Kuch Alag Si

15 Dec

अब ज़िन्दगी लगती है कुछ अलग सी पहले से
हरेक धड़कन लगती है कुछ अलग सी पहले से

इत्र न जाने कौन सा पहन के गुजरी है महजबीं
हवा में महक लगती है कुछ अलग सी पहले से

एक नए ही अंदाज़ में उसने गायी अपनी गज़ल
मेरे दिल पे असर करी कुछ अलग सी पहले से

इशारों ही इशारों में समझा गए दिल के हालात
आँखोंने फिर बात कही कुछ अलग सी पहले से

एक अंजाने रोमांच से थिरक उठा तन मन मेरा
लबों पे जो प्यास जगी कुछ अलग सी पहले से

खिली कली तो भवरों ने बजा दी मधुर शहनाई
बर्ख़ा में भी कसक उठी कुछ अलग सी पहले से

यकीन नही हुआ कानों को मेरे सुनकर ‘मिलन’
प्रेम से कोई बात कही कुछ अलग सी पहले से !!

मिलन “मोनी”

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One Response to “Kuch Alag Si”

  1. Astha gangwar December 15, 2016 at 9:19 am #

    बेहतरीन….

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