Dekhte Reh Gaye

4 Oct

कब जवानी ढली देखते रह गए
कब उम्र हो चली देखते रह गए

मुस्कुरा के मेरे करीब से निकल
हुस्न की वो कली देखते रह गए

वो आए इधर औ कब चल लिए
हम वो खाली गली देखते रह गए

उनके तेवर बदले नहीं आज भी
हमतो रस्सी जली देखते रह गए

क्या कातिल अदायें रही आपकी
हम वो सूरत भली देखते रह गए

वो आने का कह के भी आए नहीं
हम बेसबर से घडी देखते रह गए

मेरे ख़त जो जलाए हैं उनमें अभी
तेरी तस्वीर जली देखते रह गए

मौत सजके चली गयी जो मिलन
राख यादों की जली देखते रह गए !!

मिलन “मोनी”

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2 Responses to “Dekhte Reh Gaye”

  1. SelfRachit October 6, 2016 at 1:45 am #

    Bahut khubsurat…

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