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Aadmi

12 Oct

खुद को धोखा रोज़ देता आ रहा है आदमी
अपने मुक़ददर से लड़ता आ रहा है आदमी !

ओर का कुछ पता है न छोर का ही पता
अन्धेरी राहों पर चलता जा रहा है आदमी !

ये खून के रिश्ते भी जैसे हो गए हैं पानी
भाई से भी आज धोखा खा रहा है आदमी !

भगवान के उसूलों को तो ताक पे रख के
राग अपनी अलग अलग गा रहा है आदमी !

इन अंधेरों से निबटने के लिए कई बार तो
रौशनी की किरण बन के छा रहा है आदमी !

पहन कर के राम रहीम का चोला ‘मिलन’
पूरी कायनात में ही कहर ढा रहा है आदमी !!

मिलन”मोनी”

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Mahtabi

6 Oct

नाशाद दिलों पे जैसे जादूगरी हो गयी
वो जो मुस्कुराए तबीयत हरी हो गयी !

अब ज़िन्दगी से मुझे खौफ होता नहीं
मेरी मौत से जो गहरी दोस्ती हो गयी !

चन्द लम्हे क्या गुजारे हैं बिन आपके
ऐसा लगता है जैसे एक सदी हो गयी !

चाँद घटाओं से बाहर निकला भी नहीं
माहताबी खुद ब खुद शायरी हो गयी !

जो देता रहा है वक़्त हरवक़्त मुझको
शायद उसे भी वक़्त की कमी हो गयी !

बांटे हैं ‘मिलन’ ग़म ज़मानों के हमनें
क्योकि महंगी बड़ी अब ख़ुशी हो गयी !!

मिलन “मोनी”

Humdam

29 Sep

अपने दिल का मुझे भी पता दीजिये
कुछ इशारों इशारों में ही बता दीजिये !

प्यार की इस अदालत में जो चाहिए
दफा मुनासिब सी कोई लगा दीजिये !

मेरी रग रग में जो रची बसी रागिनी
अधरों पे रख बाँसुरी सी बजा दीजिये !

वसले-शब् के दिखाए थे आँखों ने जों
ख्वाब पलकों पर वो ही सजा दीजिये !

इश्क के खेल में जो आशिक नाकाम
चार आंसू कभी उन पर बहा दीजिये !

रोग जाने ‘मिलन’ये क्या लग गया
कोई हम-दर्द की हमदम दवा दीजिये !!

मिलन “मोनी”

२८/९/२०१७

Dheere Dheere

20 Sep

आप ही आप हर तरफ नज़र आयेंगे,
आयना दिल का लेकर जिधर जायेंगे !

रात दिन मेरे तस्सवुर में तुम्ही हो,
बचके तुमसे भला हम किधर जायेंगे !

तेरी हुस्न ए खुश्बू इन फ़ज़ाओं गुम,
तुम जिधर जाओगे हम उधर जायेंगे !

आपसे शौक है आप से रंगे महफिल,
तुम न होगे तो ये सब बिखर जायेंगे !

इन्तजारे मोहब्बत से दिल भर गया,
आप हैं जो करके वादा मुकर जायेंगें !

मोहब्बत में माना हैं तंगहाथ ‘मिलन’
धीरे धीरे ही सही मगर सुधर जायेंगे !!

मिलन “मोनी”

Sauda Nahi Karte

13 Sep

एक उम्मीद से ज़्यादा कुछ चाहा नहीं करते
अपनी हदों से ज़्यादा कभी माँगा नहीं करते !

जिस्मजाँ और खून से जिन्हें सींचा है हमने
उन पर भी किसी हकूक का दावा नहीं करते !

दोस्ती तो कांच जैसी नाज़ुक होती है दोस्तों
भूलसे भी कोई चोट इसपर मारा नहीं करते !

दिल जला जलाकर लिखी हो जो शायर ने
महफ़िलों में वही गज़ल सुनाया नहीं करते !

मिली हो रुसवाई जहां एक बार भी तुमको
उस तरफ तो भूलकर भी जाया नहीं करते !

जिम्मेदारियों का बोझ तो उठाना है’मिलन’
जिम्मेदारियों से कभी कोई सौदा नहीं करते !!

मिलन “मोनी”

Chalte hain

12 Sep

मुश्किलों का अंदाज़ लगा के चलते हैं
अपना साजो सामान उठा के चलते हैं!

ये वक़्त किसी का मोहताज नहीं रहता
हम वक़्त का हिसाब लगा के चलते हैं!

नफरतों के बावजूद दिल साफ़ रखते हैं
दुश्मन से हम आँख मिला के चलते हैं!

ज़िन्दगी के ये रास्ते दुश्वार नहीं लगते
पतझड़ों में भी पुष्प खिला के चलते हैं!

सहर हो शाम हो या रात फर्क नहीं हमें
सपना आँखों में नया सजा के चलते हैं!

महसूस नहीं होता है अकेलापन ‘मिलन’
हर अजनबी को अपना बना के चलते हैं!!

मिलन “मोनी”

Dil Pe Leta Hai

18 Aug

वो मेरी हर इम्दाद दिल पे लेता है
वो बेबफा हर बफा दिल पे लेता है

पानी में बह जाये सारी फसल तब
किसान वो बरसात दिल पे लेता है

बाल सफ़ेद एक ही दिखे जवानी में
हर शख्स वो अपने दिल पे लेता है

दिल की बात मैं दिल से कहता हूँ
बस वही बात मेरी दिल पे लेता है

लहूँ एक है मगर दुश्मनी मोल ली
बात ये हिन्दुस्तान दिल पे लेता है

आयने से निकल कर वो ‘मिलन’
तारीफे-हुस्न अपने दिल पे लेता है !!

मिलन “मोनी”