Archive | June, 2014

Khil Rahe Hain Phool

4 Jun

खिल रहे हैं फूल 

 

 

खिल रहे हैं फूल यहाँ, डाल डाल पर,

आज है बहार ही, बहार ज़िन्दगी.

मधुप चूसते भँवर, फूल फूल पर,

आज है खुमार ही, खुमार ज़िन्दगी.

आओ प्रिय साथ चलें, झील के किनारे,

ख्वाबों के शहर तलक, बांह थामे थामे,

दे रहे गवाही आज, चाँद और ये तारे,

तुम हुए हमारे, और हम हुए तुम्हारे,

प्यार की महक उठे, प्यार की महक उठे, साँस साँस पर,

आज है बहार ही, बहार ज़िन्दगी. (१)

 

बिन तुम्हारे, मन को तो सुकूं नहीं मिलता,

तू न मुस्कुराए तो, ये दिल नहीं खिलता,

दिल में मीठा मीठा ये, दर्द नहीं पलता,

तेरा जादू, दिल पे मेरे कब नहीं चलता,

होंठ गुनगुना उठें, होंठ गुनगुना उठें, बात बात पर,

आज है बहार ही, बहार ज़िन्दगी. (२)

 

घंट बजें, शंख बजें,  और बजें नगाड़े,

डूबे डूबे प्यार में है, सांझ और सवेरे,

हैं मिलन की चाह में, रात के अँधेरे,

मस्त मस्त पवन, भी करे ये इशारे,

जाम छलछला उठे, जाम छलछला उठे, रात रात भर,

आज है बहार ही, बहार ज़िन्दगी. (३)

मधुप चूसते भँवर, फूल फूल पर,

आज है खुमार ही, खुमार ज़िन्दगी.

 

खिल रहे हैं फूल यहाँ, डाल डाल पर,

आज है बहार ही, बहार ज़िन्दगी.

मधुप चूसते भँवर, फूल फूल पर,

आज है खुमार ही, खुमार ज़िन्दगी.

 

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