Archive | July, 2016

Dare Dare

29 Jul

अश्क आँखों में भरे भरे से लगते हैं
जख्म आज तक हरे हरे से लगते हैं

शहर में किसी की आवाज़ नहीं आती
अपने सभी दोस्त परे परे से लगते हैं

पलकों पर ठहर नहीं पाती हैं उम्मीदें
सपने सारे हमारे धरे धरे से लगते हैं

मिलता नहीं सुकूंन फरेबे ज़िन्दगी में
अहसास अबसब मरे मरे से लगते हैं

फिर कोई हादसा ना हो जाए’मिलन’
दिल अभी हमारे डरे डरे से लगते हैं

Kaun Dekhta Hai

18 Jul

खण्डहर और वीरान कौन देखता है
पुराना पड़ा अखबार कौन देखता है

कुछ नफ़ा हो इसमें या हो नुक्सान
दिलों के बीच व्यापार कौन देखता है

खिलोने मिटटी के तैयार हैं बन कर
अब बारिष के आसार कौन देखता है

तूफानी हवाएँ बहा ले जाएँ कश्तियाँ
ऐसे हालात में पतवार कौन देखता है

उन्हें जीतने की जब मिल जाए ख़ुशी
ज़ख्मों के फिर निशान कौन देखता है

कुछ काम अंधेरों के लिए ठीक होते हैं
ऐसे में सूरज की आस कौन देखता है

शिकवे गिले मिटा के गले लगे मिलन
फिर गुज़रे हुए लम्हात कौन देखता हैं

मिलन “मोनी”

Bahut Aasaani Se

18 Jul

ढूंढना मुझे,
मिल जाउंगा
बहुत आसानी से !
संभालना मुझे
वरना
निकल जाउंगा
कहीं दूर
बहुत आसानी से !!१

सारे अपने
गिले शिकवे
भूल जाउंगा
बहुत आसानी से !
वरना
याद न आउंगा
किसी को
बहुत आसानी से !!२

दिल में बसा लेना
समा जाउंगा
बहुत आसानी से !
वरना
नज़र से ओझल
हो जाउंगा
बहुत आसानी से !!३

गुलाब हूँ
खिल जाउंगा
बहुत आसानी से !
तेरी जुल्फों में
सज जाउंगा
बहुत आसानी से !
सिर्फ नज़रों से
छूना मुझको
वरना
बिखर जाउंगा
बहुत आसानी से !!४

प्यार का एक
एहसास हूँ
निभाना मुझसे
वरना
खाक में
मिल जाउंगा
बहुत आसानी से !
चैन हूँ
किसी को
मिलता नहीं
बहुत आसानी से !!५

अगर चाहो तो
आजमाना
मिल न पाउँगा
बहुत आसानी से !
अश्क हूँ
पलकों से
बह जाउंगा
बहुत आसानी से !!६

नदी हूँ
निरंतर
बहता जाउंगा
बहुत आसानी से !
समुंदर में
आखिरकार
समा जाउंगा
बहुत आसानी से !!७

हवा हूँ
सुगंध बन कर
उड़ जाउंगा
बहुत आसानी से !
झूमते गाते
पत्तों से पूछ लेना
जब चाहें मेरा पता
बता देंगे तुझको
बहुत आसानी से !!८

आसमान हूँ
समा लेता हूँ
ये सूरज
ये चाँद
और सारे
सितारे
बहुत आसानी से !
वक़्त के साथ
मौसम के साथ
रंग बदल जाउंगा
बहुत आसानी से !!९

फिरभी
एक बार तो
ढूंढना मुझे,
मिल जाउंगा
बहुत आसानी से !!१०

Shabe-Hayaat

10 Jul

न गुल खिले न गुलशन सजे न बहार आई है
कितनी वीरानियाँ लेकर ये शबे-वस्ल आई है

न साज़ उठे न राग बनी न गज़ल कह पाई है
कितनी तन्हाइयाँ लेकर ये शबे-जश्न आई है

न महफिलें सजी न जाम उड़े न होश गवाएं हैं
कितनी खामोशियाँ लेकर ये शबे-बज़्म आई है

न बादल छाये न बिजली चमकी न पानी बरसा
कितनी आराइशों के साथ ये शबे-अश्क आई है

न चाँद निकला न तारे बिखरे न सर्द हवा चली
कितनी रानाइयों के साथ ये शबे-बारात आई है

न ताल न सरोवर न नदी न झरना और न मेघ
गज़ब की प्यास लेकर आज शबे-हयात आई है

न नींद आयी न करार आया न याद आयी तेरी
कितनी बेक़रारियाँ लेकर ये शबे-इंतज़ार आई है

न वादा किया न मुकर्र वक़्त न चाहते “मिलन”
कितनी आश्नाइयाँ साथ लेके शबे-मीराज़ आई है

मिलन “मोनी”

Khilona

5 Jul

प्यार बिना हर रिश्ता मानो समझौता है
बीच भंवर जैसे बिना माझी की नौका है

मिट्टी का बुत तो कभी कांच का पुतला
इंसान बस तकदीर के हाथों खिलौना है

जो चाहा मिला नहीं मिला वो चाहा नहीं
बसर ऐसी ज़िन्दगी खुद ही एक सौदा है

आसमा से ऊंचा कभी पाताल सा गहरा
सुख दुःख ही इसका तकिया बिछौना है

तलब ऐसी कि बसा लें साँसों में अपनी
तू ही मेरे जीवन में बढ़ने का मौक़ा है

जिसको चाहे उसको ही सताता ‘मिलन’
इंसान का असली चेहरा बेहद घिनौना है

मिलन “मोनी”