Archive | January, 2013

Tum Meri Ho

2 Jan

तुम मेरी हो, तुम मेरी हो,

जब से तुम्हें देखा है,

एक फूल सा महका है,

यह महक तुम्हारी है, तुम मेरी हो.

जुल्फों में तुम्हारी जो,

यह चाँद चमकता है,

आँखों से जिसे छू कर,

दिल और धड़कता है,

यह कशिश तुम्हारी है, तुम मेरी हो.

चांदी की तरह चंचल,

यह रात बरसती है,

आगोश में साँसे तेरी,

चन्दन सी महकती हैं,

यह अगन तुम्हारी है, तुम मेरी हो.

सावन की हवाओं से,

एक आग सुलगती है,

अंगूर के पानी सी,‌‍

मदमस्त जवानी है,

यह रात तुम्हारी है, तुम मेरी हो.

आँखों के प्यालों से,

मस्ती जो छलकती है,

होठों से जिन्हें छू कर,

कुछ और बहकती है,

हर सांस तुम्हारी है, तुम मेरी हो.

चाहा था बहारों का,

एक बाग़ लगाऊ मै,

चाहा था सितारों से,

कोई मांग सजाऊ मै,

वो मांग तुम्हारी है, तुम मेरी हो.

माना के यह दूरी तो,

कुछ देर की दूरी है,

पर दिल को किसी तरह,

समझाना ज़रूरी है,

यह जान तुम्हारी है, तुम मेरी हो.

जब से तुम्हे चाह है,

दिल तेरा दीवाना है,

ग़ज़लों में गीतों में,

तुमको ही सराहा है,

यह नज़म तुम्हारी है, तुम मेरी हो.

तुम मेरी हो, तुम मेरी हो,

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