Archive | May, 2017

Kab Batata Hai

24 May

चेहरे का हर भाव किया वादा कब बताता है
कितना दर्द है सीने में आयना कब बताता है !

क्यों तडप तडप के जान दे रहीं हैं सदियों से
इन लहरों के जज़्बात किनारा कब बताता है !

हथेली की लकीरों में लिखा सब कुछ होता है
फिरभी यह मुक़द्दर खुद इशारा कब बताता है !

मुसाफिरों को मंजिलों का इल्म हो तो बेहतर
वर्ना ले जायगा कहाँ यह रास्ता कब बताता है !

अंधेरों में भी दीपक जलाना सीख लो आखिर
कितने वक़्त हैं खुशियाँ उजाला कब बताता है !

कहते हैं कि विशवास पर ही कायम है दुनिया
कभी तक साथ दे अपना सहारा कब बताता है !

कौन यूँहीं मिल जाए और कौन कहीं खो जाए
वक़्त का मिजाज़ कोई सितारा कब बताता है !

छूते ही ‘मिलन’ तुझे तन मन सुलग जाता है
कितनी आग हो मुझ में शरारा कब बताता है !!

मिलन “मोनी”
२४/५/२०१७

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Nahi Karte

22 May

हम उनकी निगाहों का कहा टाला नहीं करते
और किसी शरारत का बुरा माना नहीं करते !

मिलते नहीं तो कितने बरस तक नहीं मिलते
फिर भी खुद से जुदा उनको पाया नहीं करते !

प्यार का मुझको नशा है तो हुस्न का उनको
हम मयकदों में वक़्त कभी ज़ाया नहीं करते !

मुस्कुराहटों में छुपा लेते हैं अपने ग़म सभी
हम रंजिशों का जहर कभी खाया नहीं करते !

वो हम साया सा बनके रहता है हरदम साथ
फिरभी हम दीदारे हुस्न का दावा नहीं करते !

जब जब मिले ‘मिलन’ नए अंदाज़ में मिले
पर बाग़ में हर फूल ही मन भाया नहीं करते !!

मिलन “मोनी”

Chup Chup

14 May

इतने चुप चुप रहते हो ये तो कोई बात नहीं
तेरी नज़रों में ही अब मेरी कोई औकात नहीं

जिस हुस्न के सदके हम रोज़ कसीदे पढ़ते थे
उसके जहनों में शायद मेरे लिए ज़ज्बात नहीं

जिसके तअक़्क़ुब में मैंने काँटो काँटों खेला है
उन कलियों से अब मेरी कोई मुलाक़ात नहीं

राहे इश्क़ में चलने वालों इतना मायूस न हो
अच्छे दिन आ जायेंगे इतने बुरे हालात नहीं

दिल है चाँद सितारों से ही उसका सिंगार करूँ
जब वो मिलने आते हैं दिन होता है रात नहीं

किस्मत में जो लिखा था सब मेरे साथ हुआ
मेरी बर्बादी के पीछे उसकी कोई सौगात नहीं

मेरे दर्द के बाईस ‘मिलन’मेरे ही एहसास हैं
मेरे दिल के छाले हैं आँखों की बरसात नहीं !!

मिलन “मोनी”

Jaa Raha Hai

12 May

क्यों ग़मों मे बशर डूबता जा रहा है
फासला इंसानों में बढ़ता जा रहा है

मुल्क का जाने क्या अन्जाम होगा
नेतागिरी का पारा चढ़ता जा रहा है

कोई इसकी मुराद न हो पाएगी पूरी
जो पाँव चादर से निकला जा रहा है

तहजीब नाकाबिले-तारीफ़ हो रही है
पानी सरों से ऊपर उठता जा रहा है

संभल संभल कर रखना हर कदम
ये कही का कहीं फिसला जा रहा है

आसमां छूने की तमन्ना में हरेक
नीव का पत्थर उखड़ता जा रहा है

कश्तियाँ किनारे पहुचाने ‘मिलन’
तूफानों में सफीना घिरा जा रहा है !!

मिलन “मोनी” १३/4/२०१७

Kuchh Ka Kuchh

11 May

मदहोशी में नज़रे कुछ का कुछ समझती हैं
सारी दुनिया जाने कुछ का कुछ समझती है !

जुल्फें तेरी कुछ कहतीं हैं,
आँचल तेरा कुछ कहता है,
पर मोहब्ब्त जाने कुछ का कुछ समझती हैं !

समंदर हमसे कुछ कहता है,
किनारा हमसे कुछ कहता हैं,
पर लहर यह जाने कुछ का कुछ समझती हैं !

चाँद हमारा कुछ कहता है,
दिन सुनहरा कुछ कहता है,
पर रात अँधेरी जाने कुछ का कुछ समझती है !

तेरी पायल कुछ कहती है,
तेरा झुमका कुछ कहता है,
पर हाथों की मेहँदी कुछ का कुछ समझती हैं !

दिल की धड़कन कुछ कहती है,
रात मिलन की कुछ कहती है,
बागों की कलियाँ जाने कुछ का कुछ समझती हैं !

तू मुझसे कुछ कहती है,
मैं तुझसे कुछ कहता हूँ,
पर शंकित आँख जाने कुछ का कुछ समझती है !

रात बिरहा की कुछ कहती है,
सांस मिलन की कुछ कहती है,
पर बिस्तर की सिलवट कुछ का कुछ समझती है !

मदहोशी में नज़रे कुछ का कुछ समझती हैं
सारी दुनिया जाने कुछ का कुछ समझती है !!

मिलन “मोनी”

Bahaar Hi Bahaar

9 May

खिल रहे हैं फूल यहाँ डाल डाल पर,
आज है बहार ही बहार ज़िन्दगी !
मधुप चूसते भँवर
फूल फूल पर,
आज है खुमार ही खुमार ज़िन्दगी !!

आओ प्रिय आज वहीँ,
झील के किनारे
साथ चलें दूर कहीं,
बाह थामे थामे,

प्यार की महक उठे
सांस सांस पर,
आज है श्रृंगार ही श्रृंगार ज़िन्दगी !! खिल रहे …..(१

उठ रही लहर लहर
करके ये इशारे,
हम हुए तुम्हारे प्रिय
तुम हुए हमारे,

होंठ मुस्कुरा उठे
बात बात पर,
आज है इकरार ही इकरार ज़िन्दगी !! खिल रहे ….. (२

आज प्रिय तुम हुए
तुम हुए प्यारे,
मधुर मिलन के पल सभी
अब हुए हमारे

हुस्न की मशाल जले
रात रात भर,
आज है करार ही करार ज़िन्दगी !! खिल रहे …..(३

मधुर मिलन के राज़ सारे
अब हुए हमारे ,
सुन सकें न दिल की बात
चाँद और तारे

इश्क की बयार बहे
उम्र उम्र भर
आज है त्योहार ही त्योहार ज़िन्दगी !! खिल रहे …(४

खिल रहे हैं फूल यहाँ डाल डाल पर,
आज है बहार ही बहार ज़िन्दगी !!

मिलन “मोनी” ८/५/२०१७

Asteeno me

7 May

सांप आस्तीनों में पल न पायेंगे
हमारे दुश्मन हमें छल न पायेंगे

मंजिल तक पहुंचना आसाँ नहीं
ये रस्ते सफर पे चल न पायेंगे

जितने घने हो चले हैं ये अँधेरे
चराग भी उतना जल न पायेंगे

ग़मों में आज इतना मुस्कुरा के
मुसीबतों का कोई हल न पायेंगे

रात और दिन इस तरह रोज़ ही
‘मिलन’सूरज सा ढल न पायेंगे !!

मिलन “मोनी”