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Aate Aate

19 Apr

फिर क्यों?
ठहर गयी ये धूप,
मेरे आँगन
आते आते !

सिमट गयी ज़िन्दगी,
घोर तिमिर में,
कोई बाती तक,
काम न आई,

फिर क्यों ?
ठहर गयी ये बात,
लबों तक
आते आते !

उतर गयी,
मुस्कान,
होंठों की,
कोई ठिठोली,
रास न आई,

फिर क्यों ?
बिखरे हालात,
मेरे बश में,
आते आते !

मन का पंछी,
उड़ा शितिज तक,
दर्द गहरा,
पाताल सतह तक,
कोई विधा,
कोई दवा,
काम न आई,

फिर क्यों ?
उखड गयीं साँसे,
बात लबों तक,
आते आते !

दर्द का उपहार,
लेकर,
नयना रोये,
सांझ,
सवेरे,
बाहें तक तेरी,
काम न आयीं

फिर क्या ?
सपने खोये,
आशाएं खोयीं,
उम्मीदों की
राहें खोयीं,
अपने घर तक,
आते आते !!

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