Darde-Dil

31 Oct

आपको क्या मिला रुलाने में
मुझे हाले-दर्दे-दिल सुनाने में !

छलके आँख से तब वो मोती
छुपे हुए थे जो इस खजाने में !

किस कद्र गुजरा सफर तनहा
निकली हर रात ये भुलाने में !

उनकी कमी ने सोने ना दिया
जागते रहे सितारे मिलाने में !

बात बड़ी ही छोटी थी फिर भी
लग गयी उमर एक बताने में !

परेशान बहुत हो गए ‘मिलन’
ज़ख्म अपने खुदसे छुपाने में !!

मिलन “मोनी”

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Koshis

28 Oct

कोशिस भुलाने की भूलने नहीं देती
याद जब करो याद करने नहीं देती !

ये धुंधली सी तस्वीर रहती है कहीं
जो आयने को साफ़ रहने नहीं देती !

फ़िक्र उनके जज़्बात की मुझको तो
अश्क आँख से अब बहने नहीं देती !

चाहता हूँ बहुत कुछ फरमाना उनसे
पर मन की हिचक कहने नहीं देती !

हकीक़त न सही तो ख़्वाबों में मिलो
तेरी कसक सुकून से मरने नहीं देती !

परवाना हूँ मैं ऐ शमा तेरी चाहत का
क्यों आग में मुझको जलने नहीं देती !

ख्वाइशें है आसमां तक ऊंची ‘मिलन’
तेरी आशिकी मुझे दूर उड़ने नहीं देती !!

मिलन “मोनी”

Nidhaal

24 Oct

तेज़ हवा ही यह मजाल करती है
कश्ती का चलना मुहाल करती है !!

मौत का सामांन जुटाने के वास्ते
ये ज़िन्दगी सारा बबाल करती है !!

काश वक़्त हांथ से न निकलता
हर घडी इसका मलाल करती है !!

अपने रकीब से भी इश्क कराये
आशिकी ये भी कमाल करती है !!

प्यार की दुकान कहाँ चलती है
हर नज़र यही सवाल करती है !!

पेट, इज्ज़त या दौलत की हमें
भूख हमेशा हाल बेहाल करती है !!

पी के भी होश में रहता’मिलन’
तेरी ऑंखें मुझे निढाल करती हैं !!

मिलन “मोनी”

Aadmi

12 Oct

खुद को धोखा रोज़ देता आ रहा है आदमी
अपने मुक़ददर से लड़ता आ रहा है आदमी !

ओर का कुछ पता है न छोर का ही पता
अन्धेरी राहों पर चलता जा रहा है आदमी !

ये खून के रिश्ते भी जैसे हो गए हैं पानी
भाई से भी आज धोखा खा रहा है आदमी !

भगवान के उसूलों को तो ताक पे रख के
राग अपनी अलग अलग गा रहा है आदमी !

इन अंधेरों से निबटने के लिए कई बार तो
रौशनी की किरण बन के छा रहा है आदमी !

पहन कर के राम रहीम का चोला ‘मिलन’
पूरी कायनात में ही कहर ढा रहा है आदमी !!

मिलन”मोनी”

Deewana Ho Gaya

7 Oct

देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !
हुस्न की शम्मा का यह परवाना हो गया !!

ऐसे मिल रही हो मुझसे
जैसे पहली बार मिली हो
हुस्न और इश्क की जैसे
नयी नयी कली खिली हो
आयने में देखके बहुत शरमाना हो गया
देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !!

झोंका एक हवा का आके
महक जो तेरी फैला गया
घर का कोना कोना मेरा
खुशबू से तेरी नहा गया
उस शब् से मन मेरा आशिकाना हो गया
देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !!

तेरा हर ग़म मेरा अब
मेरा हर पल तेरा अब
जीवन में भी तेरे मेरे
नहीं रहा अन्धेरा अब
कुछ पलों में जैसे सब उजियारा हो गया
देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !!

मिलन “मोनी”

Mahtabi

6 Oct

नाशाद दिलों पे जैसे जादूगरी हो गयी
वो जो मुस्कुराए तबीयत हरी हो गयी !

अब ज़िन्दगी से मुझे खौफ होता नहीं
मेरी मौत से जो गहरी दोस्ती हो गयी !

चन्द लम्हे क्या गुजारे हैं बिन आपके
ऐसा लगता है जैसे एक सदी हो गयी !

चाँद घटाओं से बाहर निकला भी नहीं
माहताबी खुद ब खुद शायरी हो गयी !

जो देता रहा है वक़्त हरवक़्त मुझको
शायद उसे भी वक़्त की कमी हो गयी !

बांटे हैं ‘मिलन’ ग़म ज़मानों के हमनें
क्योकि महंगी बड़ी अब ख़ुशी हो गयी !!

मिलन “मोनी”

Humdam

29 Sep

अपने दिल का मुझे भी पता दीजिये
कुछ इशारों इशारों में ही बता दीजिये !

प्यार की इस अदालत में जो चाहिए
दफा मुनासिब सी कोई लगा दीजिये !

मेरी रग रग में जो रची बसी रागिनी
अधरों पे रख बाँसुरी सी बजा दीजिये !

वसले-शब् के दिखाए थे आँखों ने जों
ख्वाब पलकों पर वो ही सजा दीजिये !

इश्क के खेल में जो आशिक नाकाम
चार आंसू कभी उन पर बहा दीजिये !

रोग जाने ‘मिलन’ये क्या लग गया
कोई हम-दर्द की हमदम दवा दीजिये !!

मिलन “मोनी”

२८/९/२०१७