Aas Ke Siva

13 Jul

मुझमें कुछ बचा नहीं तेरी याद के सिवा
मेरा जिस्म रहा नहीं गरम राख के सिवा !

दिल की धडकनें रुक रुक कर कहतीं रहीं
और क्या चाहिए एक मुलाक़ात के सिवा !

जाने कितने समंदर ठहर गए पलकों पर
नज़र को क्या चाहिए तेरे दीदार के सिवा !

कितने दिन गुज़र चुके तेरी हाँ के खातिर
कुछ नहीं चाहा था मैंने एक रात के सिवा !

आगाज़ हुआ जहाँ था अंजाम वहीँ है मेरा
मुझे जाना कहीं नहीं है तेरे गाँव के सिवा !

सरे-बिस्तरे-मर्ग तेरा नाम आया मिलन
प्यार को क्या चाहिए तेरी आस के सिवा !!

मिलन “मोनी”

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