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Hathon Ki Mutthi

13 Mar

हाथों की मुठ्ठी को ज़रा
खोल के देखो,
हथेली की लकीरों में
सभी कुछ तो लिखा है.
है भाग्य तुम्हारा तो
हाथों में तुम्हारे,
मेहनत की किताबों से
पता इसका मिला है.
हाथों की मुठ्ठी को ज़रा खोल के देखो

डूबे हैं यहाँ कितने ही
सफीने भंवर में,
टूटी हुई कश्ती को
किनारा भी मिला है.
मोहब्बत से बड़ी कोई भी
दौलत नहीं होती,
उस तक तो पहुँचने का पता
सबको पता है.
-हाथों की मुठ्ठी को ज़रा खोल के देखो (१)

है ज़िन्दगी सहर तो
कभी रात के साए,
जैसा मिले मौसम तो
गुल वैसा खिला है.
हर इंसान से करता है
वो इन्साफ बराबर,
जितनी बड़ी गलती
तो फल उतना मिला है.
-हाथों की मुठ्ठी को ज़रा खोल के देखो (2)

किस बात का है ग़म
जब इतनी ख़ुशी है,
के मुश्किल में तुझे
रब का सहारा भी मिला है.
कुछ छुप नहीं सकता है,
छुपाने से कभी भी,
चेहरे को तुम्हारे तो
हर भाव मिला है
-हाथों की मुठ्ठी को ज़रा खोल के देखो(३)

हाथों की मुठ्ठी को ज़रा, खोल के देखो,
हथेली की लकीरों में सभी कुछ तो लिखा है !!

मिलन ‘मोनी’

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Ranjha Aur Heer

12 Mar

मैं तेरा दीवाना,
तू मेरी दीवानी,
रांझा और हीर जैसी अपनी है कहानी,

मैं तुझे न देखूं तो नींद मुझे न आये,
तू मुझे न देखे तो चैन तुझे न आये,
इश्क से भरपूर यह अपनी है जवानी
रांझा और हीर जैसी अपनी है कहानी

मैं आवारा बादल हूँ तेरी मोहब्बत का,
तू चमकता हुस्न जैसे चाँद पूनम का,
नूर से पुरनूर है यह प्यार की रवानी
रांझा और हीर जैसी अपनी है कहानी

कमसिन कली सी बागों में महके तू,
बद-मस्त भवर सा फूलों पर डोलूँ मैं
ये मिलन की ऋत ही है बहुत सुहानी,
रांझा और हीर जैसी अपनी है कहानी,

तू है गुनगुनाती एक नदिया की धारा,
औ मैं हूँ तेरा एक खामोश सा किनारा,
कहने को तो नई लेकिन बात है पुरानी,
रांझा और हीर जैसी अपनी है कहानी !!

मैं तेरा दीवाना,
तू मेरी दीवानी,
रांझा और हीर जैसी अपनी है कहानी !!

मिलन “मोनी”

Yaad Kiya Hai Shayad

3 Nov

जिस तरह मैंने
तुम्हें तन्हा
याद किया है शायद,
उस तरह तुमने
भी तो मुझको
न भुलाया होगा !!
ज़िन्दगी भर
न अलग होंगे कभी
हम और तुम,
इस कसम को तो
तुमने आज भी
निभाया होगा !!

सुबह सुबह
उठ कर बागों में जब
मन बहलाने
जाती होगी,
फूलों की
कोमल पंखुड़ियों पर
शबनम से
मोती पाती होगी,
पंछियों का कलरव
सुनकर भी
समझ नहीं
कुछ पाती होगी,
बिरह की एक
टीस सी दिल में
कहीं तेरे भी
उठ जाती होगी,
तेरे नयनों ने भी
उस पल
कुछ तो ग़म
बहाया होगा !
अपने दिल का
सारा हाल
पलकों को
सुनाया होगा !!

इस तरह तुमने मुझको न भुलाया होगा !!

दोपहर जब
धूप चहक कर
आँगन में
खिल जाती होगी,
पत्तों की परछाई
घिर कर
खिड़की पर
जम जाती होगी,
मधुर हवा की
आवा जावी
तेरी जुल्फ
लहरा जाती होगी,
लाल चुनरिया
भी उसपल
तेरे बस में
न रह पाती होगी,
मेरी ग़ज़ल को
तब तेरे अधरों ने
गुनगुनाया होगा !
मेरे साये को
अनायास
जब तूने
गले लगाया होगा !!

इस तरह तुमने मुझको न भुलाया होगा !!

सांझ सुहानी
दूर शितिज पे
रंग सिन्दूरी
छटकाती होगी,
करने तब
श्रृंगार सोल्हा
तुम दरपन तक
आ जाती होगी,
अपने चेहरे
से ही खुद तुम
नज़र मिला
नहीं पाती होगी,
मेरी ही छबि
धुंधली सी
तुम्हारी आँखों में
आ जाती होगी,
मेरे प्रेम गीतों ने
तब जा कर
तेरा दर्द
सहलाया होगा !
कुछ कहते कहते
फिर जाने
तेरा मन
भर आया होगा !!

इस तरह तुमने मुझको न भुलाया होगा !!

रात तुम्हारे
बिस्तर पर
आके
चादर सी
बिछ जाती होगी,
दिन भर
का सब हाल सुना कर
सपनों में
खो जाती होगी,
लिपट कर
मेरे साये से
जैसे
आत्म विभोर
हो जाती होगी,
बदल बदल
कर करवट तेरी भी
वो रात तो
कट जातीं होंगी,
जागी जागी
आँखों ने फिर
ख्वाब सुनहरा
सजाया होगा !
तेरे मेरे
एकएक
वादे को याद
कई कई बार
दिलाया होगा !!

इस तरह तुमने मुझको न भुलाया होगा !!

जिस तरह मैंने
तुम्हें तन्हा
याद किया है शायद,
उस तरह तुमने
भी तो मुझको
न भुलाया होगा !!
ज़िन्दगी भर
न अलग होंगे कभी
हम और तुम,
इस कसम को तो
तुमने आज भी
निभाया होगा !!

मिलन “मोनी”

जिस तरह मैंने तुम्हें
तन्हा याद
किया है शायद,
उस तरह
तुमने भी तो
मुझको न
भुलाया होगा !!
ज़िन्दगी भर
न अलग होंगे
कभी हम
और तुम,
इस कसम को
तो तुमने
आज भी
निभाया होगा !!

मिलन “मोनी”

Deewana Ho Gaya

7 Oct

देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !
हुस्न की शम्मा का यह परवाना हो गया !!

ऐसे मिल रही हो मुझसे
जैसे पहली बार मिली हो
हुस्न और इश्क की जैसे
नयी नयी कली खिली हो
आयने में देखके बहुत शरमाना हो गया
देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !!

झोंका एक हवा का आके
महक जो तेरी फैला गया
घर का कोना कोना मेरा
खुशबू से तेरी नहा गया
उस शब् से मन मेरा आशिकाना हो गया
देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !!

तेरा हर ग़म मेरा अब
मेरा हर पल तेरा अब
जीवन में भी तेरे मेरे
नहीं रहा अन्धेरा अब
कुछ पलों में जैसे सब उजियारा हो गया
देखा तुम्हें तो दिल मेरा दीवाना हो गया !!

मिलन “मोनी”

Kuchh Ka Kuchh

11 May

मदहोशी में नज़रे कुछ का कुछ समझती हैं
सारी दुनिया जाने कुछ का कुछ समझती है !

जुल्फें तेरी कुछ कहतीं हैं,
आँचल तेरा कुछ कहता है,
पर मोहब्ब्त जाने कुछ का कुछ समझती हैं !

समंदर हमसे कुछ कहता है,
किनारा हमसे कुछ कहता हैं,
पर लहर यह जाने कुछ का कुछ समझती हैं !

चाँद हमारा कुछ कहता है,
दिन सुनहरा कुछ कहता है,
पर रात अँधेरी जाने कुछ का कुछ समझती है !

तेरी पायल कुछ कहती है,
तेरा झुमका कुछ कहता है,
पर हाथों की मेहँदी कुछ का कुछ समझती हैं !

दिल की धड़कन कुछ कहती है,
रात मिलन की कुछ कहती है,
बागों की कलियाँ जाने कुछ का कुछ समझती हैं !

तू मुझसे कुछ कहती है,
मैं तुझसे कुछ कहता हूँ,
पर शंकित आँख जाने कुछ का कुछ समझती है !

रात बिरहा की कुछ कहती है,
सांस मिलन की कुछ कहती है,
पर बिस्तर की सिलवट कुछ का कुछ समझती है !

मदहोशी में नज़रे कुछ का कुछ समझती हैं
सारी दुनिया जाने कुछ का कुछ समझती है !!

मिलन “मोनी”

Bahaar Hi Bahaar

9 May

खिल रहे हैं फूल यहाँ डाल डाल पर,
आज है बहार ही बहार ज़िन्दगी !
मधुप चूसते भँवर
फूल फूल पर,
आज है खुमार ही खुमार ज़िन्दगी !!

आओ प्रिय आज वहीँ,
झील के किनारे
साथ चलें दूर कहीं,
बाह थामे थामे,

प्यार की महक उठे
सांस सांस पर,
आज है श्रृंगार ही श्रृंगार ज़िन्दगी !! खिल रहे …..(१

उठ रही लहर लहर
करके ये इशारे,
हम हुए तुम्हारे प्रिय
तुम हुए हमारे,

होंठ मुस्कुरा उठे
बात बात पर,
आज है इकरार ही इकरार ज़िन्दगी !! खिल रहे ….. (२

आज प्रिय तुम हुए
तुम हुए प्यारे,
मधुर मिलन के पल सभी
अब हुए हमारे

हुस्न की मशाल जले
रात रात भर,
आज है करार ही करार ज़िन्दगी !! खिल रहे …..(३

मधुर मिलन के राज़ सारे
अब हुए हमारे ,
सुन सकें न दिल की बात
चाँद और तारे

इश्क की बयार बहे
उम्र उम्र भर
आज है त्योहार ही त्योहार ज़िन्दगी !! खिल रहे …(४

खिल रहे हैं फूल यहाँ डाल डाल पर,
आज है बहार ही बहार ज़िन्दगी !!

मिलन “मोनी” ८/५/२०१७

Ghri Neend

29 Nov

गहरी नींद से कोई, यूँ ही तो नहीं जागा होगा !
उसका कोई सपना, टूट कर कहीं बिखरा होगा !!

छू छू कर निकल गयीं
साहिलों को कश्तियाँ,
गहरे कोहरे से ढक गईं
दिल अज़ीज़ घाटियाँ,
उम्मीदों से कोई नाउम्मीद
यूँ ही नहीं होता होगा,
उसका कोई अपना ही, उससे रूठ गया होगा !

समय की गर्द से ढका फर्श
परछाइयाँ कहाँ तक छुपा पायगा,
सूखे होंठों के भी गीले निशाँ
रुखसारों से कोई कैसे मिटा पाएगा,
उसके ख़्वाबों को ही कोई
मसल, कुचल गया होगा,
अजनबी भी कोई अपना सा, ऐसे तो नहीं लगता होगा !

पानी में कोई अक्स ढूंढती
लहरें तक चुप नहीं बैठेंगी,
साँसों तक महक ख्वाबों की,
कभी न कभी तो पहुंचेगी,
एक अंधा तूफ़ान भीतर तक,
सब उथल पुथल मचा गया होगा,
गीत पुराना भी कोई, मन न बहला पाया होगा !

बर्फीली हवाओं की तपन
कंपकंपा जायेगी सारा तन,
इन बाहों में अगर इस पल
समा जाएगा तू सजन,
आँसू कोई आँख से बस
यूँ ही नहीं फिसला होगा,
ख़याल उनका भीतर तक दिल दहला गया होगा !

गहरी नींद से कोई, यूँ ही तो नहीं जागा होगा !
उसका कोई सपना टूट कर कहीं बिखरा होगा !!

मिलन “मोनी”