Aadmi

12 Oct

खुद को धोखा रोज़ देता आ रहा है आदमी
अपने मुक़ददर से लड़ता आ रहा है आदमी !

ओर का कुछ पता है न छोर का ही पता
अन्धेरी राहों पर चलता जा रहा है आदमी !

ये खून के रिश्ते भी जैसे हो गए हैं पानी
भाई से भी आज धोखा खा रहा है आदमी !

भगवान के उसूलों को तो ताक पे रख के
राग अपनी अलग अलग गा रहा है आदमी !

इन अंधेरों से निबटने के लिए कई बार तो
रौशनी की किरण बन के छा रहा है आदमी !

पहन कर के राम रहीम का चोला ‘मिलन’
पूरी कायनात में ही कहर ढा रहा है आदमी !!

मिलन”मोनी”

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Deewana Ho Gaya

7 Oct

देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !
हुस्न की शम्मा का यह परवाना हो गया !!

ऐसे मिल रही हो मुझसे
जैसे पहली बार मिली हो
हुस्न और इश्क की जैसे
नयी नयी कली खिली हो
आयने में देखके बहुत शरमाना हो गया
देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !!

झोंका एक हवा का आके
महक जो तेरी फैला गया
घर का कोना कोना मेरा
खुशबू से तेरी नहा गया
उस शब् से मन मेरा आशिकाना हो गया
देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !!

तेरा हर ग़म मेरा अब
मेरा हर पल तेरा अब
जीवन में भी तेरे मेरे
नहीं रहा अन्धेरा अब
कुछ पलों में जैसे सब उजियारा हो गया
देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !!

मिलन “मोनी”

Mahtabi

6 Oct

नाशाद दिलों पे जैसे जादूगरी हो गयी
वो जो मुस्कुराए तबीयत हरी हो गयी !

अब ज़िन्दगी से मुझे खौफ होता नहीं
मेरी मौत से जो गहरी दोस्ती हो गयी !

चन्द लम्हे क्या गुजारे हैं बिन आपके
ऐसा लगता है जैसे एक सदी हो गयी !

चाँद घटाओं से बाहर निकला भी नहीं
माहताबी खुद ब खुद शायरी हो गयी !

जो देता रहा है वक़्त हरवक़्त मुझको
शायद उसे भी वक़्त की कमी हो गयी !

बांटे हैं ‘मिलन’ ग़म ज़मानों के हमनें
क्योकि महंगी बड़ी अब ख़ुशी हो गयी !!

मिलन “मोनी”

Humdam

29 Sep

अपने दिल का मुझे भी पता दीजिये
कुछ इशारों इशारों में ही बता दीजिये !

प्यार की इस अदालत में जो चाहिए
दफा मुनासिब सी कोई लगा दीजिये !

मेरी रग रग में जो रची बसी रागिनी
अधरों पे रख बाँसुरी सी बजा दीजिये !

वसले-शब् के दिखाए थे आँखों ने जों
ख्वाब पलकों पर वो ही सजा दीजिये !

इश्क के खेल में जो आशिक नाकाम
चार आंसू कभी उन पर बहा दीजिये !

रोग जाने ‘मिलन’ये क्या लग गया
कोई हम-दर्द की हमदम दवा दीजिये !!

मिलन “मोनी”

२८/९/२०१७

Dheere Dheere

20 Sep

आप ही आप हर तरफ नज़र आयेंगे,
आयना दिल का लेकर जिधर जायेंगे !

रात दिन मेरे तस्सवुर में तुम्ही हो,
बचके तुमसे भला हम किधर जायेंगे !

तेरी हुस्न ए खुश्बू इन फ़ज़ाओं गुम,
तुम जिधर जाओगे हम उधर जायेंगे !

आपसे शौक है आप से रंगे महफिल,
तुम न होगे तो ये सब बिखर जायेंगे !

इन्तजारे मोहब्बत से दिल भर गया,
आप हैं जो करके वादा मुकर जायेंगें !

मोहब्बत में माना हैं तंगहाथ ‘मिलन’
धीरे धीरे ही सही मगर सुधर जायेंगे !!

मिलन “मोनी”

Gaav Sookha

16 Sep

कुछ पानी आँखों का निचोड़ आये हैं
नदी किनारे गाँव सूखा छोड़ आये हैं!

हरेभरे वो खेत और बाग़ बागीचों से
जाने कैसे रिश्ता उनसे तोड़ आये हैं!

मेरे आँगन की तुलसी अभी मुरझाई
उसका बंधन वीराने से जोड़ आये हैं!

कुछ नए रिश्तों का आगाज़ हो गया
चौखट पे नारियल हम फोड़ आये हैं!

गाँव में अपने क्या नहीं था सुखचैन
जो अपने सपनों को झंझोड़ आये हैं!

शान और शहर की चका चौंध देखने
हम जैसे जानें कितने करोड़ आये हैं!

ये कौन से शहर में आ गए’मिलन’
जो खुशहाली का गला मरोड़ आये हैं!!

मिलन ‘मोनी’

Aadat Dal Lo

14 Sep

ग़मों में मुस्कुराने की आदत डाल लो
ज़ख्मों को छुपाने की आदत डाल लो !

मेरे दिल के आयने में ही देख देख के
श्रृंगार कर संवरने की आदत डाल लो !

बेला हरश्रृंगार या इत्र केवड़े की सुगंध
जिस्म में महकने की आदत डाल लो !

मैं इधर तुम उधर क्यों अलग अलग
साथ साथ टहलने की आदत डाल लो !

एक कली की तरह दिल में सजाया है
हदों से गुज़र जाने की आदत डाल लो !

गहरी रात हो या उगते दिन का सवेरा
मुझमें ही सिमटने की आदत डाल लो !

एक उम्मीद की किरण बनकर मुझमें
हर सुबह चमकने की आदत डाल लो !

बदला है ये ज़माना ‘मिलन’ के साथ
तुम खुदको बदलने की आदत डाल लो !!

मिलन “मोनी”