Baat Hogi

24 Jul

उसने कहा, दो गज की दूरी होगी बस तब ही बात होगी
मैंने कहा, ऐसी नजदीकियों में भला क्या ही बात होगी !

उसने पूछा, क्या एक कदम की दूरी तो मुनासिब रहेगी
मैंने कहा, दूरियाँ जब तलक दरम्यान हैं नहीं बात होगी !

उसने पूछा, फिर कितना नज़दीक हमें तो आना चाहिए
मैंने कहा, कम से कम दिलों तक आयेगे तो बात होगी !

उसने कहा, दिल में रहकर भी कभी दूरियाँ बढ़ जाएँ तो
मैंने कहा, अपनी हर मजबूरी मिट जाए तभी बात होगी !

वो दिल में आए बैठे और अभी आते हैं कहकर चले गए
तब से हम इंतज़ार में बैठे हैं कब आयेगे कब बात होगी !

दिलों के दरम्यान रिश्तों का भी अपना दर्द होगा ‘मिलन’
कभी टूटने की बात होगी तो, कभी जोड़ने की बात होगी !!

मिलन “मोनी”

७/५/2002

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2 Responses to “Baat Hogi”

  1. Priya July 24, 2017 at 12:58 pm #

    Kya khoob likha h aapne……

    • milanbhatnagar July 26, 2017 at 4:43 am #

      शुक्रिया प्रिया जी

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