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Baat Hogi

24 Jul

उसने कहा, दो गज की दूरी होगी बस तब ही बात होगी
मैंने कहा, ऐसी नजदीकियों में भला क्या ही बात होगी !

उसने पूछा, क्या एक कदम की दूरी तो मुनासिब रहेगी
मैंने कहा, दूरियाँ जब तलक दरम्यान हैं नहीं बात होगी !

उसने पूछा, फिर कितना नज़दीक हमें तो आना चाहिए
मैंने कहा, कम से कम दिलों तक आयेगे तो बात होगी !

उसने कहा, दिल में रहकर भी कभी दूरियाँ बढ़ जाएँ तो
मैंने कहा, अपनी हर मजबूरी मिट जाए तभी बात होगी !

वो दिल में आए बैठे और अभी आते हैं कहकर चले गए
तब से हम इंतज़ार में बैठे हैं कब आयेगे कब बात होगी !

दिलों के दरम्यान रिश्तों का भी अपना दर्द होगा ‘मिलन’
कभी टूटने की बात होगी तो, कभी जोड़ने की बात होगी !!

मिलन “मोनी”

७/५/2002

Mai Aur Tu

13 Feb

जीवन अनंत आनंद है
सागर मैं,और किनारा तू,
जीवन मिलन विछोह है
मुसाफिर मैं,सहारा तू !

जीवन चिर गतिमय है
रास्ता मैं, मंजिल तू,
जीवन गुलदस्ता है,
पुष्प मैं, खुशबू तू!

जीवन एक बहाव है
कश्ती मैं, नदिया तू,
जीवन सावन माह है
बादल मैं, बरखा तू!

जीवन एक दीवाली है
दीपक मैं, बाती तू,
जीवन उतार चढ़ाव है
पर्वत मैं, झरना तू!

जीवन स्वप्न सलोना है
नींदें मैं, सपना तू,
जीवन रैन बसेरा है
पंछी मैं, बसेरा तू !

जीवन एक उजाला है
सूरज मैं, लाली तू,
जीवन चाँद सितारा है
सवेरा मैं, सांझ तू !

जीवन महका महका है
माली मैं,बगीचा तू,
जीवन एक ज़ज्बात है
शायर मैं, कविता तू !

जीवन तो उन्माद है
सागर मैं, सुराही तू,
जीवन एक उम्मीद है
प्रयास मैं,आशा तू !

जीवन एक संरचना है
पुरुष मैं, नारी तू,
जीवन आर पार हैं,
बस मैं,और बस तू !!

मिलन “मोनी”

Milan

9 Feb

‘मिलन’ का मिलन
मुबारक हो तुझे
मैं जो मिलूँ तो एक
मिलन मिले तुझे
मिलन ही मिलन
है मुक्कद्दर में तेरे
हर मोड़ पर ‘मिलन’ का
मिलन मिले तुझे !

ज़मीं है और
आसमान है मिलन
प्रेम की चरम
सीमा है मिलन
मिलन ही मिलन
हर दिल में बसा
रब की परम
लीला है मिलन !!

‘मिलन’ की निगाहें
मिलन मांगतीं हैं
‘मिलन’ से मिलन की
दुआ मांगती हैं
मिलन ही मिलन है
जब ‘मिलन’ से मिलन हो,
जुदाई भी ‘मिलन’ से
मिलन मांगती है !!!

मिलन “मोनी” १९६५

Ghri Neend

29 Nov

गहरी नींद से कोई, यूँ ही तो नहीं जागा होगा !
उसका कोई सपना, टूट कर कहीं बिखरा होगा !!

छू छू कर निकल गयीं
साहिलों को कश्तियाँ,
गहरे कोहरे से ढक गईं
दिल अज़ीज़ घाटियाँ,
उम्मीदों से कोई नाउम्मीद
यूँ ही नहीं होता होगा,
उसका कोई अपना ही, उससे रूठ गया होगा !

समय की गर्द से ढका फर्श
परछाइयाँ कहाँ तक छुपा पायगा,
सूखे होंठों के भी गीले निशाँ
रुखसारों से कोई कैसे मिटा पाएगा,
उसके ख़्वाबों को ही कोई
मसल, कुचल गया होगा,
अजनबी भी कोई अपना सा, ऐसे तो नहीं लगता होगा !

पानी में कोई अक्स ढूंढती
लहरें तक चुप नहीं बैठेंगी,
साँसों तक महक ख्वाबों की,
कभी न कभी तो पहुंचेगी,
एक अंधा तूफ़ान भीतर तक,
सब उथल पुथल मचा गया होगा,
गीत पुराना भी कोई, मन न बहला पाया होगा !

बर्फीली हवाओं की तपन
कंपकंपा जायेगी सारा तन,
इन बाहों में अगर इस पल
समा जाएगा तू सजन,
आँसू कोई आँख से बस
यूँ ही नहीं फिसला होगा,
ख़याल उनका भीतर तक दिल दहला गया होगा !

गहरी नींद से कोई, यूँ ही तो नहीं जागा होगा !
उसका कोई सपना टूट कर कहीं बिखरा होगा !!

मिलन “मोनी”

Zindagi

17 Jun

जाने वाले वापस लौटने का कुछ ग़म न कर
नज़र फेर फिर दुबारा देखने का गम न कर !
राह में आए हुए तमाम काँटों से क्यों डर गए
जब चुभ ही गए हैं तो भटकने का गम न कर !!१!!

वो जी कर क्या करेगा जिसे जीने का अरमां नहीं
वो प्यार क्या करेगा जिसे ज़िन्दगी से प्यार नहीं !
कोई हंसते हुए जीता है तो कोई हँसते हंसते मरता
वो कहाँ जाएगा दुनिया में जिसकी कोई डगर नहीं !!२!!

सपना तो आखिर सपना है हमेशा सच नहीं होता
साया आखिर साया ही है गमख्वार तो नहीं होता !
गुनाहगार तो गुनाहगार होता ही है हमेशा लेकिन
हरेक गुनाहगार का आँचल तो दागदार नहीं होता !!३!!

दुनिया किसी को कभी बहुत ऊंचा उठाती नहीं है
इंसान की इंसानियत ही उसकी मददगार होती है !
ऊंचा उठता है वही इंसान जो ठोकरें तक खाता है
क्योंकि कुछ ठोकरें इंसान को चलना सिखाती हैं !!४!!

इंसान तो वह है जो खुद अपने को पहचान जाए
अपने आसुओं को पीकर दूसरों को ख़ुशी दे जाए !
खुद ब खुद ज़िन्दगी की राहें तो बनती नहीं कभी
इंसान वही है जो मुश्किलों में सरल राह बना जाए !!५!!

शूल तो आखिर शूल है कोई खिला पुष्प तो नहीं है
दीवार आखिर दीवार ही है कोई मंजिल तो नहीं है !
इस ज़िन्दगी की ओर भी ज़रा देख तो लो दोस्तों
यह दो घडी की ज़िन्दगी दोबारा मिलती भी नहीं है!!६!!

बस एक रंग से भी कभी कई कई तस्वीर बनती है
एक लकड़ी भी किसी के लिए एक पतवार बनती है !
पैरो तले कुचले गए इंसान से भी कभी कभी दोस्तों
आज बरसों पुरानी बिगड़ी सही पर वो बात बनती है !!७!!

जब भी रात आती और प्यासी प्यासी गुज़र जाती है
अब सहर भी आती है और तनहा तन्हा गुज़र जाती है !
कोई हंस कर गुज़ार देता है और कोई रोते रोते बिताता
बस इसी तरह हंसते रोते सारी ज़िन्दगी गुज़र जाती है !!८!!

ज़िन्दगी के साज़ पर सुरीली गज़ल तो गा सकते नहीं
ग़मों के सागरों में यूँ डूब डूब कर भी तो जी सकते नहीं !
अधर कपकपाते रहगए गीत गुनगुना तक ना सके हम
ज़िन्दगी जो गयी हाथ से तो वापस उसे ला सकते नहीं !!९!!

दुनिया भर की मुश्किलें इंसान के दिल को आज़माती हैं
ज़िन्दगी की हर ख़ुशी इंसान की मजबूरियाँ आज़माती हैं !
इस सिसकती ज़िन्दगी को तो डबडबाई नज़रों से ना देखो
यहाँ हर वक़्त नज़र इंसान की इंसानियत ही आजमाती है !!१०!!