Archive | January, 2016

Ishq-e-Suroor

22 Jan

जुनूने रात है, इश्क-ऐ-सुरूर आने दे,
नाशाद दिल को ज़रा तो करार आने दे,

सो गए सब नज़ारे है सोया सारा जहाँ
मुझे अपने ख्वाबों में ही साथ आने दे

वसले-शब्, ये धडकनें किस शोर में हैं
बात दिल की दबे पाँव होंठों पे आने दे

साँसों से मिला ले मेरी साँसे इस कदर
तेरा प्यार मेरे रोम रोम में बस जाने दे

चलो तय कर लें मामला-ऐ-इश्क दोनों,
कुछ और मुझे अपने तो करीब आने दे.

बेवजह की बातों में उलझा है ‘मिलन’
इन्तेहा प्यार की इस रात तो हो जाने दे

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Kaliyan

6 Jan

बहार आई तो फिर, फूल बन गयीं कलियाँ
भवर भवर के दिल को लुभा गयीं कलियाँ

क्यों वीरान नहीं लगते बागो बागीचे अब ये
गुलशन की आबो हवा, महका गयीं कलियाँ

हैं तड़प मुझको अब, शबे वस्ल के आने की
एक प्यास सी अधरो पर जगा गयीं कलियाँ

हमारे सामने क्यों लाज से सिमटी जातीं हैं
एक ही रात में, कितनी बदल गयीं कलियाँ

यूं तो टूट कर बिखर ही जाते हैं अच्छे खासे
शाख से टूटीं तो आँखों में बस गयीं कलियाँ

रहता नहीं मिजाज़ ऐ वक़्त एक जैसा कभी
हर मौसम पे मुस्कुरा कर रह गयीं कलियाँ

यह रौशनी कैसी हुई मेरे अंतर तक मिलन
शम्मा प्यार की जैसे के जला गयी कलियाँ

‘ मिलन ‘ २८/१२/२०१५