Archive | September, 2015

Maharbani Shukriya

29 Sep

इस महरबानी शुक्रिया की अब क्या ज़रुरत है,
यहाँ दिल के बदले दिल ही देने की रवायत है,

मेरे दिल का हाल सारी दुनिया को मालुम है,
पर आपकी आँखों में कुछ आखिर शरारत है,

मेरी ज़िन्दगी को यूँ कज़ा की क्या ज़रुरत है,
जब मुस्कराहट आपकी खुद एक क़यामत है.

सच कहूँ तो हुस्न तेरा बला का खूबसूरत है,
नज़रों को मेरी तो आपसे इसकी शिकायत है

जी रहा है आपके रहम-ओ-करम पे ‘मिलन’
मेरी ज़िन्दगी तो आपकी नज़र-ऐ-इनायत है.

इस महरबानी शुक्रिया की अब क्या ज़रुरत है,
यहाँ दिल के बदले दिल ही देने की रवायत है!

मिलन ‘मोनी’

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Chup Raha Gaya Naih Mujhse

27 Sep

उनसे रूबरू कुछ भी कहा गया नहीं मुझसे
अपनी तन्हाई में चुप रहा गया नहीं मुझसे

उनके ग़म को बना लिया अपना हमसफ़र
तन्हा रातों में जब जिया गया नहीं मुझसे

अश्क पीने से शायद मेरी प्यास बुझ जाती
इतना ज्यादा तो रोया भी गया नहीं मुझसे

आग लगी थी जिन चरागों से मेरे घर को
चाह में रोशनी के बुझाया गया नहीं मुझसे

माँगा जो भी उसने वही सब दिया “मिलन”
उनको रूठते हुए तो देखा गया नहीं मुझसे

उनसे रूबरू कुछ भी कहा गया नहीं मुझसे
अपनी तन्हाई में चुप रहा गया नहीं मुझसे

“मिलन” २७/९/२०१५

Hai Ke Nahi ?

17 Sep

चाँद तो है,
आसमान कहीं है के नही ?
लहर तो है,
समुंदर कहीं है के नहीं ?

वो दिल से हमारे
कभी निकल नहीं पाए
दिल हमारे फिरभी
कभी मिल नहीं पाए
मंजिल तो है,
मुसाफिर कहीं है के नहीं?
चाँद तो है, आसमान कहीं है के नही ?

अधर कभी कुछ
कह नहीं पाए
नयन कभी कुछ
सह नहीं पाए
बारिष तो है,
बादल कहीं है के नहीं?
चाँद तो है,आसमान कहीं है के नहीं ?

प्यार में फिसले पाँव
कभी संभल नहीं पाए
टूटने से दिल को भी
हम बचा नहीं पाए
दर्द तो है,
उपचार कहीं है के नहीं?
चाँद तो है, आसमान कहीं है के नही ?

थक गए नयन
कभी सो नहीं पाए
रात के ये साए
कभी ढल नहीं पाए,
सुबह तो है
उजाला कहीं है के नहीं ?
चाँद तो है, आसमान कहीं है के नही ?

रात मिलन की कहीं
आस पास है शायद
सब गीत बस तुमसे
कुछ कह रहे हैं शायद
सागर भरे भरे तो हैं
प्यास कहीं है के नहीं?
चाँद तो है, आसमान कहीं है के नही ?

किनारे तक पहुँचने का
पता नहीं मिलता
गंतव्य तो है पर
रास्ता नहीं मिलता
मृत्यु तो है,
जीवन कहीं है के नहीं?
चाँद तो है, आसमान कहीं है के नही ?

चाँद तो है,
आसमान कहीं है के नही ?
लहर तो है,
समुंदर कहीं है के नहीं ?

Dohari naqaab

14 Sep

इस जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है
पास इसका मेरे, तो पूरा हिसाब किताब है
………………..जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है

यकीन नहीं करते हम, मीठी जुबां का अब
खूबसूरत चेहरा है तो उनका दिल खराब है
………………..जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है

उड़ा कर रख दिए हों इश्क जादों के होश ही
उन हुस्न वालों की हर अदा में ही शराब है
………………..जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है

कोयले की खदान का जिस्म काला है मगर
उसके भीतर जाने पर मिलता हीरा नायाब है
………………..जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है

कभी काँटों से भी जिसे मोहब्ब्त हो जाती है,
उसकी फुलवारी में ही खिलता एक गुलाब है
………………..जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है

खामोश से लगते हैं जो दो नयन अक्सर
उन्ही के आसुओं सेही तो उठता सैलाब है
………………..जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है

कैद हो कर रह गयी जिस परिंदे की आस
उसकी निंदिया में बस उड़ने का ही ख्वाब हैं,
………………..जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है

यह दिन रात,ये पर्वत ये वादियाँ ये नज़ारे
सबतो कुदरत का बेहद दिलकश शवाब है
………………..जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है

बिन कहे हर दिल की जो सब जान लेता है
उस रब के पास तो हर सवाल का जवाब है
………………..जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है

इस जीवन के चेहरे पर तो दोहरी नकाब है
पास इसका मेरे, तो पूरा हिसाब किताब है

“मिलन” १४/९/२०१५

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