Iqraar Ki Baaten

27 Sep

चलो छोड़ो पुरानी सब अभी तकरार की बातें
कभी चाकू कभी खंजर कभी तलवार की बातें

मोहब्ब्त से जियो सारे गले मिलकर रहो सारे
भले ही दूरियाँ हो लेकिन करो दीदार की बातें

सुकूनो-शौक से आकरके मयखानों में तुम बैठो
इन प्यालों को टकरा कर करो झंकार की बातें

कुछ दिन का सफर है कुछ दिन की जवानी है
चलो करलें मिल के कुछ लबो रुखसार की बातें

बिखरने दो ज़रा जुल्फें हंसीं चेहरे पे आआ कर
फलक पर चाँद सूरज करें मेरे दिलदार की बातें

मंदिर में करो पूजा या के मस्जिदों में करो वजू
फैलाओ दोनों जगह हर दम ही संस्कार की बातें

पुरानी हो गयीं तस्वीर’मिलन’ तन्हाई भरी रातें
मैं सुनने को बहुत बेचैन हूँ तेरी इकरार की बातें

मिलन “मोनी”

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