Chupa Kar Dard

14 Feb

छुपा कर दर्द अपना, कभी मुस्कुरा लिया हमने,
वक़्त मिला जब भी, कुछ गुनगुना लिया हमने,

दिल का आयना भी अश्कों को, देख नहीं पाया,
चेहरे को यकबयक इस कदर छुपा लिया हमने,

हर तरफ उनका ही अक्स नज़र आता है हमको,
इस कदर अपनी नज़रों में उसे बसा लिया हमने,

भागती फिरती हैं मेरी तो परछाईयां अब मुझसे,
प्यार की रौशनी से घर अपना सजा लिया हमने,

छोड़ जो दिया इस ज़माने ने मझधार में “मिलन”
उन कश्तियों को भी किनारे से लगा दिया हमने.

छुपा कर दर्द अपना, कभी मुस्कुरा लिया हमने,
वक़्त मिला जब भी, कुछ गुनगुना लिया हमने,

मिलन ‘मोनी’

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