Kamaal Karti Hai

6 Jun

नज़र तुम्हारी क्या क्या कमाल करती है
ज़िन्दगी जाने क्या क्या सवाल करती है

ये हुस्न की शम्मा जब कहीं पे जलती है
कितने परवानों की जान हलाल करती है

जाने अन्जानें कुछ भी कहती है वह फिर
अपनी कही हुई बात पर मलाल करती है

बयार कभी बारिष तो कभी आंधी तूफ़ान
चलती हवा भी क्या क्या बबाल करती है

लहरा लहरा कभी रुखसारों पे बिखरती है
रात जुल्फें तेरी क्या क्या जवाल करती है

उबटन कभी लाली कभी काजल औ बिंदी
हसीना रूप का क्या क्या ख़याल करतीं हैं

अदाएं तुम्हारी हो गयी कातिलाना’मिलन’
हरएक अंगडाई मेरा जीना मुहाल करती है !!

मिलन “मोनी” ६/५/२०१७

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One Response to “Kamaal Karti Hai”

  1. Priya June 14, 2017 at 12:16 pm #

    Sooo nice… Nd awesome poems.

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