Archive | Uncategorized RSS feed for this section

Gaav Sookha

16 Sep

कुछ पानी आँखों का निचोड़ आये हैं
नदी किनारे गाँव सूखा छोड़ आये हैं!

हरेभरे वो खेत और बाग़ बागीचों से
जाने कैसे रिश्ता उनसे तोड़ आये हैं!

मेरे आँगन की तुलसी अभी मुरझाई
उसका बंधन वीराने से जोड़ आये हैं!

कुछ नए रिश्तों का आगाज़ हो गया
चौखट पे नारियल हम फोड़ आये हैं!

गाँव में अपने क्या नहीं था सुखचैन
जो अपने सपनों को झंझोड़ आये हैं!

शान और शहर की चका चौंध देखने
हम जैसे जानें कितने करोड़ आये हैं!

ये कौन से शहर में आ गए’मिलन’
जो खुशहाली का गला मरोड़ आये हैं!!

मिलन ‘मोनी’

Advertisements

Aadat Dal Lo

14 Sep

ग़मों में मुस्कुराने की आदत डाल लो
ज़ख्मों को छुपाने की आदत डाल लो !

मेरे दिल के आयने में ही देख देख के
श्रृंगार कर संवरने की आदत डाल लो !

बेला हरश्रृंगार या इत्र केवड़े की सुगंध
जिस्म में महकने की आदत डाल लो !

मैं इधर तुम उधर क्यों अलग अलग
साथ साथ टहलने की आदत डाल लो !

एक कली की तरह दिल में सजाया है
हदों से गुज़र जाने की आदत डाल लो !

गहरी रात हो या उगते दिन का सवेरा
मुझमें ही सिमटने की आदत डाल लो !

एक उम्मीद की किरण बनकर मुझमें
हर सुबह चमकने की आदत डाल लो !

बदला है ये ज़माना ‘मिलन’ के साथ
तुम खुदको बदलने की आदत डाल लो !!

मिलन “मोनी”

Hawa

12 Apr

सुलगती आग को और भड़का देगी हवा
धुँआ बहुत दूर तक उड़ा ले जायेगी हवा

साया-ऐ-शजर पर भरोसा नहीं कीजिये
जानें कब दरख्तों को गिरा जायेगी हवा

दिलों की रौशनी से ख़्वाबों को सजाओ
चराग आँधियों में तो बुझा जायेगी हवा

जल गया क्या खाक हुआ जान न पाए
हवा से पूछिए हालात बता जायेगी हवा

सौदा करें तो सिर्फ अपने आपसे ‘मिलन’
ऐसे में किसको क्या सज़ा दे जायेगी हवा !!

मिलन “मोनी”

Mhfil

23 Feb

चन्द इशारों से दिल की जताई जाए
ज़रूरी नहीं जुबां से बात बताई जाए

धडकनें तक कह सुन लेती हैं आहटें
बीच की अगर ये दीवार हटाई जाए

अश्को की ज़रिये वो कहतीं हैं आँखें
बात बहुत अर्से तक जो दबाई जाए

अब तो तेरे हुस्नो-शवाब पे जानम
कीमती अपनी ये जान लुटाई जाए

रात भर सोचा तो यही चाहा सनम
तेरे हुस्न पे नई गज़ल बनाई जाए

यह सागर-सुराही देख कर’मिलन’
आज दुबारा महफिल सजाई जाए !!

मिलन “मोनी”

Chingariyan

25 Jan

तन्हाइयां कहीं तो मेरे साथ पल रहीं हैं
खामोश यह हवाएं मेरे साथ चल रही हैं

एक अजीब सा रंग आसमां का हो गया
शायद चांदनी में कोई आग जल रही है

अपना साया परवाज़ में देख नहीं पाते
परछाइयाँ खुदही परिंदों को छल रही हैं

इश्क की गहराइयां बाकमाल हैं जिनमें
अंगडाइयां तेरी अदाओं को खल रही हैं

ये आयना भी अब मुझे पहचानता नहीं
उम्र यहाँ वक़्त के साथ ही ढल रही है

हुस्न की चिंगारियां हैं ‘मिलन’ जिनमें
तपकर आजतक तेरी दाल गल रही है !!

मिलन “मोनी”

Dekhiye Aa Kar

25 Dec

प्यार के मौसम बिछे हैं देखिये आ कर
हर तरफ गुलाब खिले हैं देखिये आ कर

नयी कोपलों पर गिरे जो ओस के मोती
शबनम के गहने सजे हैं देखिये आ कर

जिन सितारों के नगर में रह रहे हैं हम
कुछ कंटीले तार बिछे हैं देखिये आ कर

होंते पुराने या नए कुछ फर्क नहीं पड़ता
ज़ख्म सब के सब हरे हैं देखिये आ कर

जितना ऊंचा आसमां है उतने थे अरमां
उम्मीदों के पंछी जले हैं देखिये आ कर

जो किये हमने तेरी चाहत में ‘मिलन’
कर्म वो कितने फले हैं देखिये आ कर !!

मिलन “मोनी”

Kuch Alag Si

15 Dec

अब ज़िन्दगी लगती है कुछ अलग सी पहले से
हरेक धड़कन लगती है कुछ अलग सी पहले से

इत्र न जाने कौन सा पहन के गुजरी है महजबीं
हवा में महक लगती है कुछ अलग सी पहले से

एक नए ही अंदाज़ में उसने गायी अपनी गज़ल
मेरे दिल पे असर करी कुछ अलग सी पहले से

इशारों ही इशारों में समझा गए दिल के हालात
आँखोंने फिर बात कही कुछ अलग सी पहले से

एक अंजाने रोमांच से थिरक उठा तन मन मेरा
लबों पे जो प्यास जगी कुछ अलग सी पहले से

खिली कली तो भवरों ने बजा दी मधुर शहनाई
बर्ख़ा में भी कसक उठी कुछ अलग सी पहले से

यकीन नही हुआ कानों को मेरे सुनकर ‘मिलन’
प्रेम से कोई बात कही कुछ अलग सी पहले से !!

मिलन “मोनी”