Magroor

23 Jul

आज आया, तो कल जाना ज़रूर है
वक़्त के हाथों वक़्त तक मजबूर है !

जितना मिला, हम उसी में खुश हैं
फैसले नसीबों के सब हमें मंज़ूर हैं !

मोहब्ब्त तो हम सबसे ही करते हैं
फिर जाने क्यों बेवफा में मशहूर हैं !

ये उनकी कातिल अदा का असर है
के मुझ पर उनके हुस्न का सुरूर है !

तुम साथ हो मेरे इतना क्या कम है
इसलिए अपने मुकददर पर गुरूर है !

जो हासिल किया छोड़ना है ‘मिलन’
इंसान किस बात के लिए मगरूर है !!

मिलन “मोनी”

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3 Responses to “Magroor”

  1. Priya July 23, 2017 at 7:45 am #

    Bahut sunder likha h aapne
    Lagta h kafi gaharai se likha h

    • milanbhatnagar July 24, 2017 at 2:45 am #

      शुक्रिया प्रिया जी

    • milanbhatnagar August 11, 2017 at 5:00 am #

      शुक्रिया आपको पसंद आया

      ________________________________

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