Yuh Hi

20 Apr

पलकों के पीछे सपने,पलते नहीं हैं यूँ ही,
दिल से दिल के रिश्ते,मिलते नहीं हैं यूँ ही,

स्पर्श प्यार का मखमली होता हीहै ऐसा
गाल शर्म से गुलाबी,खिलते नहीं हैं यूँ ही,

बाहें खुली हुई मेरी मोहब्ब्त का असर हो,
होंठों पर गीत पुराने,उभरते नहीं हैं यूँ ही,

खुदा का शुक्रिया ये उजाला मुझे दिया है
चराग कोई तूफ़ान में,जलते नहीं हैं यूँ ही

तनमन तेरा हरदम अब तो खिला रहता है,
लम्हे मधुर ‘मिलन’के सजते नहीं है यूँ ही,

पलकों के पीछे सपने,पलते नहीं हैं यूँ ही,
दिल से दिल के रिश्ते,बनते नहीं हैं यूँ ही,

‘मिलन’ ७/८/२०१५.कविता (यूँही) से

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