Archive | Poetry RSS feed for this section

Khabar Keejiye

19 Jun

जुबान लम्बी अपनी अगर कीजिये
बातें कुछ सोच समझ कर कीजिये !

नज़र आयेगा इसका नतीजा कभी,
इम्तेहान की घडी है सबर कीजिये !

आपको हुस्न की बख्शी हैं जितनीं,
इनायतें कुछ हमारी नज़र कीजिये !

मिटाना है दुश्मन का लश्कर कभी,
तब मजबूत अपना जिगर कीजिये !

मंजिल मिलेगी तुम्हें खुदबखुद ही,
साथ दुआओं के अब सफर कीजिये !

हर तरफ लार टपकाते नहीं घूमिये
मिला जितना उसमें बसर कीजिये !

है प्यार कितना आपको ‘मिलन’ से
निगाहों से दिल को खबर कीजिये !!

मिलन “मोनी”
१५/६/२०१७

Nahi Chaahiye

15 Jun

सहानुभूति का बोझ उठाना नहीं चाहिए
किसीको अपना दर्द बताना नहीं चाहिए

तंजों में नमक लेकर मिलते हैं दुश्मन
ज़ख्मेदिल सबको दिखाना नहीं चाहिए

भरोसा शूलों का नहीं कब फूलों में मिलें
गुलाब राहों पे भी बिछाना नहीं चाहिए

धुंधला जायेगी तुम्हारी नजर रोते रोते
आंसुओं को बेसबब बहाना नहीं चाहिए

रास्ते के लिए सामान संभालना पडेगा
प्यार में सभी कुछ लुटाना नहीं चाहिए

चार दिनों के बाद अँधेरी रात हो जायगी
दाव चांदनी पे कोई लगाना नहीं चाहिए

आत्मा तक भटक जाती है ‘मिलन’यहाँ
ज्योतिषी को हाथ दिखाना नहीं चाहिए !!

मिलन “मोनी”

Milte Hain

15 Jun

इस शहर में अब शमशान मिलते हैं
कहीं कहीं पर ज़िंदा इंसान मिलते हैं

कुछ तो सांस ले रही है ये ज़िन्दगी
अभी भी चलने के निशान मिलते है

हकीकतन ये बहुत दूर दूर हैं लेकिन
देखने में तो ज़मीं आसमां मिलते हैं

इन घरों में कोई रिश्ता नहीं पनपता
हर कमरे यहाँ पे सूनसान मिलते हैं

पहचानते हैं लोग शहर का हर कोना
पर रास्ते सारे ही अन्जान मिलते हैं

इस क़दर बढ़ गए हैं हादसे ‘मिलन’
चेहरे सब के सब ही हैरान मिलते हैं !!

मिलन “मोनी”

Kamaal Karti Hai

6 Jun

नज़र तुम्हारी क्या क्या कमाल करती है
ज़िन्दगी जाने क्या क्या सवाल करती है

ये हुस्न की शम्मा जब कहीं पे जलती है
कितने परवानों की जान हलाल करती है

जाने अन्जानें कुछ भी कहती है वह फिर
अपनी कही हुई बात पर मलाल करती है

बयार कभी बारिष तो कभी आंधी तूफ़ान
चलती हवा भी क्या क्या बबाल करती है

लहरा लहरा कभी रुखसारों पे बिखरती है
रात जुल्फें तेरी क्या क्या जवाल करती है

उबटन कभी लाली कभी काजल औ बिंदी
हसीना रूप का क्या क्या ख़याल करतीं हैं

अदाएं तुम्हारी हो गयी कातिलाना’मिलन’
हरएक अंगडाई मेरा जीना मुहाल करती है !!

मिलन “मोनी” ६/५/२०१७

Kab Batata Hai

24 May

चेहरे का हर भाव किया वादा कब बताता है
कितना दर्द है सीने में आयना कब बताता है !

क्यों तडप तडप के जान दे रहीं हैं सदियों से
इन लहरों के जज़्बात किनारा कब बताता है !

हथेली की लकीरों में लिखा सब कुछ होता है
फिरभी यह मुक़द्दर खुद इशारा कब बताता है !

मुसाफिरों को मंजिलों का इल्म हो तो बेहतर
वर्ना ले जायगा कहाँ यह रास्ता कब बताता है !

अंधेरों में भी दीपक जलाना सीख लो आखिर
कितने वक़्त हैं खुशियाँ उजाला कब बताता है !

कहते हैं कि विशवास पर ही कायम है दुनिया
कभी तक साथ दे अपना सहारा कब बताता है !

कौन यूँहीं मिल जाए और कौन कहीं खो जाए
वक़्त का मिजाज़ कोई सितारा कब बताता है !

छूते ही ‘मिलन’ तुझे तन मन सुलग जाता है
कितनी आग हो मुझ में शरारा कब बताता है !!

मिलन “मोनी”
२४/५/२०१७

Nahi Karte

22 May

हम उनकी निगाहों का कहा टाला नहीं करते
और किसी शरारत का बुरा माना नहीं करते !

मिलते नहीं तो कितने बरस तक नहीं मिलते
फिर भी खुद से जुदा उनको पाया नहीं करते !

प्यार का मुझको नशा है तो हुस्न का उनको
हम मयकदों में वक़्त कभी ज़ाया नहीं करते !

मुस्कुराहटों में छुपा लेते हैं अपने ग़म सभी
हम रंजिशों का जहर कभी खाया नहीं करते !

वो हम साया सा बनके रहता है हरदम साथ
फिरभी हम दीदारे हुस्न का दावा नहीं करते !

जब जब मिले ‘मिलन’ नए अंदाज़ में मिले
पर बाग़ में हर फूल ही मन भाया नहीं करते !!

मिलन “मोनी”

Chup Chup

14 May

इतने चुप चुप रहते हो ये तो कोई बात नहीं
तेरी नज़रों में ही अब मेरी कोई औकात नहीं

जिस हुस्न के सदके हम रोज़ कसीदे पढ़ते थे
उसके जहनों में शायद मेरे लिए ज़ज्बात नहीं

जिसके तअक़्क़ुब में मैंने काँटो काँटों खेला है
उन कलियों से अब मेरी कोई मुलाक़ात नहीं

राहे इश्क़ में चलने वालों इतना मायूस न हो
अच्छे दिन आ जायेंगे इतने बुरे हालात नहीं

दिल है चाँद सितारों से ही उसका सिंगार करूँ
जब वो मिलने आते हैं दिन होता है रात नहीं

किस्मत में जो लिखा था सब मेरे साथ हुआ
मेरी बर्बादी के पीछे उसकी कोई सौगात नहीं

मेरे दर्द के बाईस ‘मिलन’मेरे ही एहसास हैं
मेरे दिल के छाले हैं आँखों की बरसात नहीं !!

मिलन “मोनी”