Inayat

16 Aug

मिलो न मिलो हम शिकायत न करेंगे
बेबफाई की भी हम हिमायत न करेंगे

पालपोस कर सीने में बड़ा किया जिसे
उस ग़म की भी हम तिजारत न करेंगे

क्यों सब्र का मेरे और लेते हो इम्तेहान
क्यों अब इसकी हम हिफाज़त न करेंगे

तेरे इश्क को ही हमने तो खुदा माना है
किसी और खुदा की हम इबादत न करेंगे

छोड़ देंगे तनहा अब दिल के ख़्वाबों को
और इतनी इनसे हम अदावत न करेंगे

बड़ी आसानी से कहां के भुलादो ‘मिलन’
काफी हो गई और हम इनायत न करेंगे !!

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