Archive | Ghazal RSS feed for this section

Sazaa

16 Dec

जब खता थी आपकी कातिल अदाओं की
मुझे सज़ा मिली आखिर किन गुनाहों की !

ज़ख्म मेरे खुद अब तो दे रहे हैं गवाही
क्या मिली सौगात ये मुझको बफाओं की !

उनको खुश देखा तो खुद अच्छे हो गए
मरीज़े दिल को चाह नहीं अब दवाओं की !

एक सदा में देख लेते थे पलट मुझ को
कद्र उनको नहीं है अब उन्ही सदाओं की !

प्यार की दरिया में रहते हैं जो सराबोर
उम्मीद कहाँ रहती है उनको जफ़ाओं की !

राहे इश्क नहीं होती है आसान ‘मिलन’
आशिक को चाह सदा होती दुआओं की !!

मिलन “मोनी”

Advertisements

Husne-babaal

7 Dec

अनसुना करते हैं वह मेरे सवाल को
दीवानगी कहते हैं वो मेरे सलाम को !

गज़लसाज़ कहता नज़्म तेरे हुस्न पे
नज़र अंदाज़ करोगे किस कलाम को !

रोना या हंसना दोनों सूरतों में छलकें
पहचान गए तेरी तो नज़रें जमाल को !

बैठोगे कब तक तुम आयने के सामने
संवारोगे और कितना हुस्ने-बबाल को !

मुन्तजिर है तेरी मुख़्तसर सी ज़िंदगी
जाने न दूंगा खाली मैं इश्के-गाम को !

कुछ ख़ुशी तो लायी रौशनी ‘मिलन’
शायद सुकूँ मिले अब मेरे ख़याल को !!

मिलन “मोनी”

Hayaat

1 Dec

कैसी हयात से खुदा ने हमें नवाज़ा है
इस घर में खिड़की न कोई दरवाज़ा है

कौन मेरा जख्मे दिल देख पायगा अब
के मेंरा गम आज कितना तरोताज़ा है

शब ढलते ढलते खुदही जल जाउंगा मैं
इन चरागों का भी तो यही अन्दाजा है

वो एक सफर एक इम्तेहां एक मंजिल
वक़्त का आखिर यही एक तकाजा है

खुद अपने कंधों पर उठा रहा ‘मिलन’
कोई और नहीं मेरा अपना जनाज़ा है !!

मिलन “मोनी”Hayaat

Dhleez

25 Nov

तुम्हें अपनी छत से निहारा करेंगे
तुम्हें चाँद कह करके पुकारा करेंगे

दिल की दहलीज़ पर बैठा के तुझे
रात तन्हा साथ तेरे गुज़ारा करेंगे

दिन भर की गहमा-गहमी के बाद
तेरा हुस्न चांदनी से संवारा करेंगे

घटाओं में अक्सर मुस्काता है जो
आज दिल से उसका नज़ारा करेंगे

पलकों के अपने यह घूंघट उठाओ
हम तन्हाई कब तक गवारा करेंगे

माने नहीं जो एक बार में ‘मिलन’
तो परेशाँन तुम्हें हम दोबारा करेंगे !!

मिलन “मोनी”

Dost

13 Nov

तुम दिल में मुझे बसा कर देखो
ख़्वाबों में मुझको सजा कर देखो !!

जहाँ जाओगे मैं ही नज़र आउंगा
गुल मोहब्बत का खिला कर देखो !!

अंधेरों में एक नया खवाब सजाऊं
इन चरागों को ज़रा बुझा कर देखो !!

खाली कमरों में सुकूं नहीं मिलता
मेरी तस्वीर तो कहीं लगा कर देखो !!

नफरत की सब दीवारें गिर जायेगी
दुश्मन को भी दोस्त बना कर देखो !!

अक्स ‘मिलन’ साफ़ नज़र आयेगा
आयनों से धूल ज़रा हटा कर देखो !!

मिलन “मोनी”

Maahtaabi

9 Nov

नाशाद दिलों पे जैसे जादूगरी हो गयी
वो जो मुस्कुराए तबीयत हरी हो गयी !

अब ज़िन्दगी से मुझे खौफ होता नहीं
गहरी मौत से जो दोस्ती मेरी हो गयी !

चन्द लम्हे क्या गुजरे हैं बिना आपके
ऐसा लगता है जैसे एक सदी हो गयी !

चाँद घटाओं से बाहर जो निकला अभी
तब माहताबी खुदबखुद शायरी हो गयी !

जो देता रहा है वक़्त हर वक़्त मुझको
शायद उसे भी वक़्त की कमी हो गयी !

बांटे हैं ‘मिलन’ ग़म ज़मानों के हमनें
क्योकि महंगी बड़ी अब ख़ुशी हो गयी !!

मिलन “मोनी” ९/११/२०१७

Darde-Dil

31 Oct

आपको क्या मिला रुलाने में
मुझे हाले-दर्दे-दिल सुनाने में !

छलके आँख से तब वो मोती
छुपे हुए थे जो इस खजाने में !

किस कद्र गुजरा सफर तनहा
निकली हर रात ये भुलाने में !

उनकी कमी ने सोने ना दिया
जागते रहे सितारे मिलाने में !

बात बड़ी ही छोटी थी फिर भी
लग गयी उमर एक बताने में !

परेशान बहुत हो गए ‘मिलन’
ज़ख्म अपने खुदसे छुपाने में !!

मिलन “मोनी”