Archive | August, 2015

Tu Aur Mai

26 Aug

तू और मैं

तुम कहते हो,
‘मैंने ज़िन्दगी को
बहुत करीब से देखा है’
इसलिए,
हर उतार चढ़ाव को
बखूबी समझती हूँ,

और मैं,
जानता हूँ के,
ज़िन्दगी ने मुझको
बेहद करीब से देखा है,
इसलिए,
मैं तुम्हें बाखूबी समझता हूँ,

चलो कुछ कदम,
साथ चलते हैं.

एक के पास
ज़िन्दगी का तजुर्बा है,
एक के पास
तजुर्बे की ज़िन्दगी है.

खूब बनेगी जब
मिल बैठेगें दीवाने दो.

“मिलन”

Advertisements

Tere Pyar Me

25 Aug

सांझ की बेला में,
और अकेला मैं,
भटकता फिरू मै अंजना,
आवारा, बंजारा, मतवाला, दिलहारा,
बस,
तेरे प्यार में — बस तेरे प्यार में,

सांझ की बेला में,
और अकेला मैं,
खो जाता हूँ,
बस,
तेरे प्यार में——-बस तेरे प्यार में

फूल पे भवरे सा,
सांझ सहर दोनों,
मंडराता रहा,
बागो ओ बहारों में,
रंगीन नजारों में,
तुम खुशबू बन मेरी,
सांसों में बस जाते हो,
प्यासे सावन सी एक,
प्यास जगा जाते हो,
अधरों पर मेरे
गीतों की मधुर लय बन,
अंतर्मन पर छा जाते हो,
मै दीवाना सा हो जाता हूँ,
सुध बुध खो जाता हूँ,
बस,
तेरे प्यार में—-तेरे प्यार में.

तेरे प्यार में —-बस तेरे प्यार में.

Shrm

25 Aug

श्रम

श्रम से जोड़े
तार वीणा के,
तुम क्यों नहीं
सुर देते हो?

कोई राग हो
कोई ताल हो
कोई लय या
कोई अलाप हो
तुम क्यों नहीं
स्वर देते हो?

शब्दों और भावों को
चुनकर,
किसी धुन या
मन की धुन पर,
पागलपन या
प्रेम अगन में,
गीत गज़ल या
ठुमरी टप्पा
कुछ देखा
कुछ अनदेखा,
कुछ सुना
कुछ अनसुना सा,
तुम क्यों नहीं
सृजन करते हो?

भूल कुछ
मुझसे हुई या
उदास तुम्हारा
मन हुआ है ?

फिरभी मैं
जोडूंगा,
टूटे हुए तारों को,
इन्हें भी.
मौन जीवन में
कुछ गुनगुना लेने दो.

“मिलन” २५/८/२०१५.

Maza Kuchh Aur Hota Hai

21 Aug

वो महफिल मे हों तो महफिल का मज़ा ही,कुछ और होता है,
बात नज़र से हो तो उन बातों का असर ही,कुछ और होता है,

हया से शर्मा करके झुका लेते हैं वो नज़रों को जिस अदा से,
तसलीम-ऐ-मोहब्ब्त का ऐसा नजरिया ही,कुछ और होता है,

शब्-ऐ-वस्ल भी उनकी औ यह शब्-ऐ-इंतज़ार भी उनका,
ऐसी फुरक़त में पल पल का गुजारना ही कुछ और होता है,

प्यास होंठो पर हो मेरे, औ पैमाना उनकी आँखों में छलके,
साकी ऐसे मयखाने पे जाने का नशा ही, कुछ और होता है.

यूँ तो हर आग में जलने का अपना अलग लुत्फ़ है शायद,
आतिश-ऐ-मोहब्ब्त में सुलगने का मज़ा, कुछ और होता है.

गुलों में रंग भरा हो और गुलाबों जैसी वह बदन की खुशबू,
ऐसे में नई ग़ज़ल गुनगुनाने का मज़ा ही,कुछ और होता है.

वो महफिल मे हों तो महफिल का मज़ा ही,कुछ और होता है,
बात नज़र से हो तो उन बातों का असर ही,कुछ और होता है,

“मिलन”

Na Vo Raat Sawara Kare

13 Aug

कोई चाँद से कह तो दे, न वो रात सवारा करे,
वो दूर हों ऐसे में, तो ये दिल, कैसे गवारा करे,

पलकों पे सुनहरे से सपने सज जाते हैं,
तन्हाइयों के बादल सारी रात रुलाते हैं,
कोई ख्वाबों में आकर के, मेरा चैन चुराया करे,
वो दूर हों ऐसे में, तो ये दिल, कैसे गवारा करे,
……….कोई चाँद से कह तो दे…..

आहाट सुन मेरी, साँसे रुक जातीं हैं,
आँखों में तेरी ही, सूरत बस जाती है,
कोई दिल में आ करके, धड़कन को जगाया करे,
वो दूर हों ऐसे में, तो ये, दिल कैसे गवारा करे,
……….कोई चाँद से कह तो दे…..

आगोश में यादों की धड़कन खो जाती है,
मीठी मीठी दिल में तेरी आस जगाती है,
ये मस्त पवन आकर तेरा गीत सुनाया करे
वो दूर हों ऐसे में, तो ये, दिल कैसे गवारा करे,
……….कोई चाँद से कह तो दे…..

जुल्फों में तेरा चेहरा, चाँद सा लगता है,
अधरों पे तेरे मेरा,बस नाम सा लगता है,
मुस्काना तेरा मुझ पर, बिजली सा गिराया करे,
वो दूर हों ऐसे में, तो ये, दिल कैसे गवारा करे,
……….कोई चाँद से कह तो दे…..

कोई चाँद से कह तो दे, न वो रात सवारा करे,
वो दूर हों ऐसे में, तो ये, दिल कैसे गवारा करे,

“मिलन ” १३/८/२०१५

Yuhi

8 Aug

पलकों के पीछे सपने,पलते नहीं हैं यूँही,
दिल से दिल के रिश्ते,बनते नहीं हैं यूँही,

कुछ तो ऋत ओ मौसम की गर्मी होती है,
कुछ तो किस्मत औ रब की मर्ज़ी होती है,
इस प्यार का मखमली एहसास हैं ही ऐसा
गाल शर्म से गुलाबी इतने,होते नहीं हैं यूँही,
………………..दिल से दिल के रिश्ते,बनते नहीं हैं यूँही,

छाये काले बादल,बिजली गिरने का डर है,
आग लगी हुई है दिल में,तूफानों का डर है,
बाहें खुली हुई हैं, मेरी मोहब्ब्त का असर है,
होठ गीत नया कोई,गुनगुनाते नहीं हैं यूँही,
………………..दिल से दिल के रिश्ते,बनते नहीं हैं यूँही,

हवाओं में आँचल तेरा अब उड़ा उड़ा रहता है,
इंतज़ार किसी का हर पल लगा लगा रहता है,
तनमन तेरा हर दम अब खिला खिला रहता है,
मौसम मधुर मिलन का तो आता नहीं है यूँही,
………………..दिल से दिल के रिश्ते,बनते नहीं हैं यूँही,
पलकों के पीछे सपने,पलते नहीं हैं यूँही,
दिल से दिल के रिश्ते,बनते नहीं हैं यूँही.

‘मिलन’ ७/८/२०१५.

Maza Aata Hai

6 Aug

बात दिल से हो, तो कहने में मज़ा आता है,
फूल असली हो तो, खुशबू का मज़ा आता है,

बात दिल की हो, तो सुनने में मज़ा आता है,
कली चमेली हो तो, चुनने में मज़ा आता है,

बात दिल पर हो तो, सहने में मज़ा आता है,
कांटा गुलाब हो तो, चुभने का मज़ा आता है,

बात दिल में हो तो, जलने में मज़ा आता है,
राज़ की बात हो तो, खुलने में मज़ा आता है,

जो न दिल से न दिल की न दिल में हो तो,
बात दिल खोल कर करने में मज़ा आता है,

बात दिल से हो, तो कहने में मज़ा आता है,
फूल असली हो तो खुशबू का मज़ा आता है,

‘मिलन’ ३१/७/२०१५