Gulaab Nahi Hota

25 May

माना के उसकी महक का कोई जवाब नहीं होता
यह सच है काँटों बिना कोई भी गुलाब नहीं होता !

हुस्न उसका लाजवाब और बेमिसाल है लेकिन
शरारत और नखरे बिना कोई शबाब नहीं होता !

नशीली है नज़र उसकी नशीली है हर एक अदा
बदमस्त न कर दे जब तक वो शराब नहीं होता !

कातिल न बनें जब तक हुस्न के जलवे हज़ारों
ऐसी रौशनी के बिना कभी आफताब नहीं होता !

कुछ घूँट पीकर जामें मोहब्बत के भी ज़िंदा रहें
कोई नाम दो उसे पर सागरे ज़हराब नहीं होता !

क़यामत न कर दे दिल के आसमा पर ‘मिलन’
चेहरा वह दिलरुबा का कोई महताब नहीं होता !!

मिलन “मोनी”

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