Nahi Chaahiye

15 Jun

सहानुभूति का बोझ उठाना नहीं चाहिए
किसीको अपना दर्द बताना नहीं चाहिए

तंजों में नमक लेकर मिलते हैं दुश्मन
ज़ख्मेदिल सबको दिखाना नहीं चाहिए

भरोसा शूलों का नहीं कब फूलों में मिलें
गुलाब राहों पे भी बिछाना नहीं चाहिए

धुंधला जायेगी तुम्हारी नजर रोते रोते
आंसुओं को बेसबब बहाना नहीं चाहिए

रास्ते के लिए सामान संभालना पडेगा
प्यार में सभी कुछ लुटाना नहीं चाहिए

चार दिनों के बाद अँधेरी रात हो जायगी
दाव चांदनी पे कोई लगाना नहीं चाहिए

आत्मा तक भटक जाती है ‘मिलन’यहाँ
ज्योतिषी को हाथ दिखाना नहीं चाहिए !!

मिलन “मोनी”

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2 Responses to “Nahi Chaahiye”

  1. Priya June 19, 2017 at 1:15 pm #

    Soooo nice poem…

    • milanbhatnagar September 22, 2017 at 12:04 am #

      शुक्रिया

      ________________________________

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