Laga Bahut

18 Nov

आयने में अक्स जो अंजाना लगा बहुत
रास्ते में शख्स वही पहचाना लगा बहुत

मैंने देखा उसने देखा अपनी राह होलिए
ये नुख्सा भी कुछ आजमाया लगा बहुत

दर्दे-दिल से या इस दिल से मुहब्बत का
दोनों से अपना पुराना याराना लगा बहुत

बेवजह नज़रों का कुछ बहकना मचलना
मर्ज़ यह नज़ाक़त का दीवाना लगा बहुत

साथ उनके चलना लडखडाना संभालना
मुश्किल वक़्त को आजमाना लगा बहुत

उठ कर गिरना और गिर कर उठना सही
लहरों का साहिल से टकराना लगा बहुत

हसीन मौसम में आज तेरा गुनगुनाना
चिड़ियों सा बाग़ में चहकना लगा बहुत

अजनबी रिश्तों की यह अजनबी दुनिया
एक ही था चेहरा जो पहचाना लगा बहुत

शोख हवाओं से शर्माके सकुचाके अच्छा
बाहों में आपका सिमट जाना लगा बहुत

जानकर दिल को तसल्ली मिली ‘मिलन’
पसन्द आपको मेरा नजराना लगा बहुत !!

मिलन “मोनी”

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