Dekha Karte

16 Aug

सभी तिल के दाने में ताड़ नहीं देखा करते
सच्चे दिल छुपने की आड़ नहीं देखा करते

फूलों से प्यार होता है जिन मालियों को वो
बदसूरत काँटों से भरी झाड नहीं देखा करते

अपनी मोहब्ब्तों का इम्तहान देते हर जगह
इश्क वाले सूना और उजाड़ नहीं देखा करते

मंजिल की आरज़ू में निकल पड़ते हैं कदम
रास्तों पे उगने वाले झंखाड़ नहीं देखा करते

देश के लिए कुर्बान होने वाले वीर सिपाही ये
वतन केलिए अपनों का लाड नहीं देखा करते

जिसे चाहिए मदद उसे ही मदद देते हैं’मिलन’
ऐसे रिश्तों में बनावटी ये बाड़ नहीं देखा करते !!

मिलन “मोनी”

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2 Responses to “Dekha Karte”

  1. Astha gangwar poetries blog August 16, 2016 at 8:02 pm #

    Nice poem

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