Archive | April, 2015

Raat Kaali

15 Apr

ये रात काली रवाँ नहीं होती,
कुछ ग़मों की दवा नहीं होती.

रंजोगम से किसे मोहब्ब्त है,
पर ये हवाएँ कहाँ नहीं होतीं.

याद उनकी बहुत सताती है,
जब वो आस पास नहीं होती

घर अपना बना लिया होता,
बीच अगर दीवार नहीं होती.

मैं कोई मुकम्मल इंसा नहीं,
कुछ कमियां कहाँ नहीं होती.

रंजिशें वहां भी पल जातीं हैं,
दुश्मनी जहाँ पर नहीं होतीं.

किस सोच में रहता ‘मिलन
बेबसी खुद सज़ा नहीं होती.

ये रात काली रवाँ नहीं होती,
कुछ ग़मों की दवा नहीं होती.

Advertisements