Archive | November, 2016

Bhula Dun Main

30 Nov

जला कर प्यार के दीपक भला कैसे बुझा दूँ मैं
कह के शुक्रिया उनका यह क़र्ज़ कैसे चुका दूँ मैं

दिलेनादाँ को किस बात की सज़ा मिले आखिर
उन्ही की आँख से काजल भला कैसे चुरा लूँ मैं

मिले कुछ दिन सुनहरे और थोड़ी मखमली रातें
इन्ही उम्मीद के लम्हों को भला कैसे सुला दूँ मैं

कई दिन बाद सूखे हैं कहीं जाकर मेरे सब आँसू
दिखाके जख्म फिर उनको भला कैसे रुला दूँ मैं

मेरे इस सफर में साथ वो ग़म आयें या न आयें
जब ज़ाहिर हो गए उन पर उन्हें कैसे छुपा दूँ मैं

किस्मत से मिले होते भुला देता ‘मिलन’ शायद
मगर जो ग़म मिले उनसे उन्हें कैसे भुला दूँ मैं !!

मिलन “मोनी”

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Ghri Neend

29 Nov

गहरी नींद से कोई, यूँ ही तो नहीं जागा होगा !
उसका कोई सपना, टूट कर कहीं बिखरा होगा !!

छू छू कर निकल गयीं
साहिलों को कश्तियाँ,
गहरे कोहरे से ढक गईं
दिल अज़ीज़ घाटियाँ,
उम्मीदों से कोई नाउम्मीद
यूँ ही नहीं होता होगा,
उसका कोई अपना ही, उससे रूठ गया होगा !

समय की गर्द से ढका फर्श
परछाइयाँ कहाँ तक छुपा पायगा,
सूखे होंठों के भी गीले निशाँ
रुखसारों से कोई कैसे मिटा पाएगा,
उसके ख़्वाबों को ही कोई
मसल, कुचल गया होगा,
अजनबी भी कोई अपना सा, ऐसे तो नहीं लगता होगा !

पानी में कोई अक्स ढूंढती
लहरें तक चुप नहीं बैठेंगी,
साँसों तक महक ख्वाबों की,
कभी न कभी तो पहुंचेगी,
एक अंधा तूफ़ान भीतर तक,
सब उथल पुथल मचा गया होगा,
गीत पुराना भी कोई, मन न बहला पाया होगा !

बर्फीली हवाओं की तपन
कंपकंपा जायेगी सारा तन,
इन बाहों में अगर इस पल
समा जाएगा तू सजन,
आँसू कोई आँख से बस
यूँ ही नहीं फिसला होगा,
ख़याल उनका भीतर तक दिल दहला गया होगा !

गहरी नींद से कोई, यूँ ही तो नहीं जागा होगा !
उसका कोई सपना टूट कर कहीं बिखरा होगा !!

मिलन “मोनी”

Aahat

28 Nov

दूरसे ही आहट मेरी पहचान लेते हैं
ये रास्ते अब ज़ात मेरी जान लेते हैं

मैं जैसा हूँ मगर एक बात है मुझमें
भूलते नहीं हैं अगर एहसान लेते हैं

शुक्र है किसी से कुछ कहते नहीं पर
ये बच्चे हमारे दिल की जान लेते हैं

थी अलग कुछ बात मेरी गजलों में
शेरों में हम शायरी रस छान लेते हैं

पहले नहीं थी अब ये बात है मुझमें
कर गुज़रते हैं जो कुछ ठान लेते हैं

इतना तो तजुर्बा हो गया है’मिलन’
हर उमर का बाखूबी सज्ञान लेते हैं

मिलन “मोनी”

Phir

28 Nov

आयने में देख देख मुस्कुराने की
आदत हैं आपको दिल जलाने की

चमन को नज़र न लग जाए कहीं
क्या ज़रुरत थी बागबाँ सजाने की

अब आए हो घर में तो ठहरो ज़रा
उतार दो नज़र थोड़ी आशियाने की

उलझ गया काँटों में आँचल आपका
जिद थी गुलाब जुल्फों में लगाने की

कितनी कशिश है तेरे हुस्न में हसीना
पढ़ कर देखले ताज़ा गज़ल दीवाने की

प्यार हर दिल की आवाज़ है’मिलन’
ज़रुरत नहीं उसको फिर आजमाने की !!

मिलन “मोनी”

Dekhiye

25 Nov

राह में हैं चाह कितनी साथ चल कर देखिये
दर्द में है आह कितनी ज़ख्म बन कर देखिये

नींद क्यों आती नहीं अब ये रातरात भर हमें
बेचैन मेरे दिल की कभी याद बन कर देखिये

क्यों तलब होती है मुझको तेरे लब को चूमलूं
कभी मेरे होंठों पर एक प्यास बन कर देखिये

दूर जितना भी लगे पर हैं नज़दीक बहुत हम
दो कदम बस फासला है आप बढ़ कर देखिये

वस्ल की कोई भी शर्त होती नहीं है आज कल
प्यार मोहब्ब्त में ये जंग आप लड़ कर देखिये

रात दिन के ‘मिलन’ की कैफियत क्या बताएं
हो सके तो इश्क की एक शाम बन कर देखिये !!

मिलन “मोनी”

Ajeeb Sham

25 Nov

अजीब शाम है यारों, दिल लगता नहीं है
लुट गया हूँ इतना के, कुछ बचता नहीं है

खराब है हाजमा मेरा, कुछ इलाज करिये
ग़म अब और ज़्यादा, मुझे पचता नहीं है

बस गए हैं आप बस, इस क़दर नज़रों में
आंखों को कोई नजारा,अब जंचता नहीं है

महकी है कली गुलाब, आज भी साँसों में
जिसके बगैर वक्त ये, अब ढलता नहीं है

फिर वही हैं मोंगरे के, फूल तेरी ज़ुल्फ़ में
जिसके बिना हुस्न तो, अब सजता नहीं है

तेरे चले जाने से यार, मन भीगा रहता है
सुकून का दीपक यहाँ, अब जलता नहीं है !!

मिलन “मोनी”

Laga Bahut

18 Nov

आयने में अक्स जो अंजाना लगा बहुत
रास्ते में शख्स वही पहचाना लगा बहुत

मैंने देखा उसने देखा अपनी राह होलिए
ये नुख्सा भी कुछ आजमाया लगा बहुत

दर्दे-दिल से या इस दिल से मुहब्बत का
दोनों से अपना पुराना याराना लगा बहुत

बेवजह नज़रों का कुछ बहकना मचलना
मर्ज़ यह नज़ाक़त का दीवाना लगा बहुत

साथ उनके चलना लडखडाना संभालना
मुश्किल वक़्त को आजमाना लगा बहुत

उठ कर गिरना और गिर कर उठना सही
लहरों का साहिल से टकराना लगा बहुत

हसीन मौसम में आज तेरा गुनगुनाना
चिड़ियों सा बाग़ में चहकना लगा बहुत

अजनबी रिश्तों की यह अजनबी दुनिया
एक ही था चेहरा जो पहचाना लगा बहुत

शोख हवाओं से शर्माके सकुचाके अच्छा
बाहों में आपका सिमट जाना लगा बहुत

जानकर दिल को तसल्ली मिली ‘मिलन’
पसन्द आपको मेरा नजराना लगा बहुत !!

मिलन “मोनी”