Archive | April, 2017

Tum Deep Si

30 Apr

तुम दीप सी दिल में मेरे जलती रहीं,
सपनों को मेरे तो रौशनी मिलती रही.

चाँद तारों की चुनरिया ओढ़ कर यह,
रात भी दुल्हन की तरह सजती रही.

चराग यादों के जितने यहाँ जल गए,
तेज़ उतनी ज़ालिम हवायें चलती रही.

इस मोहब्बत की सुलगती आग में,
शीश ए दिल को सजा मिलती रही.

सुबह का नामोनिशा ना मिल सका,
ये रात थी के उम्र भर ढलती रही.

आसमां बन के’मिलन’तुम छा गए
बात चाँद तारों की महज़ उठती रही !!

मिलन ‘मोनी’

Dharti Umber

26 Apr

यादों में वो लम्हे बसे हों पहली पहली बार
राहों में हम तुम मिलें हों पहली पहली बार

पिघल के मेरी बाहों में समाये तुम ऐसे कि
धरती अम्बर मिल रहें हो पहली पहली बार

पतझर का मौसम भी देखो लग रहा है जैसे
मुस्कानों के फूल खिले हों पहली पहली बार

दिल के बागीचे में तेरे पाँव पड़े तो यह लगा
कलियों से ही बात हुई हो पहली पहली बार

तेरी मस्त निगाहों के जो चढ़ाये हमने जाम
मयखानों में धूम मची हो पहली पहली बार

इश्क के अँधेरे उजाले से गुज़रे तो यह लगा
बरसातों में धूप खिली हो पहली पहली बार

तुमने अपने हाथों में जो लिया था मेरा हाथ
हर सपना साकार हुआ हो पहली पहली बार

करके वादा मिलन का जब न पहुंचे ‘मिलन’
लगा के रब ही रूठ गया हो पहली पहली बार !!

मिलन “मोनी”

Vehem

21 Apr

बदन फूलों सा तेरा, कुछ महका महका है
यह शाम का मौसम, कुछ बहका बहका है

इस शाख पर जब से सुर्ख गुलब खिला है
परिंदों का मिजाज़, कुछ चहका चहका है

उठने लगा है धुँआ सा मेरे होशो-हवास में
शोला-ए-हुस्न आज, कुछ दहका दहका है

कीमत इंसानियत की नहीं रही अब मगर
बाज़ार में सामान ही,कुछ महगा महगा है

नज़र मिलते ही कहीं नज़र न उनको लगे
बेक़रार यह दिल ही, कुछ सहमा सहमा है

वो बन कर खुशबू लिपट न जाये ‘मिलन’
बेवजह आज मन ये, कुछ वहमा वहमा है !!

मिलन “मोनी”

Kise Achchhaa Lagta Hai

13 Apr

” किसे अच्छा लगता है ”

निभाना फ़र्ज़ किसे अच्छा लगता है
चुकाना क़र्ज़ किसे अच्छा लगता है

अमावस्य में तो चाँद नहीं होता तब
अँधेरे में अर्श किसे अच्छा लगता है

जिन पैरों को मखमल की आदत हो
कांटो का फर्श किसे अच्छा लगता है

हरबात उसकी मर्ज़ी के खिलाफ कर
गुजारना नर्क किसे अच्छा लगता है

जब लाओ कुछ काम का सामान हो
बकवास खर्च किसे अच्छा लगता है

नया साल तो मनाते हैं हर साल पर
मुफलिस वर्ष किसे अच्छा लगता है

जितनी कही बात, मान लो’मिलन’
हर बार तर्क किसे अच्छा लगता है !!

मिलन “मोनी” १२/4/२०१७

Hawa

12 Apr

सुलगती आग को और भड़का देगी हवा
धुँआ बहुत दूर तक उड़ा ले जायेगी हवा

साया-ऐ-शजर पर भरोसा नहीं कीजिये
जानें कब दरख्तों को गिरा जायेगी हवा

दिलों की रौशनी से ख़्वाबों को सजाओ
चराग आँधियों में तो बुझा जायेगी हवा

जल गया क्या खाक हुआ जान न पाए
हवा से पूछिए हालात बता जायेगी हवा

सौदा करें तो सिर्फ अपने आपसे ‘मिलन’
ऐसे में किसको क्या सज़ा दे जायेगी हवा !!

मिलन “मोनी”

Beshumaar

11 Apr

तेरे क़दमों पर हमने दिल-ओ-जाँ निसार किया
प्यार कहते हो इसे तो वाकई हमने प्यार किया

झपकी नहीं पलकें भी हमने एक तेरे दीदार तक
कहते इसे तुम इंतज़ार तो शायद इंतज़ार किया

इस दिल के बदले तेरा दिल ही तो लिया है मैंने
ये भी एक व्यपार है तो हमने भी व्यपार किया

हुस्न-ओ-शावाब पे तेरे लिख दिए अफ़साने कई
जो तुम्हे है स्वीकार तो हमने भी स्वीकार किया

प्यार के अंदाज़ का कोई पैमाना नहीं होता’मिलन’
तुमने जो शुमार किया तो हमने भी बेशुमार किया !!

मिलन “मोनी”

Dastan

6 Apr

अपनी तन्हाई को राजदार बना लिया हमने
दरो दीवार को ही हमराज़ बना लिया हमने

दर्देदिल का अहसास भी न होने दिया उनको
एक समन्दर सा आँखों को बना लिया हमने

डरता नहीं मैं उनकी निगाहें कातिल से कभी
अपने कदम को सरेमर्ग तक बढा लिया हमने

ज़िन्दगी के जख्मों को अपने सीने में छुपाके
उनको दर्दे दिले का मरहम बना लिया हमने

उठ कर कौन जाए मयखाने तक शामो-सहर
अपना बिस्तर तक मयकदा बना लिया हमने

दिल के राज़ बतलाने तो थे बहुत से ‘मिलन’
अपनी धडकनों को दासतान बना लिया हमने !!

मिलन “मोनी”