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Bhlaana

15 Jul

ज़िन्दगी का नहीं ठिकाना है
आज आना तो कल जाना है !

गया वक़्त न लौतेगा वापस
हर क़दम सोच कर उठाना है !

रस्ता मंजिलों का आसाँ नहीं
हरमोड़ पे नया मोड़ आना है !

मुश्किलें अगर साथ ना चलें
तो यह सफर बहुत सुहाना है !

जो लम्हे सुकून के नहीं होते
उन्हें किसी तरह भूल जाना है !

जो वक़्त तेरे साथ साथ बीते
वही वक़्त असली खज़ाना है !

कुछ मिला कुछ लिया’मिलन’
ग़म से ही तो दिल बहलाना है !!

मिलन “मोनी”

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Unka Naam

13 Jul

किताब मैंने लिखी नाम उनका हो गया
पहली ग़ज़ल में जिक्र उन्हीका हो गया !

हर शेर बड़ी सलीके से सजाया गया था
यह भी बहुत नाकाबिले तारीफ़ हो गया !

हुस्न की तारीफ़ में कुछ ऐसा कह गया
ग़ज़ल मेरी थी पर चर्चा उनका हो गया !

मेरे हुनर की किसी ने सरहाना नहीं की
जिसनें पढ़ा वह उनका दीवाना हो गया !

मेरा नाम किताब के ऊपर ही लिखा था
मशहूर नाम उनका हर दुकां में हो गया !

खरीदने किताब लोग उसके नाम से गए
साथ में मेरा भी कहीं इस्तेमाल हो गया !

ज़िक्रे चांदनी तो महशर में रात भर हुआ
ध्यान मेरे कलाम पे किसी का नहीं गया !

मुस्कुरा कर चांदनी ने जो रूह को छुआ
जो मेरा मुरीद था अब उसी का हो गया !

चाह कर उसे तुझ को ही चाहा ‘मिलन’
जिसजिस ने तुझे चाहा मेरा भी हो गया !!

मिलन “मोनी”

Geet Ya Gazal

15 Jun

गीत लिखूं मैं या ग़ज़ल लिखूं
तेरे हुस्न पे क्या सकल लिखूं !

बाहों में जो आके फिसल गए
उसकी हर अदायें तरल लिखूं !

कैसे वो मुस्कुरा कर चले गए
उन लबों को अब गरल लिखूं !

वह अब साथ मेरे नहीं चलते
फिर भी उन्हें न अलग लिखूं !

जब पत्थर हो गए एहसासात
तब मैं और क्या सजल लिखू !

कोरा कागज़ पडा सामने मेरे
फिर क्यों अगल बगल लिखूं !

सूद पे सूद चढ़ जाए ‘मिलन’
जो उनके इशारे असल लिखूं !!

मिलन “मोनी”

Khanabadosh

4 Jun

रास्तों से रास्ते निकलते चले गए
हम बुरी निगाह से बचते चले गए !

ये शहर आँधियों से बच नहीं पाये
बसे बसाये महल उजड़ते चले गए !

ख्वाइशों के पौधे कुछ समय पनपे
बदला मौसम तो बिखरते चले गए !

मुक़द्दर से कभी जो जीत नहीं पाए
वक़्त के हाथ वो बिगड़ते चले गए !

एक दुसरे के साथ निभा नहीं पाए
तो अपनेआप में सिमटते चले गए !

ज़मीन ना मिली मुनासिब ‘मिलन’
तो खानाबदोश से भटकते चले गए !!

मिलन “मोनी”

Gulaab Nahi Hota

25 May

माना के उसकी महक का कोई जवाब नहीं होता
यह सच है काँटों बिना कोई भी गुलाब नहीं होता !

हुस्न उसका लाजवाब और बेमिसाल है लेकिन
शरारत और नखरे बिना कोई शबाब नहीं होता !

नशीली है नज़र उसकी नशीली है हर एक अदा
बदमस्त न कर दे जब तक वो शराब नहीं होता !

कातिल न बनें जब तक हुस्न के जलवे हज़ारों
ऐसी रौशनी के बिना कभी आफताब नहीं होता !

कुछ घूँट पीकर जामें मोहब्बत के भी ज़िंदा रहें
कोई नाम दो उसे पर सागरे ज़हराब नहीं होता !

क़यामत न कर दे दिल के आसमा पर ‘मिलन’
चेहरा वह दिलरुबा का कोई महताब नहीं होता !!

मिलन “मोनी”

Seekhe To Tumse Seekhe

17 May

बात बात में बात बनाना कोई सीखे तो तुमसे सीखे
हंसी हंसी में बात उड़ाना कोई सीखे तो तुमसे सीखे !

तुमसे बातें करते करते दिल का बोझ उतर जाता है
मुश्किलें आसान बनाना कोई सीखे तो तुमसे सीखे !

इन रास्तों में कितने गालीयारे और बहुत चौबारे है
दिल तक तो राह बनाना कोई सीखे तो तुमसे सीखे !

अपने ग़मों की बात उठे तो मुस्कुरा के टाल देते हो
ज़ख्मों पे मरहम लगाना कोई सीखे तो तुमसे सीखे !

अपनों ने जब कांटे बोये तुमने उन्हें भी फूल बनाया
ज़िन्दगी खुशहाल बनाना कोई सीखे तो तुमसे सीखे !

पीने और पिलाने में ‘मिलन’ अपना ही एक है मज़ा
होश खोकर होश में रहना कोई सीखे तो तुमसे सीखे !!

मिलन “मोनी”

Hud Hai

10 May

न वो कहते, न हम कहते हद है
न वो सहते, न हम सहते हद है !

मुहब्बत न होती तो जानें कैसे
न वो रहते, न हम रहते हद है !

इश्क का इतना, नशा था गहरा
न वो बहके, न हम बहके हद है !

सुलझ गयी हर बात आपस की
न वो बहले, न हम बहले हद है !

चुराते रहे रंगो-गंध फूलों से हम
न वो महके, न हम महके हद है !

दिल में रखते हम दिल की बात
न वो कहते, न हम कहते हद है !

ज़िन्दगी बाज़ी ताश सी चल रही
न वो नहले, न हम दहले हद है !

मिलन हमारा तय था ‘मिलन’
न वो ठहरे, न हम ठहरे हद है !!

मिलन “मोनी”