतझड़ में मुरझा गई जो डाल फूल की, 

कली सी खिल बाग वही महकाओ तुम।२

ज़माना नहीं समझता तेरे मेरे रिश्ते को,

हुस्नो इश्क के तआलुक समझाओ तुम।३

भरे शहर में रहने को घर न मिले अगर,

मेरा दिल अपना आशियाना बनाओ तुम।४

कुछ नजर आता नहीं है मुझको दयार में,

तो अपनी नजर से दुनिया दिखाओ तुम।५

जिसे सुन कर ‘मिलन’ खुद शायर बना,

आज फिर वो ही गजल गुनगुनाओ तुम।।६

मिलन  “ मोनी “

Peher

9 Dec

” पहर “

पानी जब सर से ऊपर गुजर जाता है,

तैरने वालों का भी नशा उतर जाता है।१

बाग में जो कली फूल बन मुस्काती है,

ये भंवर ही शहद चूसने उधर जाता है।२

तेरे इंतजार ए मोहब्बत में सनम अब,

ये सफर गुजर और वक्त ठहर जाता है।३

हासिल नहीं है कुछ इस बात को लेकर,

मरने के बाद ये आदमी किधर जाता है।४

गांव गांव में किसान जो रोटी उगाता है,

वही एक दिन रोटी कमाने शहर जाता है।५

वो आदम खोर भेड़िए घूमते हैं हर तरफ़,

देख कर जंगल में शेर भी सिहर जाता है।६

सियासत पे भी जब होने लगे सियासत,

जनता का दिल नेताओं से उतर जाता है।७

जिंदगी कटती ‘मिलन’ देखते ही देखते,

एक पहर आता है तो एक पहर जाता है।।८

मिलन ” मोनी “

Churana Hoga

2 Dec

” चुराना होगा “

अपने घर को फूलों से सजाना होगा,

डाल डाल से कांटों को हटाना होगा।१

अब अंधेरों में सफ़र मुमकिन नहीं,

हर मुंडेर पे एक सूरज उगाना होगा।२

वो जिनसे सितारे मिलते नहीं मेरे,

उनसे भी एक रिश्ता निभाना होगा।३

अपनों में ही कुछ गैर बन जाते हैं,

हर एक गैर को अपना बनाना होगा।४

उम्र की इक दहलीज को पारकर के,

हकीकत को खुद से भी छुपाना होगा।५

वक्त से कीमती कुछ है नही ‘मिलन’

अपने लिए कुछ इसे भी चुराना होगा।।६

मिलन ” मोनी “

Justju e Hayaat

21 Nov

” जुस्तजू-ए-हयात “

जुस्तजू-ए-हयात में बस यही कश्मकश रही।

न मरने का हौसला, न जीने की आरजू रही।।

गजल

नफरतों से हर रिश्ता सिकुड़ जाता होगा,

खून का कतरा कतरा निचुड जाता होगा।१

सियासत में पनपते हैं भ्रष्टाचारी नेता पर,

वह भ्रष्टाचारी कहने पर कुढ़ जाता होगा।२

खुश हाली और तरक्की की सोचें अगर,

ईमान मुस्तकबिल से ही जुड़ जाता होगा।३

नफरत और मोहब्बत में जंग हो जाए तो,

हरेक दिल प्यार की तरफ़ मुड़ जाता होगा।४

अपने ही मतलब की ‘मिलन’ बस बात करे,

वो अपना ही अपनो से बिछुड जाता होगा।।५

मिलन ” मोनी “

Koi Ho Tum

25 Oct

” कोई हो तुम “

कब से मेरी बाहों में सोई हो तुम,

जाने किन खयालों में खोई हो तुम।१

बस मासूम कली की खुशबू जैसी,

एक सतरंगे धागे में पिरोई हो तुम।२

कहां कहां जाने दिल में खोजूं तुम्हें,

हर एक कोने कोने संजोई हो तुम।३

वहां जहां कच्चा खाना नहीं होता,

ऐसी ही एक पक्की रसोई हो तुम।४

नम आँखें गीले गाल भीगे तकिए,

लगता है रात काफी देर रोई हो तुम।५

तुम मेरे दिल से ‘मिलन’ खेलती हो,

नाम नहीं मालूम मगर कोई हो तुम।। ६

मिलन “मोनी “

Tara

14 Oct

” तारा “

सफर पूरा नहीं हुआ पर किनारा आ गया,

जिस रास्ते से चले थे वही दुबारा आ गया।१

अब आंखों से भी कुछ दिखायी नहीं देता,

आसमान पर ये कौन सा सितारा आ गया।२

ख्वाबों में देखा था उन्हें अंगड़ाई लेते हुए,

हकीकतन सामने वैसा ही नजारा आ गया।३

बड़े बेआबरू होकर उस घर से हम निकले,

उस ही जगह फिर ये दिल बंजारा आ गया।४

किस्मत कहूं या इसको खुदा की मर्जी के,

कैसे तुम्हारे हाथ में, हाथ हमारा आ गया।५

भाग्य तुम्हारा यकीकन बदलेगा ‘मिलन’

नजर में टूटते हुए जो एक तारा आ गया।।६

मिलन ” मोनी “

नीयत

11 Oct

” नीयत “

जिंदगी उस दिन अंधेरों से भर गई,

शम्मा जिस रात हवाओं से डर गई।१

मजलूम को जो सजाए मौत मिली,

अदालत निकाह गुनाहों से कर गई।२

लहरों में ऊपर वाले का रहा सहारा,

कश्ती उसकी मझधारों से तर गई।३

देख के उन्हें जो होठ मुस्कुरा दिए,

सारी खता तो निगाहों के सर गई।४

कड़ी धूप आई तो कच्चे मकां से,

ये गीली मिट्टी दीवारों से झर गई।५

इठला के चलने से नीयत “मिलन”

तेरी कमसिन अदाओं पे मर गई।।६

मिलन ” मोनी “

Ho Gai Hai Meri

3 Oct

” हो गई है मेरी “

आयनों से अब बात हो गई है मेरी,

खुद से ही मुलाकात हो गई है मेरी।१

तुम मिले तो बदल गयी यह जिन्दगी,

ख्वाबों से जान पहचान हो गई है मेरी।२

मानने को दिल नहीं करता है फिरभी,

मुश्किलथोड़ी पशेमान हो गई है मेरी।३

दौरे दुश्वारी आया भी, गया भी मगर,

नींद आंखों से अंजान हो गई है मेरी।४

कैसा सौदा मौत से कर लिया हमने,

जिंदगी खुदपे एहसान हो गई है मेरी।५

जो कहा नहीं कभी, उसकी चर्चा है,

कसम शायद बेईमान हो गई है मेरी।६

तुम हम कदम,थे हम सफर ‘मिलन’

जिंदगी बहुत आसान हो गई है मेरी।।७

मिलन ” मोनी “

,

Ho Jata Hai

21 Sep

” हो जाता है “

कुछ इधर का उधर हो जाता है,

सब कुछ इधर उधर हो जाता है।१

दिल मेरा उनके इश्क में रंग गया,

हुस्न का खासा असर हो जाता है।२

महंगी पड़ी है मोहब्बत जब जब,

मुफलिसी में भी बसर हो जाता है।३

मरीज पर कोई दवा शिफा न करे,

वो दुआओं की नजर हो जाता है।४

हो जाए बड़ा हादसा जिस जगह,

बेवजह बदनाम शहर हो जाता है।५

बे-रूखी से परोसा गया “मिलन”

पकवान भी जहर हो जाता है।।६

मिलन ” मोनी “

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