Archive | June, 2016

Zindagi

17 Jun

जाने वाले वापस लौटने का कुछ ग़म न कर
नज़र फेर फिर दुबारा देखने का गम न कर !
राह में आए हुए तमाम काँटों से क्यों डर गए
जब चुभ ही गए हैं तो भटकने का गम न कर !!१!!

वो जी कर क्या करेगा जिसे जीने का अरमां नहीं
वो प्यार क्या करेगा जिसे ज़िन्दगी से प्यार नहीं !
कोई हंसते हुए जीता है तो कोई हँसते हंसते मरता
वो कहाँ जाएगा दुनिया में जिसकी कोई डगर नहीं !!२!!

सपना तो आखिर सपना है हमेशा सच नहीं होता
साया आखिर साया ही है गमख्वार तो नहीं होता !
गुनाहगार तो गुनाहगार होता ही है हमेशा लेकिन
हरेक गुनाहगार का आँचल तो दागदार नहीं होता !!३!!

दुनिया किसी को कभी बहुत ऊंचा उठाती नहीं है
इंसान की इंसानियत ही उसकी मददगार होती है !
ऊंचा उठता है वही इंसान जो ठोकरें तक खाता है
क्योंकि कुछ ठोकरें इंसान को चलना सिखाती हैं !!४!!

इंसान तो वह है जो खुद अपने को पहचान जाए
अपने आसुओं को पीकर दूसरों को ख़ुशी दे जाए !
खुद ब खुद ज़िन्दगी की राहें तो बनती नहीं कभी
इंसान वही है जो मुश्किलों में सरल राह बना जाए !!५!!

शूल तो आखिर शूल है कोई खिला पुष्प तो नहीं है
दीवार आखिर दीवार ही है कोई मंजिल तो नहीं है !
इस ज़िन्दगी की ओर भी ज़रा देख तो लो दोस्तों
यह दो घडी की ज़िन्दगी दोबारा मिलती भी नहीं है!!६!!

बस एक रंग से भी कभी कई कई तस्वीर बनती है
एक लकड़ी भी किसी के लिए एक पतवार बनती है !
पैरो तले कुचले गए इंसान से भी कभी कभी दोस्तों
आज बरसों पुरानी बिगड़ी सही पर वो बात बनती है !!७!!

जब भी रात आती और प्यासी प्यासी गुज़र जाती है
अब सहर भी आती है और तनहा तन्हा गुज़र जाती है !
कोई हंस कर गुज़ार देता है और कोई रोते रोते बिताता
बस इसी तरह हंसते रोते सारी ज़िन्दगी गुज़र जाती है !!८!!

ज़िन्दगी के साज़ पर सुरीली गज़ल तो गा सकते नहीं
ग़मों के सागरों में यूँ डूब डूब कर भी तो जी सकते नहीं !
अधर कपकपाते रहगए गीत गुनगुना तक ना सके हम
ज़िन्दगी जो गयी हाथ से तो वापस उसे ला सकते नहीं !!९!!

दुनिया भर की मुश्किलें इंसान के दिल को आज़माती हैं
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी इंसान की मजबूरियाँ आज़माती हैं !
इस सिसकती ज़िन्दगी को तो डबडबाई नज़रों से ना देखो
यहाँ हर वक़्त नज़र इंसान की इंसानियत ही आजमाती है !!१०!!

Furqut

16 Jun

जिनकी फुर्क़त में एक उम्र गुजारी है
उनके ख़्वाबों से ही हर रात सवारी है

जिस तरह खीच रही हैं हवाएं मुझको
शायद बड़े किसी तूफ़ान की तैयारी है

बयाँ कैसे करूँ यह खेल नहीं था कोई
दिल में आज तक तस्वीर तुम्हारी है

कुछ नया लगता नहीं नई गजलों में
ज़िक्र जैसे भी करो बात वही पुरानी है

उन्हें आजमाते ज़माना बीता ‘मिलन’
अब खुदा ही जाने अब उसकी बारी है
Furqut

Nazare Inaayat

14 Jun

देखने में
आप जो इतनी
खूबसूरत है
ये खुदा की
आप पर
नज़रे इनायत है

मेरे हाले दिल तो
दुनिया को
मालुम है
आपकी आँखों में भी
आखिर
शरारत है

शर्मा के
धीरे से
कहते हो के
इजाज़त है
जान ले लेगी मेरी
दिलकश
नजाकत है

चांदनी
रातों से भी
मुझको
शिकायत है
चाँद से
ज़ाहिर है के
मुझको
अदावत है

प्यार से
दिल जीतना
हमारी
शराफत है
मुस्कराहट
आपकी
बा खुदा
क़यामत है

शुक्रिया के
अबतक
‘मिलन’
सलामत है
इश्क में
कुर्बान हो
जाने की
रवायत है

ये खुदा की मुझ पर करमे इनायत है
मोहब्ब्त में मर जाना भी नियामत है

८/६

Mil Nahi Rahaa

14 Jun

ढूंढ रहा हूँ शहरो शहर मिल नहीं रहा
दिल अज़ीज़ हमसफर मिल नहीं रहा

सही पते पर पहुँचा तो गया है रास्ता
घर अपना कही मगर मिल नहीं रहा

फूल प्यार के खिलाते जाएँ डाल डाल
गुलशन में ऐसा शजर मिल नहीं रहा

मेरे दर्देदिल का सटीक इलाज हो सके
किसी दवा में वो असर मिल नहीं रहा

कुछ मीठा बड़ा नमकीन ज़रा तीखा हो
किसी बाज़ार ऐसा जहर मिल नहीं रहा

जैसे हंस मुस्कुरा के मिलते हैं ‘मिलन’
कायनात में उस्सा बशर मिल नहीं रहा

मिलन “मोनी”

Chali Gayi Hai

10 Jun

इस बस्ती से ही शायद,
वह चली गयी है,
आँगन की तुलसी तक,
देखो झुलस गयी है !

सूरज की पहली किरण,
आई नहीं जगाने,
पुरवाई की दस्तक तक,
आई नहीं बुलाने,
सावन की बदरी तक,
सूखी गुज़र गयी है !!
इस बस्ती से ही शायद,
वह चली गयी है !!

बस्ती में, गलियों में,
चहल-पहल नहीं रही,
पीपल की छाव तले,
शीतलता नहीं रही,
प्यासी बछिया तक,
देखो बिलख गयी है !!
इस बस्ती से ही शायद,
वह चली गयी है !!

सूखे खेत, सरोवर सूखे,
तन भूखे, मन भी भूखे,
खुशहाली के पत्ते सूखे,
उम्मीदें तक,
अब तो बिखर गयीं हैं !!
इस बस्ती से ही शायद,
वह चली गयी है !!

इस बस्ती से ही शायद,
वह चली गयी है !
आँगन की तुलसी तक,
देखो झुलस गयी है !!

Man Kahe

9 Jun

मन कहे
या ना कहे
लेकिन
दिल ये कहता है
मेरा चेहरा
आपकी
आँखों में रहता है !

बारिशों से मुझे
शिकायत नहीं है
इसलिए के
भीग कर के
आपका
हुस्न निखरता है
इन घटाओं से
शायद
तुम्हारी ज़ुल्फ़ का
सदियों से नाता है

तेरे रहते
चाँद यह
बदली में छुपता है
आपके
पुर नूर हुस्न से
यक़ीनन
यह कुछ तो जलता है !!

मेरी साँसों मे
समायीं
तेरे यौवन की
महक
मेरे कानो में
गूंजती
घुंघरुओं सी
तेरे खिलखिलाने की
चहक

तू कभी आती
कभी जाती
है मेरे ख्वाब में
सच कहूं तो
रात भर
उलझाती है
अपने
उन्मादित
शवाब में

आओ तुम
सुलझा दूँ मैं
तेरे मन के सारे डोर
सच कहूं मैं
ये प्यार मुझको
एक पहेली सा लगता है !!

मन कहे
या ना कहे
लेकिन
दिल ये कहता है
मेरा चेहरा
बन के दिल
आपकी
आँखों में हरदम रहता है !

मन कहे
या ना कहे
लेकिन
दिल तो ये ही कहता है !!

Na Ho Jaaye

5 Jun

अहसासों से ये दुनिया कहीं खाली न हो जाए
मुहब्बत से करना बात कहीं गाली न हो जाए

बदले प्यार के हमको जब प्यार नहीं मिलता
मुमकिन है यही रिश्ता कहीं पानी न हो जाए

जिधर देखो उधर ही नफरतों के खेत उगते है
अपना अक्स ही हम से कहीं बागी न हो जाए

जिस संस्कार पे अपने हमें गुमाँ इतना आज
नदिया रस्मरिवाजों की कहीं नाली न हो जाए

बदल रही है जिस रफ़्तार से ‘मिलन’ दुनिया
लिखना चाँद पर ग़ज़लें कहीं बासी न हो जाए

मिलन “मोनी”