Archive | November, 2015

Toh Koi Baat bane

12 Nov

दिल में रहने की जगह बनाओ तो कोई बात बने
दर्दे भी सहने का सहस जुटाओ तो कोई बात बने

एक तेरी उम्मीद के सहारे यहाँ तक आगए हैं हम
कठिन राहों में भी साथ निभाओ तो कोई बात बने

आग यहाँ किस तरह जलाती नफरतों के अंधेरे को
एक प्यार का बस दीपक जलाओ तो कोई बात बने

सियासत के समन्दर में हर दिन उठता तूफ़ान नया
इन तूफानों में भी कश्ती चलाओ तो कोई बात बने

थक कर बैठते हैं मुसाफिर घने दरख्तों की छाव मे
तुम सूखेठूंठ में नए पत्ते उगाओ तो कोई बात बने

लगता है अंजाने शहर में रहते सब अजनबी मिलन
ज़रा आदमी से आदमी मिलवाओ तो कोई बात बने

दिल में रहने की जगह बनाओ तो कोई बात बने
दर्दे भी सहने का सहस जुटाओ तो कोई बात बने

Sitamgar

8 Nov

खुदा तूने सितमगर बनाया न होता
रब की कसम दिल गवाया न होता

गवाया न होता दिल प्यार में हमने
हुस्नवालों ने इतना जलाया न होता

धुंधला सा रहेगा अक्स इतना तेरा
आईनों में तुमको सजाया न होता

गलती अपनी कबूल करली होती गर
तो सरे आम इतना तमाशा न होता

जो आँखों आँखों में समा जाते तुम
रात भर ख्वाबों ने जगाया न होता

हवा उड़ा ले जाती बादलों को कहीं
बारिषों ने जी भर रुलाया न होता

ये मिलेगा न वो पता होता मिलन
उम्मीदों को इतना बढाया न होता

खुदा तूने सितमगर बनाया न होता
रब की कसम दिल गवाया न होता

Ye Zaroori Toh Nahi

6 Nov

प्यार तुमने भी किया हो, ये ज़रूरी तो नहीं
दिल तुम्हारा भी दुखा हो, ये ज़रूरी तो नहीं

तुमने देख तो लिया होगा नज़र भर के हमें
प्यास आँखों की बुझी हो, ये ज़रूरी तो नहीं

आग थी इतनी यहां के कुछ बचा हो शायद
ख्वाब हमारे जल गए हों, ये ज़रूरी तो नहीं

उनसे मिल यूँ तो हमको, राहतें बहुत मिली
हर बात दिल की कही हो, ये ज़रूरी तो नहीं

आंसुओं ने बहकर मन तो हल्का कर दिया
सब ज़ख्में दिल धुल गए, ये ज़रूरी तो नहीं

जिन रास्तों पे चल रहे ढोल पीट कर मिलन
वहीं पे तेरी मंजिल भी हो, ये ज़रूरी तो नहीं

प्यार तुमने भी किया हो, ये ज़रूरी तो नहीं
दिल तुम्हारा भी दुखा हो, ये ज़रूरी तो नहीं

Mil Bhi Sakti Hai

5 Nov

दुनिया अगर चाहो तो मिल भी सकती है
तकदीर अगर चाहो तो खिल भी सकती है

इश्क में कुछ भी तेरा या मेरा नहीं होता
मोहब्ब्त अगर चाहो तो पल भी सकती है

कोशिश नहीं तो मीठा फल मिलेगा कैसे
डालियाँ अगर चाहो तो झुक भी सकती है

मसरूफ रहते हो दिन रात जाने कहाँ पर
फुर्सत अगर चाहो तो मिल भी सकती है

कुछ बोलने से पहले उसे तोलना ज़रूरी है
आपस की बात दिल को लग भी सकती है

ये दुनिया इस क़दर पत्थर तो नहीं’मिलन’
रिश्तों पर पड़ी बरफ पिघल भी सकती है

दुनिया अगर चाहो तो मिल भी सकती है
तकदीर अगर चाहो तो खिल भी सकती है