Archive | October, 2016

Usne Suna Nahi

20 Oct

आँखों से राजे दिल उससे छुपा नहीं
मैं पूछता रहा मगर उसने कहा नहीं

मैंने दी आवाज़ बहुत मगर रुका नहीं
अपने दिल से कुछभी उसने सुना नहीं

माना नज़र से दूर हूँ एक अरसे से मैं
यकीनन मेरे दिल से रही तू जुदा नहीं

मेरे लबों पे बात जो अबतक आई नहीं
अश्कों ने क्या तुमसे कुछ भी कहा नहीं

दिल की बात सुनकर हर फैसला लिया
दिमाग ने जो कहा वो कभी सुना नहीं

अफ़सोस नहीं’मिलन’के कुछ सुना नहीं
अफ़सोस के बात को सुन कर सुना नहीं !!

मिलन “मोनी”

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Aastino me

4 Oct

आप वहां शामिल हैं हम नशीनों में
सांप ही जहाँ पलते हैं आस्तीनों में

दुश्मनों से दोस्ती की तो यह जाना
रंजिशें बसी ही रहती हैं कमीनों में

एक मासूम बीज से यहाँ पेड़ उगाया
आदमी ने बाँट दिया इन्हें ज़मीनों में

आपके प्यार को बचाने के लिए मैंने
राज़ बहुत छुपा लिए हैं इन सीनों में

जब से आकर बैठा इन नाज़नीनों में
साल दर साल गुज़रते गए महीनों में

फल बुराई का तो मिलेगा बुरा’मिलन’
जाओ कितना भी काशी या मदीनो में !

मिलन “मोनी”

Dekhte Reh Gaye

4 Oct

कब जवानी ढली देखते रह गए
कब उम्र हो चली देखते रह गए

मुस्कुरा के मेरे करीब से निकल
हुस्न की वो कली देखते रह गए

वो आए इधर औ कब चल लिए
हम वो खाली गली देखते रह गए

उनके तेवर बदले नहीं आज भी
हमतो रस्सी जली देखते रह गए

क्या कातिल अदायें रही आपकी
हम वो सूरत भली देखते रह गए

वो आने का कह के भी आए नहीं
हम बेसबर से घडी देखते रह गए

मेरे ख़त जो जलाए हैं उनमें अभी
तेरी तस्वीर जली देखते रह गए

मौत सजके चली गयी जो मिलन
राख यादों की जली देखते रह गए !!

मिलन “मोनी”