Archive | July, 2014

Koi Koi

29 Jul

दिल से दिल मिलाता है कोई कोई.
अपना जां नशीं बनाता है कोई कोई.

हाथों से हाथ मिला लेता है हर कोई,
बातों में बात बना पाता है कोई कोई.

हसीं चेहरे पर फ़िदा होता है हर कोई,
सीरत हसीन बना पता है कोई कोई.

साथ वक़्त के बदल जाता है हर कोई,
पर वक़्त पे नज़र आता है कोई कोई.

बात अफसाना बनाता है हर कोई,
बस तह तक पहुँचता है कोई कोई.

यूँ दोस्त बन तो जाता है हर कोई,
सच्ची दोस्ती निभाता है कोई कोई.

दिल से दिल मिलाता है कोई कोई.
अपना जां नशीं बनाता है कोई कोई.

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Kyon Nahi Jaata

26 Jul

ये डूबा हुआ सितारा, उभर क्यों नहीं जाता,
रिश्ता दो दिलों का, संवर क्यों नहीं जाता.

सितारे से मैंने अपने, सितारों की बात पूछी,
नसीबों का मेरे सूरज, चमक क्यों नहीं जाता.

तनहा गुज़रता हूँ, अब रातें मै वस्ले शब् की,
इशारा कोई नज़र का, उधर क्यों नहीं जाता.

बिखरा हूँ इस कदर के, संभाला न जाऊंगा,
बन कर सुगंध फिर, महक क्यों नहीं जाता,

सर रख के आज उनके, शाने पे सो तो जाऊं,
ये शौके जुनूने आलम, ठहर क्यों नहीं जाता.

ये डूबा हुआ सितारा, उभर क्यों नहीं जाता,
रिश्ता दो दिलों का, सवार क्यों नहीं जाता.

Tum Meri Kavita Ho

25 Jul
मेरे हर शब्द की,

अपनी,
एक अलग कहानी है,
मेरे दर्द की,
अपनी,
एक अलग रवानी है,
और इसलिए,
मै गीतों को,
शब्दों में ढाल,
तुम तक पहुंचा देता हूँ,
और तुम,
नित नए नए साज़ लेकर,
नयी नयी,
राग बुना करती हो,
शायद,
इस ही लिए,
मै कवि नहीं,
जबतक,
तुम मेरी कविता नहीं,
मेरे अंतर्मन की,
परिकल्पना नहीं,
आस की प्यासी कड़ी हूँ,
मै कवि नहीं,
पर तुम,
मेरी कविता हो,
मैंने अपने स्वप्न कणिक को,
जब जब तुम तक
पहुंचाया,
तब तब मैंने तुमको,
उल्लासित ही पाया,
फल स्वरुप,
यह उपचार निकला,
मैं अगर,
कविता बन कर,
तेरे दिल में रहता,
नूतन भावों को चुन चुन कर,
नित गीत नए बनाता,
नैनों के मौन इशारों को,
गतिबध कर देता,
तेरी जितनी मायूसी है,
खुद में समेट लेता,
किसी तरह से भी तुझे,
निराश न होने देता,
जीवन को तेरे,
इन्द्रधनुषी कर देता,
अंकुर नया प्रेम का,
ह्रदय में खिला देता,
दिल की खिड़की खोल प्रिय,
यौवन रस बरसाता,
और तुम,
नए नए स्वप्न सजाकर,
नयी नयी राह चुना करती,
मै अगर,
कविता बनकर,
तेरे दिल में रहता,
तेरे दिल में रहता |

Ek Naya Naam

23 Jul

चलो,
एक नया नाम दें -एक नया नाम दें |

सावन के गीत लिखे,
चैती दोपहर ने,
बासंती फूल खिले,
पतझड़ की शाख़ों पे,
स्वपनीली रातों को,
आलिंगित बाहों को,
यौवन के इस पल को,
एक नया नाम दें -एक नया नाम दें |

संकरी पगडण्डी पर,
बंजारे गीतों को,
पिघले संगमरमर से,
तरशाये यौवन को,
कोमलांगी कलियों को,
फूलों के सौन्दर्य को,
भीगी हुई पलकों से,
मुखरित हुई भाषा को,
एक नया नाम दें -एक नया नाम दें |

बहती हुई सरिता पर,
झुकती हुई डालों को,
चुम्बन की वर्षा से,
भीगे हुए अधरों को,
प्यासे संकेतों से,
उभरे प्रश्नचिन्हों को,
नयनों के आवाहन से,
विचलित हुई साँसों को,
एक नया नाम दें -एक नया नाम दें |

जुल्फों की छाव को,
चेहरे पर पड़ने दो,
अंगूरी शाम को,
प्यालों में ढलने दो,
पाखों को आकाश में,
बेजिझक उड़ने दो,
बर्फीली हर शाम को,
अलसाई सी भोर को,
एक नया नाम दें -एक नया नाम दें |

चलो,
एक नया नाम दें -एक नया नाम दें |

adheer

23 Jul

जानें क्यों ?
फिर हो गए अधीर,
मेरी पलकों के पीछे,
उत्कण्ठित नीर |

मै समझा था,
मेरी व्यथा, मेरी पीड़ा,
अब छोड़ चुकी है साथ,
मेरे मन को नहीं डसेगी,
भूली बिसरी बात,

वैसे तो जीवन मेरा,
बहुत संघर्षमय रहा है,
फिर भी मेरे दिल को कोई,
पश्चाताप नहीं रहा है,

सहता रहा जीवन के,
झंझावातों को हंस कर,
ह्रदय को पाषाण बना कर,
ख्वाबों को साकार बना कर,

मेरी तृष्णा ने आ आ कर,
मेरा संयम तक तोडा,
भौतिक आकर्षणों की तरफ,
मन को बार बार मोड़ा,

पर वासनाओं को मैंने,
कुछ ऐसी सूरत में मोड़ा,
जहाँ,
आग हो, पर जलन ना हो,
याद हो, पर कसक ना हो,
प्यास हो, पर तड़प ना हो,
चोट हो, पर दरद ना हो,

अब कैसे इस पल,
मेरी दुखती रग पर कोई,ख्याल,
अपनी अंगुली रख गया,
मेरे अंतर्मन को कोई भीतर तक,
झंझोड़ गया,

और जाने क्यों आज,
फिर हो गए अधीर,
मेरी पलकों के पीछे,
उत्कण्ठित नीर ||