Archive | March, 2017

Gunjaaish

25 Mar

तू साथ है तो ज़िन्दगी की ख्वाइश है
वरना ये महफिल तो एक नुमाइश है

कैसे इशारों इशारों में होतीं हैं गुफ्तगू
हमारी मोहब्ब्त की ये बस पैमाइश है

एक आलिंगन एक चुम्बन एक गज़ल
वस्ले शब् में सिर्फ इतनी फरमाइश है

नशीली ये नज़र है या नशा होंठों का
तेरे हुस्न में अजब एक आशनाइश है

इस कदर खफा है यह ज़िन्दगी हमसे
यह भी हमारी मोहब्ब्ते-आज़माइश है

सोचा नहीं के इतना बदलेगा ‘मिलन’
तुझे मनाने में ही इश्क-ऐ-गुंजाइश है !!

मिलन “मोनी”

Yaad Aai Hai Mujhe

23 Mar

वस्लो-फुर्कत की हर रात याद आई है मुझे
याद किया है तो हर बात याद आई है मुझे

ज़रा ज़रा सी बात पे रात दिन उदास रहना
मेरी दिल्लगी इसही मुकाम पे लाई है मुझे

दिल खोल के हर बात मैं कह रहा हूँ उनसे
आज क़यामत सी ही मयकशी छाई है मुझे

मैं जुदा भी हो जाऊं इस ज़िन्दगी से मगर
कोई शय मोहब्ब्त से ना छीन पाई है मुझे

झोंके तेज़ हवाओं के’मिलन’ तो ठीक लगें
कभी नफरतों की आंधियाँ ना भाई है मुझे !!

मिलन “मोनी”

Kabhi Kabhi

22 Mar

चाहते हैं कहना मगर कहते नहीं हैं कभी कभी
मुनासिब आशार ही मिलते नहीं हैं कभी कभी

कोशिस बहुत जान लगाके करते तो हैं लेकिन
ठहरे हुए फैसले भी बनते नहीं हैं कभी कभी

कितने सितारे मिलाके बनाते हैं जीवन साथी
हमराही भी साथ में चलते नहीं हैं कभी कभी

एक अच्छी उपजाऊ ज़मीं होने के भी बावजूद
दरख़्त कोई तंदरुस्त उगते नहीं हैं कभी कभी

घड़-घडाते बिजली चमकाते निकलते हैं मगर
कालेघने बादल भी बरसते नहीं हैं कभी कभी

मैं सो जाऊं’मिलन’ मेरी आँखों से देख लेना
जागे में ख्वाब सुहाने आते नहीं हैं कभी कभी !!

मिलन “मोनी”

Saanp

20 Mar

ज़माने ने भी कुछ गुल खिलाये हैं यहाँ
जो अपनों ने हमें ज़ख्म लगाये है यहाँ

तेरे प्यार की राह पर बेखौफ चलते ही
जमाने ने मुझपे इलज़ाम लगाए हैं यहाँ

तुझको खुश रखनें के लिए हमेशा हमनें
बच्चे भी गोदी में लेकर बहलाए हैं यहाँ

रौशनी सिर्फ तेरे हुस्न की नहीं है सनम
हमने भी मुदत्तों ये दिल जलाए हैं यहाँ

पलते रहे हमारे ही आस्तीनों में’मिलन’
हर मौसम साँपों को दूध पिलाए हैं यहाँ !!

मिलन “मोनी”

He Prabhu

13 Mar

हे प्रभु,
इस दास की
इतनी विनय सुन लिजिये,
मार ठोकर नाव मेरी
पार ही कर दीजिये !
मैं नहीं डरता,
प्रलय से,
मौत या तूफ़ान से,
रूह मेरी कांपती है,
बस सदा इम्तेहान से !

पाठ पढ़ना,
याद करना,
याद करके सोचना,
सोच कर लिखना उसे,
लिख कर उसे फिर घोटना,
टाय टाटा टाय टाटा
रोज़ रटता हूँ प्रभु,
रात दिन पुस्तकों के
पन्ने उलटता हूँ प्रभु,
किन्तु जाने भाग्य में
यह कौन सा अभिशाप है
रात भर रटता,
सुबह मैदान मिलता साफ़ है !

मेरे अभिन्न मित्र ने
सरल हल बतलाया,
हर विषय की पर्ची बनालो
मुझको यह समझाया,
पर इसमें तो मेरा,
बहुत समय लग जाएगा,
दो एक चिट बनाने से
क्या काम मेरा चल पायेगा,
चार सौ पन्नों की पुस्तक से
कितनी चिट बनाउंगा,
टीचर को गर पता लग गया
मार बहुत फिर खाउंगा,
कुछ डर डर कर
कुछ हिम्मत करके,
खुद को खींच लाया हूँ
इम्तेहान देने आया हूँ!

प्रभु तेरा हद से ज़्यादा
आशीष लेने आया हूँ,
कुछ तेरे वास्ते भी
भोग लगाने लाया हूँ,
दो आने का टीका चन्दन
चार आने का फूल प्रसाद,
बस इतनी ही लेकर घूस
कर देना मुझको पास !

पहला दिन इंग्लिश है
दूजा गणित और एलजेबरा,
तीजा इतिहास फिर भूगोल
पंचम संस्कृत फिर हिंदी,
जेल से छुट्टी मिलेगी हो जाएगा कल्यान,
और अंतिम दिन रहेगा सामान्य ज्ञान !

लेकिन हाल हुआ क्या मेरा
किस किस को बतलाऊं,
शहर के किस कोने में जाकर
अपना मुह छिपाऊं !

पी गयी इंग्लिश हमारे
खोपड़ी के खून को,
मैं समझ पाया नहीं
इस बेतुके मजमून को,
सी.यू.टी कट है तो पी.यु.टी पुट कैसे हो गया,
एस.ओ. सो है तो डी.ओ डू क्यों कर हो गया !
कौन सी स्पेल्लिंग सही है कौन सी गलत
इसकी क्या पहचान है,
नाइफ में न जाने ‘के’ कहाँ से आ गया
बस यही बात भेजा मेरा खा गया !

गणित के अतिरिक्त मुझे
और कुछ भाता नहीं,
पर क्या करूँ
गुणा करना मुझे आता नहीं,
हासिल लेलो हासिल देदो
भाग में यह क्या होता है,
सच पूछो तो आखिर कार
हासिल कुछ नहीं होता है !

अक्ल मेरी एलजेबरा जड़ से जाएगा पचा
तीन में से छह गए तो और क्या बाकी बचा,
क ख ग की ताल पर रचता सारा खेल
बाकी वर्ण माला क्या लेने गयी है तेल,
क का मान बताओ अगर
क ख ग का योग है पंद्रह,
सरल था उत्तर लिख दिया
क से कबूतर ख से खरगोश और ग से गधा !

नाश हो इतिहास का
सन के समुन्दर बह गए,
मर गए वो लोग और
रोने के लिए हम रह गए,
शाहजहाँ, अकबर, हुमायूं और बाबर आप थे
कौन थे बेटे न जाने कौन किसके बाप थे !

भूगोल में था प्रश्न आया
गोल है कैसे धरा,
एक पल में लिख दिया
मैंने तभी उत्तर खरा,
गोल है लड्डू,जलेबी और पापड़ गोल है
इसलिए मास्टर साहब ये धरा भी गोल है,
झूम उठे मास्टर साहब इस अनोखे ज्ञान से
और लिख दिया हमारी कॉपी पर ये शान से
ठीक है बेटा हमारी लेखनी भी गोल है,
गोल है दावात, नुम्बर भी तुम्हारा गोल है !

राम रामौ राम रामौ हाय प्यारी संस्कृतम
तू न आती मर गया मैं रच कच कचूमरम,
चंड खंडम चंड खंडम चट पट चपाचटम
चट रोटी पट दालम चट पट सफाचटम !

राष्ट्र भाषा हिंदी का हमको सम्मान है
इसने भी पर हमारा लिया इम्तेहान है,
पर्यायवाची शब्द जाने कहाँ से आ गए
एक शब्द के इतने रूप मेरा दिमाग खा गए !

सामान्य ज्ञान के प्रश्न तो होते हैं आसान
लेकिन उनके उत्तर ही ले लेते हैं जान,
सबसे छोटा सबसे बड़ा, सबसे लंबे का पंगा
सबसे ऊंची कंचन जंघा, सबसे लम्बी गंगा,
जब जनरल नोलिज की जगह
बस लिखा जर्नल नोलिज,
टीचर कर्नल ने बुलाकर पूछ लिया सवाल
पानीपत में कितनी बार हुआ था बबाल,
पानीपत का बहुत सुन रखा था नाम
रामायण और महाभारत का वहीँ हुआ था काम !

फिर पूछा अंग्रजी में स्पेल्लिंग बताओ
नोलिज और साइकोलोजी की वाट लगाओ,
हिंदी में फिर रटी रटाई स्पेल्लिंग बताई
नोलिज, कानउ लद गए
साईंकोलोजी, पिसाई का लोगी,
ये सुनते ही टीचर के होश हो गए गुम,
बेटा इस साल भी फेल हो जाओगे तुम !

आ गया तेरी शरण
अब ज़िन्दगी से हार कर,
मार थप्पड़, लात घुसे, पर मुझे तू पास कर !!

हे प्रभु,
इस दास की
इतनी विनय सुन लिगिये,
मार ठोकर नाव मेरी
पार ही कर दीजिये !!!

मिलन “मोनी” ११/३/२०१७

यह कविता लगभग १९६७-६८ में मेरे हाथ लगी थी, इसके मूल रचनाकार अज्ञात हैं, लेकिन इसकी रोचकता और हास्य दिल को छू लेने वाला है
इसके मूल रूप को यथावत रखते हुए कुछ आंशिक मनोरंजक बदलाव भी किये गए हैं,उम्मीद है पाठकों को यह मेरा संस्करण पसन्द आयेगा !!

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Dulare

12 Mar

तुम हमारे थे और हमारे ही न रहे
जिंदगी में वे सांझ सकारे ही न रहे

आया है जबसे आफताब फलक पर
चमकते हुए चाँद सितारे ही न रहे

खिले कहीं बेला कहींपे खिले गुलाब
बहारों के मगर वो इशारे ही न रहे

बारिषे आयीं कभी फुहारें भी आयीं
सावन के मगर वो नज़ारे ही न रहे

है ज़िन्दगी मझधार होकर रह गयी
धारा तो थीं मगर किनारे ही न रहे

बीच कमरे के कही चुनीं गयीं दीवारें
हाथ मिले मगर वो सहारे ही न रहे

रिश्तों की नज़र में ‘मिलन’तुम भी
अपने आपके भी वो दुलारे ही न रहे !!

मिलन “मोनी”

Bhoole Bisre

10 Mar

भूले बिसरे गीत ज़रा तुम गुनगुना कर देखना
खिडकियों से याद के तुम पर्दे हटा कर देखना

चार दिन की ज़िन्दगी में दो दिन अपने रहेंगे
खुदमें हमें ही पाओगे तुम मुस्कुरा कर देखना

हाथ में तस्वीर लेकर बात जब करोगे मुझसे
धडकनों को उस वक़्त सजा बुझा कर देखना

दिन ख्यालों में और रात ख़्वाबों में गुज़ारेंगे
प्यार के आँखों में तुम दीप जला कर देखना

पाँव नंगे भी दौड के आ जाउंगा पास तुम्हारे
तुम किसी भी दौर में हमको बुला कर देखना

टूटता नहीं है रिश्ता बंधा’मिलन’जो प्यार से
हाथों से कभी भी मेरा हाथ मिला कर देखना !!

मिलन “मोनी” ९/३/२०१७