Dharti Umber

26 Apr

यादों में वो लम्हे बसे हों पहली पहली बार
राहों में हम तुम मिलें हों पहली पहली बार

पिघल के मेरी बाहों में समाये तुम ऐसे कि
धरती अम्बर मिल रहें हो पहली पहली बार

पतझर का मौसम भी देखो लग रहा है जैसे
मुस्कानों के फूल खिले हों पहली पहली बार

दिल के बागीचे में तेरे पाँव पड़े तो यह लगा
कलियों से ही बात हुई हो पहली पहली बार

तेरी मस्त निगाहों के जो चढ़ाये हमने जाम
मयखानों में धूम मची हो पहली पहली बार

इश्क के अँधेरे उजाले से गुज़रे तो यह लगा
बरसातों में धूप खिली हो पहली पहली बार

तुमने अपने हाथों में जो लिया था मेरा हाथ
हर सपना साकार हुआ हो पहली पहली बार

करके वादा मिलन का जब न पहुंचे ‘मिलन’
लगा के रब ही रूठ गया हो पहली पहली बार !!

मिलन “मोनी”

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