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Hawa

12 Apr

सुलगती आग को और भड़का देगी हवा
धुँआ बहुत दूर तक उड़ा ले जायेगी हवा

साया-ऐ-शजर पर भरोसा नहीं कीजिये
जानें कब दरख्तों को गिरा जायेगी हवा

दिलों की रौशनी से ख़्वाबों को सजाओ
चराग आँधियों में तो बुझा जायेगी हवा

जल गया क्या खाक हुआ जान न पाए
हवा से पूछिए हालात बता जायेगी हवा

सौदा करें तो सिर्फ अपने आपसे ‘मिलन’
ऐसे में किसको क्या सज़ा दे जायेगी हवा !!

मिलन “मोनी”

Mhfil

23 Feb

चन्द इशारों से दिल की जताई जाए
ज़रूरी नहीं जुबां से बात बताई जाए

धडकनें तक कह सुन लेती हैं आहटें
बीच की अगर ये दीवार हटाई जाए

अश्को की ज़रिये वो कहतीं हैं आँखें
बात बहुत अर्से तक जो दबाई जाए

अब तो तेरे हुस्नो-शवाब पे जानम
कीमती अपनी ये जान लुटाई जाए

रात भर सोचा तो यही चाहा सनम
तेरे हुस्न पे नई गज़ल बनाई जाए

यह सागर-सुराही देख कर’मिलन’
आज दुबारा महफिल सजाई जाए !!

मिलन “मोनी”

Chingariyan

25 Jan

तन्हाइयां कहीं तो मेरे साथ पल रहीं हैं
खामोश यह हवाएं मेरे साथ चल रही हैं

एक अजीब सा रंग आसमां का हो गया
शायद चांदनी में कोई आग जल रही है

अपना साया परवाज़ में देख नहीं पाते
परछाइयाँ खुदही परिंदों को छल रही हैं

इश्क की गहराइयां बाकमाल हैं जिनमें
अंगडाइयां तेरी अदाओं को खल रही हैं

ये आयना भी अब मुझे पहचानता नहीं
उम्र यहाँ वक़्त के साथ ही ढल रही है

हुस्न की चिंगारियां हैं ‘मिलन’ जिनमें
तपकर आजतक तेरी दाल गल रही है !!

मिलन “मोनी”

Dekhiye Aa Kar

25 Dec

प्यार के मौसम बिछे हैं देखिये आ कर
हर तरफ गुलाब खिले हैं देखिये आ कर

नयी कोपलों पर गिरे जो ओस के मोती
शबनम के गहने सजे हैं देखिये आ कर

जिन सितारों के नगर में रह रहे हैं हम
कुछ कंटीले तार बिछे हैं देखिये आ कर

होंते पुराने या नए कुछ फर्क नहीं पड़ता
ज़ख्म सब के सब हरे हैं देखिये आ कर

जितना ऊंचा आसमां है उतने थे अरमां
उम्मीदों के पंछी जले हैं देखिये आ कर

जो किये हमने तेरी चाहत में ‘मिलन’
कर्म वो कितने फले हैं देखिये आ कर !!

मिलन “मोनी”

Kuch Alag Si

15 Dec

अब ज़िन्दगी लगती है कुछ अलग सी पहले से
हरेक धड़कन लगती है कुछ अलग सी पहले से

इत्र न जाने कौन सा पहन के गुजरी है महजबीं
हवा में महक लगती है कुछ अलग सी पहले से

एक नए ही अंदाज़ में उसने गायी अपनी गज़ल
मेरे दिल पे असर करी कुछ अलग सी पहले से

इशारों ही इशारों में समझा गए दिल के हालात
आँखोंने फिर बात कही कुछ अलग सी पहले से

एक अंजाने रोमांच से थिरक उठा तन मन मेरा
लबों पे जो प्यास जगी कुछ अलग सी पहले से

खिली कली तो भवरों ने बजा दी मधुर शहनाई
बर्ख़ा में भी कसक उठी कुछ अलग सी पहले से

यकीन नही हुआ कानों को मेरे सुनकर ‘मिलन’
प्रेम से कोई बात कही कुछ अलग सी पहले से !!

मिलन “मोनी”

Zindagi

17 Jun

जाने वाले वापस लौटने का कुछ ग़म न कर
नज़र फेर फिर दुबारा देखने का गम न कर !
राह में आए हुए तमाम काँटों से क्यों डर गए
जब चुभ ही गए हैं तो भटकने का गम न कर !!१!!

वो जी कर क्या करेगा जिसे जीने का अरमां नहीं
वो प्यार क्या करेगा जिसे ज़िन्दगी से प्यार नहीं !
कोई हंसते हुए जीता है तो कोई हँसते हंसते मरता
वो कहाँ जाएगा दुनिया में जिसकी कोई डगर नहीं !!२!!

सपना तो आखिर सपना है हमेशा सच नहीं होता
साया आखिर साया ही है गमख्वार तो नहीं होता !
गुनाहगार तो गुनाहगार होता ही है हमेशा लेकिन
हरेक गुनाहगार का आँचल तो दागदार नहीं होता !!३!!

दुनिया किसी को कभी बहुत ऊंचा उठाती नहीं है
इंसान की इंसानियत ही उसकी मददगार होती है !
ऊंचा उठता है वही इंसान जो ठोकरें तक खाता है
क्योंकि कुछ ठोकरें इंसान को चलना सिखाती हैं !!४!!

इंसान तो वह है जो खुद अपने को पहचान जाए
अपने आसुओं को पीकर दूसरों को ख़ुशी दे जाए !
खुद ब खुद ज़िन्दगी की राहें तो बनती नहीं कभी
इंसान वही है जो मुश्किलों में सरल राह बना जाए !!५!!

शूल तो आखिर शूल है कोई खिला पुष्प तो नहीं है
दीवार आखिर दीवार ही है कोई मंजिल तो नहीं है !
इस ज़िन्दगी की ओर भी ज़रा देख तो लो दोस्तों
यह दो घडी की ज़िन्दगी दोबारा मिलती भी नहीं है!!६!!

बस एक रंग से भी कभी कई कई तस्वीर बनती है
एक लकड़ी भी किसी के लिए एक पतवार बनती है !
पैरो तले कुचले गए इंसान से भी कभी कभी दोस्तों
आज बरसों पुरानी बिगड़ी सही पर वो बात बनती है !!७!!

जब भी रात आती और प्यासी प्यासी गुज़र जाती है
अब सहर भी आती है और तनहा तन्हा गुज़र जाती है !
कोई हंस कर गुज़ार देता है और कोई रोते रोते बिताता
बस इसी तरह हंसते रोते सारी ज़िन्दगी गुज़र जाती है !!८!!

ज़िन्दगी के साज़ पर सुरीली गज़ल तो गा सकते नहीं
ग़मों के सागरों में यूँ डूब डूब कर भी तो जी सकते नहीं !
अधर कपकपाते रहगए गीत गुनगुना तक ना सके हम
ज़िन्दगी जो गयी हाथ से तो वापस उसे ला सकते नहीं !!९!!

दुनिया भर की मुश्किलें इंसान के दिल को आज़माती हैं
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी इंसान की मजबूरियाँ आज़माती हैं !
इस सिसकती ज़िन्दगी को तो डबडबाई नज़रों से ना देखो
यहाँ हर वक़्त नज़र इंसान की इंसानियत ही आजमाती है !!१०!!

Nazare Inaayat

14 Jun

देखने में
आप जो इतनी
खूबसूरत है
ये खुदा की
आप पर
नज़रे इनायत है

मेरे हाले दिल तो
दुनिया को
मालुम है
आपकी आँखों में भी
आखिर
शरारत है

शर्मा के
धीरे से
कहते हो के
इजाज़त है
जान ले लेगी मेरी
दिलकश
नजाकत है

चांदनी
रातों से भी
मुझको
शिकायत है
चाँद से
ज़ाहिर है के
मुझको
अदावत है

प्यार से
दिल जीतना
हमारी
शराफत है
मुस्कराहट
आपकी
बा खुदा
क़यामत है

शुक्रिया के
अबतक
‘मिलन’
सलामत है
इश्क में
कुर्बान हो
जाने की
रवायत है

ये खुदा की मुझ पर करमे इनायत है
मोहब्ब्त में मर जाना भी नियामत है

८/६