Dekhiye Aa Kar

25 Dec

प्यार के मौसम बिछे हैं देखिये आ कर
हर तरफ गुलाब खिले हैं देखिये आ कर

नयी कोपलों पर गिरे जो ओस के मोती
शबनम के गहने सजे हैं देखिये आ कर

जिन सितारों के नगर में रह रहे हैं हम
कुछ कंटीले तार बिछे हैं देखिये आ कर

होंते पुराने या नए कुछ फर्क नहीं पड़ता
ज़ख्म सब के सब हरे हैं देखिये आ कर

जितना ऊंचा आसमां है उतने थे अरमां
उम्मीदों के पंछी जले हैं देखिये आ कर

जो किये हमने तेरी चाहत में ‘मिलन’
कर्म वो कितने फले हैं देखिये आ कर !!

मिलन “मोनी”

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