Gazal Hai

17 Mar

गा कर देखिये तो खूबसूरत ग़ज़ल है ज़िन्दगी
अपने हर इरादों पे बिलकुल अटल है ज़िन्दगी !

रही मोहब्बत इसकी रूहे-जान शान हमेशा ही
और नहीं इश्क-मोहब्बत तो गरल है ज़िन्दगी !

ना उपहार ना तिजारत और ना ब्याज है कोई
सारी दौलत परखो तो खाली असल है ज़िन्दगी !

मालिक की बनायी एक अज़ीमों-तरीम शय है
कबसे कायनात की बुनयादी अज़ल है ज़िन्दगी !

कोयले की खान जैसे काले यहाँ तन और मन
हर काली अँधेरी रातों में भी धवल है ज़िन्दगी !

चारों तरफ छितराए हैं जटिलता के घने बादल
उस पे भी मुस्कुराती कितनी सरल है ज़िन्दगी !

मुश्किलों में इंसान ने जब इसे कोसा’मिलन’
बन्द मुठ्ठी से भी फिसले वो तरल है ज़िन्दगी !!

मिलन “मोनी”

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