Swbhaav Hai Bhai

8 Sep

हर सिम्त एक नया घाव है भाई,
ज़िन्दगी धूप और छाव है भाई !

बात बात पे मन मुटाव है भाई,
किस तरफ यह झुकाव है भाई !

साहिलों का कोई निशाँ नहीं,
किस भँवर में नाव है भाई !

बात दिल की उन्हें कैसे कहूं,
पास कोई सुझाव है भाई !

कैसे बीतेगी चैन से ये उमर,
बातों बातों में तनाव है भाई !

धूप में भी तपन नहीं लगती,
माँ के आँचल की छाव है भाई !

दोस्त ही दोस्ती का दुश्मन है,
कैसा मन-मुटाव है भाई !

डूबे जाते हैं प्यार में उनके,
कैसा ये खिचाव है भाई !

तुझसे मिलके ख़ुश है ‘मिलन’
ऐसा मेरा स्वभाव है भाई !!

मिलन “मोनी”

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