Archive | February, 2017

Baqlol

24 Feb

“बकलोल”

खून के रिश्ते बहुत अनमोल होते हैं
सियासत में यहाँ पे भी झोल होते हैं

भूख में सत्ता की सबक भूल जाते हैं
पिता और बेटों पर तोल मोल होते हैं

कहते हैं कुछ मगर करते हैं कुछ और
वादे सबही इनके ढोल के पोल होते हैं

करते नहीं कुछ भी बस एश करते है
इसीलिए चुनाव में पत्ते गोल होते हैं

जबभी ज़रुरत पड़ती है इनके क्षेत्र में
नेताजी उस काल आसनसोल होते हैं

एक दूजे से रहती है नफरत इतनी तो
भाषण सिर्फ इनके कडवे बोल होते हैं

कुछ नेताओं को छोड़ कर’मिलन’ ये
सारे के सारे बिलकुल बकलोल होते हैं !!

मिलन “मोनी” २३/०२/२०१७

Ardas

23 Feb

तुम पास नहीं तों चैन की सांस किसे आती है
ये तन्हाई से भरी ज़िन्दगी रास किसे आती है

घर के हर कोने में कहीं तेरी महक रची बसी
प्यार में मुरझाये फूलों की बास किसे आती है

बीत गयी उम्रे-तमाम बस उम्मीद करते करते
सरे बिस्तरे मार्ग पर यहाँ यास किसे आती है

उनसे मिले तो लगा के हम मिलते रहें हमेशा
वस्ल की रात मुबारक वह ख़ास किसे आती है

हर मंदिर और गुरुद्वारों में ढूंढता रहा’मिलन’
तुझे मुझे मिलवा दे वो अरदास किसे आती है !!

मिलन “मोनी”

Mhfil

23 Feb

चन्द इशारों से दिल की जताई जाए
ज़रूरी नहीं जुबां से बात बताई जाए

धडकनें तक कह सुन लेती हैं आहटें
बीच की अगर ये दीवार हटाई जाए

अश्को की ज़रिये वो कहतीं हैं आँखें
बात बहुत अर्से तक जो दबाई जाए

अब तो तेरे हुस्नो-शवाब पे जानम
कीमती अपनी ये जान लुटाई जाए

रात भर सोचा तो यही चाहा सनम
तेरे हुस्न पे नई गज़ल बनाई जाए

यह सागर-सुराही देख कर’मिलन’
आज दुबारा महफिल सजाई जाए !!

मिलन “मोनी”

Qataa

16 Feb

इसमें मंजिलों की कोई खता नहीं है
जो मुसाफिरों को इनका पता नहीं है

चाहा है मैंने कितनी शिद्दतों से उन्हें
दिल को उनके अब तक जता नहीं है

गायकी के शौकीन बहुतेरे फनकार हैं
कोई भी हो जायें लेकिन लता नहीं है

दिल से दिल का जबतक नहीं राबता
मोहब्ब्त तेरा कोई क़र्ज़ अता नहीं है

तेरे इश्क का करदे इज़हार बाकायदा
तुझे पता ‘मिलन’ वही कता नहीं है !!

मिलन “मोनी”

Mai Aur Tu

13 Feb

जीवन अनंत आनंद है
सागर मैं,और किनारा तू,
जीवन मिलन विछोह है
मुसाफिर मैं,सहारा तू !

जीवन चिर गतिमय है
रास्ता मैं, मंजिल तू,
जीवन गुलदस्ता है,
पुष्प मैं, खुशबू तू!

जीवन एक बहाव है
कश्ती मैं, नदिया तू,
जीवन सावन माह है
बादल मैं, बरखा तू!

जीवन एक दीवाली है
दीपक मैं, बाती तू,
जीवन उतार चढ़ाव है
पर्वत मैं, झरना तू!

जीवन स्वप्न सलोना है
नींदें मैं, सपना तू,
जीवन रैन बसेरा है
पंछी मैं, बसेरा तू !

जीवन एक उजाला है
सूरज मैं, लाली तू,
जीवन चाँद सितारा है
सवेरा मैं, सांझ तू !

जीवन महका महका है
माली मैं,बगीचा तू,
जीवन एक ज़ज्बात है
शायर मैं, कविता तू !

जीवन तो उन्माद है
सागर मैं, सुराही तू,
जीवन एक उम्मीद है
प्रयास मैं,आशा तू !

जीवन एक संरचना है
पुरुष मैं, नारी तू,
जीवन आर पार हैं,
बस मैं,और बस तू !!

मिलन “मोनी”

Shayari

10 Feb

हवा भी रात मनचली होने लगी
नींद भी मेरी अजनबी होने लगी

दूरियों ने बीच बढाई चाहतें और
पास आने पर बन्दगी होने लगी

एक छुनन का इतना असर हुआ
के ख़्वाब में आवारगी होने लगी

देख कर हुस्न ये जवाँ होते हुए
मोहब्ब्त उफनती नदी होने लगी

पैमाने हुए लबरेज़ इश्क से और
कहीं नशीली मयकशी होने लगी

यह किसके आज आने से’मिलन’
मेरी रगरग में शायरी होने लगी !!

मिलन “मोनी”

Milan

9 Feb

‘मिलन’ का मिलन
मुबारक हो तुझे
मैं जो मिलूँ तो एक
मिलन मिले तुझे
मिलन ही मिलन
है मुक्कद्दर में तेरे
हर मोड़ पर ‘मिलन’ का
मिलन मिले तुझे !

ज़मीं है और
आसमान है मिलन
प्रेम की चरम
सीमा है मिलन
मिलन ही मिलन
हर दिल में बसा
रब की परम
लीला है मिलन !!

‘मिलन’ की निगाहें
मिलन मांगतीं हैं
‘मिलन’ से मिलन की
दुआ मांगती हैं
मिलन ही मिलन है
जब ‘मिलन’ से मिलन हो,
जुदाई भी ‘मिलन’ से
मिलन मांगती है !!!

मिलन “मोनी” १९६५