Sauda Nahi Karte

13 Sep

एक उम्मीद से ज़्यादा कुछ चाहा नहीं करते
अपनी हदों से ज़्यादा कभी माँगा नहीं करते !

जिस्मजाँ और खून से जिन्हें सींचा है हमने
उन पर भी किसी हकूक का दावा नहीं करते !

दोस्ती तो कांच जैसी नाज़ुक होती है दोस्तों
भूलसे भी कोई चोट इसपर मारा नहीं करते !

दिल जला जलाकर लिखी हो जो शायर ने
महफ़िलों में वही गज़ल सुनाया नहीं करते !

मिली हो रुसवाई जहां एक बार भी तुमको
उस तरफ तो भूलकर भी जाया नहीं करते !

जिम्मेदारियों का बोझ तो उठाना है’मिलन’
जिम्मेदारियों से कभी कोई सौदा नहीं करते !!

मिलन “मोनी”

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Chalte hain

12 Sep

मुश्किलों का अंदाज़ लगा के चलते हैं
अपना साजो सामान उठा के चलते हैं!

ये वक़्त किसी का मोहताज नहीं रहता
हम वक़्त का हिसाब लगा के चलते हैं!

नफरतों के बावजूद दिल साफ़ रखते हैं
दुश्मन से हम आँख मिला के चलते हैं!

ज़िन्दगी के ये रास्ते दुश्वार नहीं लगते
पतझड़ों में भी पुष्प खिला के चलते हैं!

सहर हो शाम हो या रात फर्क नहीं हमें
सपना आँखों में नया सजा के चलते हैं!

महसूस नहीं होता है अकेलापन ‘मिलन’
हर अजनबी को अपना बना के चलते हैं!!

मिलन “मोनी”

Dil Pe Leta Hai

18 Aug

वो मेरी हर इम्दाद दिल पे लेता है
वो बेबफा हर बफा दिल पे लेता है

पानी में बह जाये सारी फसल तब
किसान वो बरसात दिल पे लेता है

बाल सफ़ेद एक ही दिखे जवानी में
हर शख्स वो अपने दिल पे लेता है

दिल की बात मैं दिल से कहता हूँ
बस वही बात मेरी दिल पे लेता है

लहूँ एक है मगर दुश्मनी मोल ली
बात ये हिन्दुस्तान दिल पे लेता है

आयने से निकल कर वो ‘मिलन’
तारीफे-हुस्न अपने दिल पे लेता है !!

मिलन “मोनी”

Phle

24 Jul

आँगन में पहले एक पेड़ लगा लिया जाए
पंछियों को पिंजरों से फिर उड़ा दिया जाए !

फूलों के बारे में कभी सोचेंगे इत्मीनान से
दामन ज़रा काँटों से पहले बचा दिया जाए !

मिट्टी की काया को, मिट्टी में मिल जाना है
पहले इसको प्यार का बुत बना दिया जाए !

वो मनचला पत्थर ज़रूर फेंकेगा कीचड़ में
बारिष से पहले यह पत्थर हटा दिया जाए !

इनकी जड़ों को उखड़ने से पहले जहान में
शाखाओं को दूरदूर तलक फैला दिया जाए !

पहले के गानों में कितनी गहराई होती थी
अब भूले बिसरे गीतों को सुना दिया जाए !

राम रहीम मिलके दोनों सोच रहे ‘मिलन’
पहले आदमी को आदमी बना दिया जाए !!

मिलन “मोनी”

Baat Hogi

24 Jul

उसने कहा, दो गज की दूरी होगी बस तब ही बात होगी
मैंने कहा, ऐसी नजदीकियों में भला क्या ही बात होगी !

उसने पूछा, क्या एक कदम की दूरी तो मुनासिब रहेगी
मैंने कहा, दूरियाँ जब तलक दरम्यान हैं नहीं बात होगी !

उसने पूछा, फिर कितना नज़दीक हमें तो आना चाहिए
मैंने कहा, कम से कम दिलों तक आयेगे तो बात होगी !

उसने कहा, दिल में रहकर भी कभी दूरियाँ बढ़ जाएँ तो
मैंने कहा, अपनी हर मजबूरी मिट जाए तभी बात होगी !

वो दिल में आए बैठे और अभी आते हैं कहकर चले गए
तब से हम इंतज़ार में बैठे हैं कब आयेगे कब बात होगी !

दिलों के दरम्यान रिश्तों का भी अपना दर्द होगा ‘मिलन’
कभी टूटने की बात होगी तो, कभी जोड़ने की बात होगी !!

मिलन “मोनी”

७/५/2002

Magroor

23 Jul

आज आया, तो कल जाना ज़रूर है
वक़्त के हाथों वक़्त तक मजबूर है !

जितना मिला, हम उसी में खुश हैं
फैसले नसीबों के सब हमें मंज़ूर हैं !

मोहब्ब्त तो हम सबसे ही करते हैं
फिर जाने क्यों बेवफा में मशहूर हैं !

ये उनकी कातिल अदा का असर है
के मुझ पर उनके हुस्न का सुरूर है !

तुम साथ हो मेरे इतना क्या कम है
इसलिए अपने मुकददर पर गुरूर है !

जो हासिल किया छोड़ना है ‘मिलन’
इंसान किस बात के लिए मगरूर है !!

मिलन “मोनी”

Sitare Ke Jaise

19 Jul

गमें ज़िन्दगी का हिसाब चुका लिया हमने
तुझे देखकर थोड़ा जो मुस्कुरा लिया हमने !

अन्धेरा कहीं न हो जाए अपने घर में कभी
बनके शमाँ रात भर जगमगा लिया हमने !

चेहरा महताबी और आँखें उनकी झील सी
किस आग में दिल जला बुझा लिया हमने !

तनहा रातों की खामोशी में याद करके तुझे
एक गज़ल की मानिंद गुनगुना लिया हमने !

हुआ तारी मुझ पे नशा तेरे हुस्न का सनम
बिना पिये ही कितना डगमगा लिया हमने !

टूटने से पहले तो इस आसमां पर ‘मिलन’
एक सितारे के जैसे टिमटिमा लिया हमने !!

मिलन “मोनी”