Archive | December, 2016

Dekhiye Aa Kar

25 Dec

प्यार के मौसम बिछे हैं देखिये आ कर
हर तरफ गुलाब खिले हैं देखिये आ कर

नयी कोपलों पर गिरे जो ओस के मोती
शबनम के गहने सजे हैं देखिये आ कर

जिन सितारों के नगर में रह रहे हैं हम
कुछ कंटीले तार बिछे हैं देखिये आ कर

होंते पुराने या नए कुछ फर्क नहीं पड़ता
ज़ख्म सब के सब हरे हैं देखिये आ कर

जितना ऊंचा आसमां है उतने थे अरमां
उम्मीदों के पंछी जले हैं देखिये आ कर

जो किये हमने तेरी चाहत में ‘मिलन’
कर्म वो कितने फले हैं देखिये आ कर !!

मिलन “मोनी”

Sitamgar

19 Dec

नयन तुम्हारे नश्तर से
दिल पे लागे खन्जर से

हमभी कोई कम नहीं थे
सहे हर वार सिकन्दर से

एक ग़लतफहमी थी बस
होगए वो रिश्ते जर्जर से

उड़े पत्ते शाखों से झडके
हवाओ के तेज़ बवंडर से

कितने ही जंग जीते पर
जीता न कोई मुक़द्दर से

उसे पानी कितना चाहिए
है पूछा कभी समन्दर से

बचके रहना तुम मिलन
इनके जैसे सितमगर से !!

मिलन “मोनी”

Chhale

17 Dec

कुछ दर्द जो इस दिल के अश्कों में ढाले हैं
ज़िन्दगी का तमाशा यहाँ सब देखने वाले हैं

झूठी है यहाँ दुनिया सब झूठे ही फ़साने हैं
सच्चाई के होठों पर हर सिम्त ही ताले हैं

हर फन ही तैयार है डसने के लिए हमको
आस्तीनों में हमने शायद सांप ही पाले हैं

ख़्वाबों के घरों के हर कोने में हैं मकड़ियां
उम्मीद के झरोखे पे बस जाले ही जाले हैं

इस ज़माने के अंधेरों से इनको तो बचाना
नौनिहाल हमारे जो सब कल के उजाले हैं

मुस्किल में’मिलन’ये रास्ता नहीं मिलता
शायद मेरे मुक़द्दर के पाँव में ही छाले हैं !!

मिलन “मोनी”

Kuch Alag Si

15 Dec

अब ज़िन्दगी लगती है कुछ अलग सी पहले से
हरेक धड़कन लगती है कुछ अलग सी पहले से

इत्र न जाने कौन सा पहन के गुजरी है महजबीं
हवा में महक लगती है कुछ अलग सी पहले से

एक नए ही अंदाज़ में उसने गायी अपनी गज़ल
मेरे दिल पे असर करी कुछ अलग सी पहले से

इशारों ही इशारों में समझा गए दिल के हालात
आँखोंने फिर बात कही कुछ अलग सी पहले से

एक अंजाने रोमांच से थिरक उठा तन मन मेरा
लबों पे जो प्यास जगी कुछ अलग सी पहले से

खिली कली तो भवरों ने बजा दी मधुर शहनाई
बर्ख़ा में भी कसक उठी कुछ अलग सी पहले से

यकीन नही हुआ कानों को मेरे सुनकर ‘मिलन’
प्रेम से कोई बात कही कुछ अलग सी पहले से !!

मिलन “मोनी”

Zaruri To Nahi

1 Dec

दिल टूटने का इज़हार ज़रूरी तो नहीं
यह तमाशा सरे आम ज़रूरी तो नहीं

आज भी मुझे इश्क है तेरी रूह से ही
जिस्म से कोई सरोकार ज़रूरी तो नहीं

हुस्न ज़रा झांक तो ले मेरी आँखों में
जुबां से ही हो इज़हार ज़रूरी तो नहीं

किस के इश्क में जितनी हो दीवानगी
खवाबों में भी इंतज़ार ज़रूरी तो नहीं

जिस रास्ते गुजरें हम उसी रास्ते पर
हो जाये मुलाक़ात यह ज़रूरी तो नहीं

मुझे लुभाने की खातिर ‘मिलन’ तेरा
हर वक़्त सोलह श्रृंगार ज़रूरी तो नहीं !!

मिलन “मोनी”