Man Kahe

9 Jun

मन कहे
या ना कहे
लेकिन
दिल ये कहता है
मेरा चेहरा
आपकी
आँखों में रहता है !

बारिशों से मुझे
शिकायत नहीं है
इसलिए के
भीग कर के
आपका
हुस्न निखरता है
इन घटाओं से
शायद
तुम्हारी ज़ुल्फ़ का
सदियों से नाता है

तेरे रहते
चाँद यह
बदली में छुपता है
आपके
पुर नूर हुस्न से
यक़ीनन
यह कुछ तो जलता है !!

मेरी साँसों मे
समायीं
तेरे यौवन की
महक
मेरे कानो में
गूंजती
घुंघरुओं सी
तेरे खिलखिलाने की
चहक

तू कभी आती
कभी जाती
है मेरे ख्वाब में
सच कहूं तो
रात भर
उलझाती है
अपने
उन्मादित
शवाब में

आओ तुम
सुलझा दूँ मैं
तेरे मन के सारे डोर
सच कहूं मैं
ये प्यार मुझको
एक पहेली सा लगता है !!

मन कहे
या ना कहे
लेकिन
दिल ये कहता है
मेरा चेहरा
बन के दिल
आपकी
आँखों में हरदम रहता है !

मन कहे
या ना कहे
लेकिन
दिल तो ये ही कहता है !!

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