Dastan

6 Apr

अपनी तन्हाई को राजदार बना लिया हमने
दरो दीवार को ही हमराज़ बना लिया हमने

दर्देदिल का अहसास भी न होने दिया उनको
एक समन्दर सा आँखों को बना लिया हमने

डरता नहीं मैं उनकी निगाहें कातिल से कभी
अपने कदम को सरेमर्ग तक बढा लिया हमने

ज़िन्दगी के जख्मों को अपने सीने में छुपाके
उनको दर्दे दिले का मरहम बना लिया हमने

उठ कर कौन जाए मयखाने तक शामो-सहर
अपना बिस्तर तक मयकदा बना लिया हमने

दिल के राज़ बतलाने तो थे बहुत से ‘मिलन’
अपनी धडकनों को दासतान बना लिया हमने !!

मिलन “मोनी”

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