Archive | November, 2014

Maloom To Hoga

27 Nov

कहाँ मिलती हैं खुशियाँ, शहर मालूम तो होगा,
तुम्हें दिल में ठहरने का, सबब मालूम तो होगा.

तुम्हें हर बात की अपनी, सही कीमत लगनी है,
किताबे इश्क का तुमको, सबक मालूम तो होगा.

लिखा किस्मत का कुछ, लकीरों से नहीं मिटता,
किधर बनता है दरिया में, भंवर मालूम तो होगा.

हवा चलने से पहले तुम, हवा का रुख पहचानो,
तुम्हें नज़र में आने का, असर मालूम तो होगा.

कहने सुनने से ही शायद, बिगडी बात बन जाए,
दिलों में बात दबाने का ज़हर, मालूम तो होगा.

जहाँ पर फूल खिलते हैं वहीं, गुलशन महकते हैं,
तुम्हें मौसम बदलने का, कहर मालूम तो होगा.

इन आयनों में खुद”मिलन”,अक्स नहीं मिलता,
तुम्हे चेहरे समझने का हुनर, मालूम तो होगा.

कहाँ मिलती हैं खुशियाँ, शहर मालूम तो होगा,
तुम्हें दिल में ठहरने का, सबब मालूम तो होगा.

मिलन ‘मोनी’

Dhoop Ki Tapish

26 Nov
बहुत दूर तक धूप की तपिश है,
बड़ी देर तक का तनहा सफ़र है.
गिरें दीवारें तब तो जा कर पूँछें,
ग़म ज्यादा इधर या के उधर हैं.
दीया कहीं और, कहीं है उजाला,
अंधेरों से भी गया बीता पहर है.
ज़िन्दगी की कीमत क्या रही,
लाशें हैं सस्ती,महगा कफ़न है
मिलती कहाँ वो आबोहवा अब,
मजबूरियों का ये कड़वा ज़हर है.
बहुत दूर तक धूप की तपिश है,
बड़ी देर तक का तनहा सफ़र है.
मिलन ‘मोनी’