Archive | August, 2013

Mere Hriday Ke Swar

25 Aug

मेरे ह्रदय के स्वर तुम तक, पहुँच सके, या अभी नहीं,

तेरे मन के उलझे डोर, कुछ सुलझ सके, या अभी नहीं,

मै तो हूँ जीवन का पथिक,

कुछ देर ठहर कर चल दूंगा,

राह है लम्बी, समय है कम,

विश्राम तनिक सा कर लूँगा,

राहें कितनी भी लंबी हों चाहें,

साथ, उन्हें तय कर देता है,

एक मिलन से जीवन बेहद,

सुखमय और सुखद होता है,

मेरे अंतर्मन की व्यथा तुम, समझ सके या अभी नहीं,

तेरे मन के उलझे डोर, कुछ सुलझ सके, या अभी नहीं,

मै शब्दों से रच रच गीत,

तुम तक पहुंचा तो देता हूँ,

तुम राग नयी नयी बुनके,

मधुर मधुर स्वर देती हो,

तेरे प्रणय सागर में बह बह,

दूर शितिज तक हो आता हूँ,

तब कहीं तेरे मन तक,

एक लहर पहुंचा पाता हूँ,

जीवन के इस भवसागर को, समझ सके या अभी नहीं,

तेरे मन के उलझे डोर, कुछ सुलझ सके, या अभी नहीं,

मेघों से गिरने वाली हर,

बूँद नहीं मोती बनती है,

उपवन में खिलने वाली हर,

कलिका नहीं मन भाती है,

सपनो की डोली सजाकर,

रात दुल्हन बन आती है,

मेरे कुछ कहने से पहले,

मन व्यथा कह जाती है,

वर्षा की बौछार का मतलब, समझ सके या अभी नहीं,

तेरे मन के उलझे डोर, कुछ सुलझ सके, या अभी नहीं,

अब कह दो रात, ठहर जाए,

चाँद और कुछ, निखर जाए,

आधे अधूरे, ख्वाब आँखों के,

यथार्थ में सब बदल जाएँ,

कुछ कदम तुम आओ आगे,

कुछ कदम मै आऊं आगे,

इसही मोड़ पे बढ़ते बढ़ते,

मिलते मिलते मिल जाएँ,

कलियों का खिलना मुरझाना, समझ सके या अभी नहीं,

तेरे मन के उलझे डोर, कुछ सुलझ सके, या अभी नहीं,

मेरे ह्रदय के स्वर तुम तक, पहुँच सके, या अभी नहीं,

तेरे मन के उलझे डोर, कुछ सुलझ सके, या अभी नहीं |

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