Jaa Raha Hai

12 May

क्यों ग़मों मे बशर डूबता जा रहा है
फासला इंसानों में बढ़ता जा रहा है

मुल्क का जाने क्या अन्जाम होगा
नेतागिरी का पारा चढ़ता जा रहा है

कोई इसकी मुराद न हो पाएगी पूरी
जो पाँव चादर से निकला जा रहा है

तहजीब नाकाबिले-तारीफ़ हो रही है
पानी सरों से ऊपर उठता जा रहा है

संभल संभल कर रखना हर कदम
ये कही का कहीं फिसला जा रहा है

आसमां छूने की तमन्ना में हरेक
नीव का पत्थर उखड़ता जा रहा है

कश्तियाँ किनारे पहुचाने ‘मिलन’
तूफानों में सफीना घिरा जा रहा है !!

मिलन “मोनी” १३/4/२०१७

Kuchh Ka Kuchh

11 May

मदहोशी में नज़रे कुछ का कुछ समझती हैं
सारी दुनिया जाने कुछ का कुछ समझती है !

जुल्फें तेरी कुछ कहतीं हैं,
आँचल तेरा कुछ कहता है,
पर मोहब्ब्त जाने कुछ का कुछ समझती हैं !

समंदर हमसे कुछ कहता है,
किनारा हमसे कुछ कहता हैं,
पर लहर यह जाने कुछ का कुछ समझती हैं !

चाँद हमारा कुछ कहता है,
दिन सुनहरा कुछ कहता है,
पर रात अँधेरी जाने कुछ का कुछ समझती है !

तेरी पायल कुछ कहती है,
तेरा झुमका कुछ कहता है,
पर हाथों की मेहँदी कुछ का कुछ समझती हैं !

दिल की धड़कन कुछ कहती है,
रात मिलन की कुछ कहती है,
बागों की कलियाँ जाने कुछ का कुछ समझती हैं !

तू मुझसे कुछ कहती है,
मैं तुझसे कुछ कहता हूँ,
पर शंकित आँख जाने कुछ का कुछ समझती है !

रात बिरहा की कुछ कहती है,
सांस मिलन की कुछ कहती है,
पर बिस्तर की सिलवट कुछ का कुछ समझती है !

मदहोशी में नज़रे कुछ का कुछ समझती हैं
सारी दुनिया जाने कुछ का कुछ समझती है !!

मिलन “मोनी”

Bahaar Hi Bahaar

9 May

खिल रहे हैं फूल यहाँ डाल डाल पर,
आज है बहार ही बहार ज़िन्दगी !
मधुप चूसते भँवर
फूल फूल पर,
आज है खुमार ही खुमार ज़िन्दगी !!

आओ प्रिय आज वहीँ,
झील के किनारे
साथ चलें दूर कहीं,
बाह थामे थामे,

प्यार की महक उठे
सांस सांस पर,
आज है श्रृंगार ही श्रृंगार ज़िन्दगी !! खिल रहे …..(१

उठ रही लहर लहर
करके ये इशारे,
हम हुए तुम्हारे प्रिय
तुम हुए हमारे,

होंठ मुस्कुरा उठे
बात बात पर,
आज है इकरार ही इकरार ज़िन्दगी !! खिल रहे ….. (२

आज प्रिय तुम हुए
तुम हुए प्यारे,
मधुर मिलन के पल सभी
अब हुए हमारे

हुस्न की मशाल जले
रात रात भर,
आज है करार ही करार ज़िन्दगी !! खिल रहे …..(३

मधुर मिलन के राज़ सारे
अब हुए हमारे ,
सुन सकें न दिल की बात
चाँद और तारे

इश्क की बयार बहे
उम्र उम्र भर
आज है त्योहार ही त्योहार ज़िन्दगी !! खिल रहे …(४

खिल रहे हैं फूल यहाँ डाल डाल पर,
आज है बहार ही बहार ज़िन्दगी !!

मिलन “मोनी” ८/५/२०१७

Asteeno me

7 May

सांप आस्तीनों में पल न पायेंगे
हमारे दुश्मन हमें छल न पायेंगे

मंजिल तक पहुंचना आसाँ नहीं
ये रस्ते सफर पे चल न पायेंगे

जितने घने हो चले हैं ये अँधेरे
चराग भी उतना जल न पायेंगे

ग़मों में आज इतना मुस्कुरा के
मुसीबतों का कोई हल न पायेंगे

रात और दिन इस तरह रोज़ ही
‘मिलन’सूरज सा ढल न पायेंगे !!

मिलन “मोनी”

Tum Deep Si

30 Apr

तुम दीप सी दिल में मेरे जलती रहीं,
सपनों को मेरे तो रौशनी मिलती रही.

चाँद तारों की चुनरिया ओढ़ कर यह,
रात भी दुल्हन की तरह सजती रही.

चराग यादों के जितने यहाँ जल गए,
तेज़ उतनी ज़ालिम हवायें चलती रही.

इस मोहब्बत की सुलगती आग में,
शीश ए दिल को सजा मिलती रही.

सुबह का नामोनिशा ना मिल सका,
ये रात थी के उम्र भर ढलती रही.

आसमां बन के’मिलन’तुम छा गए
बात चाँद तारों की महज़ उठती रही !!

मिलन ‘मोनी’

Dharti Umber

26 Apr

यादों में वो लम्हे बसे हों पहली पहली बार
राहों में हम तुम मिलें हों पहली पहली बार

पिघल के मेरी बाहों में समाये तुम ऐसे कि
धरती अम्बर मिल रहें हो पहली पहली बार

पतझर का मौसम भी देखो लग रहा है जैसे
मुस्कानों के फूल खिले हों पहली पहली बार

दिल के बागीचे में तेरे पाँव पड़े तो यह लगा
कलियों से ही बात हुई हो पहली पहली बार

तेरी मस्त निगाहों के जो चढ़ाये हमने जाम
मयखानों में धूम मची हो पहली पहली बार

इश्क के अँधेरे उजाले से गुज़रे तो यह लगा
बरसातों में धूप खिली हो पहली पहली बार

तुमने अपने हाथों में जो लिया था मेरा हाथ
हर सपना साकार हुआ हो पहली पहली बार

करके वादा मिलन का जब न पहुंचे ‘मिलन’
लगा के रब ही रूठ गया हो पहली पहली बार !!

मिलन “मोनी”

Vehem

21 Apr

बदन फूलों सा तेरा, कुछ महका महका है
यह शाम का मौसम, कुछ बहका बहका है

इस शाख पर जब से सुर्ख गुलब खिला है
परिंदों का मिजाज़, कुछ चहका चहका है

उठने लगा है धुँआ सा मेरे होशो-हवास में
शोला-ए-हुस्न आज, कुछ दहका दहका है

कीमत इंसानियत की नहीं रही अब मगर
बाज़ार में सामान ही,कुछ महगा महगा है

नज़र मिलते ही कहीं नज़र न उनको लगे
बेक़रार यह दिल ही, कुछ सहमा सहमा है

वो बन कर खुशबू लिपट न जाये ‘मिलन’
बेवजह आज मन ये, कुछ वहमा वहमा है !!

मिलन “मोनी”