Archive | September, 2014

Nasha Do Mujhko

28 Sep

अपनी आँखों के प्यालों से पिला दो मुझको,

ज़िन्दगी भर जो न उतरे,वो नशा दो मुझको.
कुछ याद है मुझको ज़रा ज़रा,
कुछ ज़रा भी मुझको याद नहीं,
कुछ कहा है तुमने अभी अभी,
क्या कहा है मुझको याद नहीं,
यादों के दर्पण में थोड़ी सी जगह दो मुझको,
ज़िन्दगी भर जो न उतरे,वो नशा दो मुझको.
साँसों में महक तेरी ही छाई है,
नज़रों में तेरी ही तो परछाई है,
हम कैसे करें अपनी आह बयां,
धडकनों ने धूम इतनी मचाई है,
बात जो दिल में है होंठों पे लाने दो मुझको,
ज़िन्दगी भर जो न उतरे,वो नशा दो मुझको.
आज बारिश में इतना भीगा हूँ मैं,
अब तक धूप में इतना तपा हूँ मैं,
ये मालूम नहीं के कल क्या होगा,
तेरी बाँहों में ही सिमट जाऊँगा मैं,
इन जुल्फों की नर्म छाव में,जगह दो मुझको,
ज़िन्दगी भर जो न उतरे, वो नशा दो मुझको.
नाम तुम्हारा जब जब आया,
धडकनों में एक तूफ़ान उठा,
दिल की कलियाँ यूँ मुसकायीं,
जैसे यह पहली बार खिलीं हों,
तेरे इश्क में जीने- मरने की दुआ दो मुझको,
ज़िन्दगी भर जो न उतरे, वो नशा दो मुझको.
अपनी आँखों के प्यालों से पिला दो मुझको,
ज़िन्दगी भर जो न उतरे, वो नशा दो मुझको.

Kyon Nahi Karte

25 Sep
कुछ ख्वाबों को आँखों में, सजाया क्यों नहीं करते,
तुम्हें किस बात का है डर, इशारा क्यों नहीं करते ?
वही होंठों पर तो आएगी, जो रहती है तेरे दिल में,
ग़ज़ल वो तन्हा रातों में, सुनाया क्यों नहीं करते ?
कभी नाशाद रहते हो और, कभी नाराज़ रहते हो,
चेहरे की लिखावट को, नुमाया क्यों नहीं करते ?
दिल के दरवाजों को मैंने, अब खुला ही रक्खा है,
तुम यह घर बसाने का, इरादा क्यों नहीं करते ?
जो लिखा था तेरे मन में, वही पढ़ कर सुनाया है,
दिल का मौसम और, सुहाना क्यों नहीं करते ?
कुछ ख्वाबों को आँखों में, सजाया क्यों नहीं करते,
तुम्हें किस बात का है डर, इशारा क्यों नहीं करते ?