Zara Si Baat

24 Aug

छलकते रहें ये पैमाने और गुलाबी रात हो
बात हो तो सिर्फ उनकी नज़रों से बात हो

भीग रहा हो चांदनी से ये नूरे बदन उनका
दिल के आसमांन से इश्क की बरसात हो

पलक झपकते ही मिट जाएँगे अन्धेरे सारे
तेरे हुस्न का सूरज अगर सफर में साथ हो

बना देगी यह दनिया हरबार बड़ा अफ़साना
हमारी नज़र में शायद वह ज़रा सी बात हो

दिल हार जाने में ही शायद जीत है मिलन
तन्हाईयाँ हों मगर उनकी बाहों में शाम हो

मिलन “मोनी”

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2 Responses to “Zara Si Baat”

  1. Astha gangwar poetries blog August 24, 2016 at 5:04 am #

    Nice poem

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